Wednesday, April 22, 2026
BREAKING
Weather: गुजरात में बाढ़ से हाहाकार, अब तक 30 लोगों की मौत; दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश की चेतावनी जारी दैनिक राशिफल 13 अगस्त, 2024 Hindenburg Research Report: विनोद अदाणी की तरह सेबी चीफ माधबी और उनके पति धवल बुच ने विदेशी फंड में पैसा लगाया Hindus in Bangladesh: मर जाएंगे, बांग्लादेश नहीं छोड़ेंगे... ढाका में हजारों हिंदुओं ने किया प्रदर्शन, हमलों के खिलाफ उठाई आवाज, रखी चार मांग Russia v/s Ukraine: पहली बार रूसी क्षेत्र में घुसी यूक्रेनी सेना!, क्रेमलिन में हाहाकार; दोनों पक्षों में हो रहा भीषण युद्ध Bangladesh Government Crisis:बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट, सेना की कार्रवाई में 56 की मौत; पूरे देश में अराजकता का माहौल, शेख हसीना के लिए NSA डोभाल ने बनाया एग्जिट प्लान, बौखलाया पाकिस्तान! तीज त्यौहार हमारी सांस्कृतिक विरासत, इन्हें रखें सहेज कर- मुख्यमंत्री Himachal Weather: श्रीखंड में फटा बादल, यात्रा पर गए 300 लोग फंसे, प्रदेश में 114 सड़कें बंद, मौसम विभाग ने 7 अगस्त को भारी बारिश का जारी किया अलर्ट Shimla Flood: एक ही परिवार के 16 सदस्य लापता,Kedarnath Dham: दो शव मिले, 700 से अधिक यात्री केदारनाथ में फंसे Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी की सब-कैटेगरी में आरक्षण को दी मंज़ूरी

सोशल वेलफेयर

सरकार बच्चों और अन्य संवेदनशील उपयोगकर्ताओं को उभरते जोखिमों से बचाते हुए, जिम्मेदारीपूर्ण और सुरक्षित तरीके से एआई नवाचार और डिजिटल प्लेटफार्मों के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध

March 26, 2026 03:58 PM

सरकार विशेष रूप से बच्चों के लिए शिक्षा, सूचना और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानती है। साथ ही, सरकार इससे जुड़े जोखिमों से भी अवगत है, जिनमें हानिकारक सामग्री का सामना करना, साइबरबुलिंग और अत्यधिक स्क्रीन समय और डिजिटल निर्भरता से संबंधित मुद्दे शामिल हैं, इसलिए डिजिटल वातावरण में बच्चों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय अत्‍यंत आवश्यक हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 (संशोधित रूप में), और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत एक व्यापक कानूनी और नियामक ढांचा स्थापित किया है ताकि बच्चों सहित उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित, संरक्षित और जवाबदेह ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के साथ पढ़ा जाए, जैसा कि समय-समय पर संशोधित किया गया है, एक सुरक्षित और जवाबदेह ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

इस अधिनियम में साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशिष्ट दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं, जिनमें कंप्यूटर से संबंधित अपराध (धारा 43 को धारा 66 के साथ पढ़ा जाए), पहचान की चोरी (धारा 66सी), प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी (धारा 66डी), निजता का उल्लंघन (धारा 66ई), और अश्लील, यौन रूप से स्पष्ट या बाल यौन शोषण सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण (धारा 67, 67ए और 67बी) शामिल हैं। इसमें गैरकानूनी सामग्री को ब्लॉक करने (धारा 69ए), अपराधों में सहायता करने (धारा 84बी) का भी प्रावधान है, और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपराधों की जांच करने और उचित कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है (धारा 78 और 80)।

इसके अलावा, यह अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के साथ मिलकर, ऑनलाइन गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री की मेजबानी या प्रसारण को रोकने के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करता है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी और जवाबदेही दायित्वों को निर्धारित करता है।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के अनुसार, मध्यस्थों को उचित सावधानी बरतनी होगी और अश्लील, पोर्नोग्राफिक, निजता का उल्लंघन करने वाली, बच्चों के लिए हानिकारक, घृणा या हिंसा को बढ़ावा देने वाली, व्यक्तियों का प्रतिरूपण करने वाली या राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने वाली सामग्री सहित गैर-कानूनी सामग्री की मेजबानी या प्रसारण पर रोक लगानी होगी। नियमों में यह भी अनिवार्य है कि मध्यस्थ समय-समय पर उपयोगकर्ताओं को अपनी नीतियों और उनका पालन न करने के परिणामों के बारे में सूचित करें, जिसमें सामग्री को हटाना या पहुंच समाप्त करना शामिल है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और इसके अंतर्गत निर्मित नियम, बच्चों सहित व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करते हैं और उचित सुरक्षा उपायों एवं जवाबदेही के साथ वैध प्रकिया को अनिवार्य बनाते हैं। यह अधिनियम बच्चों के लिए विशिष्ट सुरक्षा उपाय निर्धारित करता है, जिसके तहत उनके व्यक्तिगत डेटा की प्रकिया से पहले माता-पिता या वैध अभिभावकों की सत्यापन योग्य सहमति अनिवार्य है और ट्रैकिंग, व्यवहार निगरानी और बच्चों को लक्षित विज्ञापन जैसी प्रणालियों पर रोक लगाता है। यह सहमति वापस लेने का अधिकार भी प्रदान करता है, जिसके तहत डेटा के संरक्षकों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसे डेटा को मिटाने का दायित्व होता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने समय-समय पर सलाह जारी की है, जिनमें 26.12.2023, 15.03.2024 और 29.12.2025 को जारी की गई सलाहें शामिल हैं, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के तहत मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी बरतने के दायित्वों को दोहराया गया है। इन सलाहों में, अन्य बातों के अलावा, अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण सामग्री सहित गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और दुर्भावनापूर्ण कृत्रिम मीडिया और डीपफेक जैसे उभरते नुकसानों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

जनरेटिव एआई के बढ़ते उपयोग और डीपफेक सहित कृत्रिम रूप से उत्पन्न सामग्री (एसजीआई) से जुड़े जोखिमों के साथ-साथ अश्लील, अभद्र, यौन रूप से स्पष्ट प्रकृति की एसजीआई (जिसमें सीएसईएएम भी शामिल है) बनाने या उत्पन्न करने के लिए ऐसी तकनीकों के संभावित दुरुपयोग को देखते हुए, जो उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचा सकती है, गलत सूचना फैला सकती है, चुनावों में हेरफेर कर सकती है, या व्यक्तियों का प्रतिरूपण सक्षम कर सकती है, उचित परामर्श के बाद, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 में संशोधन 10.02.2026 को अधिसूचित किया गया है, जो 20.02.2026 से लागू हो गया है।

इन संशोधनों से सोशल मीडिया और प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित अन्य मध्यस्थों के लिए उचित सतर्कता संबंधी दायित्वों को और मजबूत किया गया है। इसके तहत अवैध कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित सामग्री, जिसमें अश्लील, भ्रामक, प्रतिरूपणकारी या बच्चों के लिए हानिकारक सामग्री शामिल है, के प्रसार को रोकने के लिए उपयुक्त तकनीकी उपायों को लागू करना अनिवार्य किया गया है। नियमों में अनुमत कृत्रिम सामग्री की स्पष्ट लेबलिंग और पता लगाने की क्षमता, उपयोगकर्ताओं में जागरूकता बढ़ाना और सख्त अनुपालन से जुड़ी आवश्यकताओं को भी अनिवार्य किया गया है।

इसके अलावा, यह ढांचा स्पष्ट रूप से बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति के अंतरंग छवियों और प्रतिरूपण जैसे नुकसानों को शामिल करता है और कार्रवाई के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित करता है, जिसमें उचित निर्देशों पर 3 घंटे के भीतर गैरकानूनी सामग्री को हटाना, समयबद्ध शिकायत निवारण और संवेदनशील सामग्री से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई शामिल है।

इन उपायों के माध्यम से, भारत सरकार एक जिम्मेदार और सुरक्षित तरीके से एआई नवाचार और डिजिटल प्लेटफार्मों के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही बच्चों और अन्य कमजोर उपयोगकर्ताओं को डिजिटल इकोसिस्‍टम में उभरते जोखिमों से बचाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2020 में डिजिटल शिक्षा पर प्रज्ञाता दिशानिर्देश जारी किए, जो छात्रों की भलाई और सोशल मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने सहित सुरक्षित और प्रभावी ऑनलाइन शिक्षा के लिए एक संरचना प्रदान करते हैं। सीबीएसई ने डिजिटल शिष्टाचार पर दिशानिर्देश, शिक्षकों के लिए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण, 'साइबर सुरक्षा हैंडबुक' का प्रकाशन और साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों को साइबर क्लब स्थापित करने के लिए सलाह जारी करके इन प्रयासों को आगे बढ़ाया है। एनसीईआरटी ने भी अपने पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को शामिल किया है, जिसमें कक्षा 11वीं और 12वीं में "सामाजिक प्रभाव" पर एक अध्याय शामिल है (https://ncert.nic.in/textbook.php?kecs1=ps-11), और सीआईईटी-एनसीईआरटी ने साइबर सुरक्षा पर संसाधन सामग्री विकसित और वितरित की है (https://ciet.nic.in/pages.php?id=booklet-on-cyber-safety-security&ln=en)।

इसके अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा, 2023 के अनुरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को 21वीं सदी के एक प्रमुख कौशल के रूप में स्कूली शिक्षा में एकीकृत किया जा रहा है। एनसीईआरटी और सीबीएसई को के-12 स्तर तक आयु-अनुकूल एआई पाठ्यक्रम विकसित करने का कार्य सौंपा गया है, और एआई से संबंधित सामग्री को पाठ्यपुस्तकों, वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम और कौशल-आधारित शिक्षा में शामिल किया गया है। एनसीईआरटी, सीबीएसई, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति जैसे संस्थानों की भागीदारी के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण पहल की जा रही हैं। स्कूलों में एआई को सुरक्षित और जिम्मेदारी से अपनाने को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक और उद्योग भागीदारों के सहयोग से शिक्षा में एआई के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है।

बच्चों के विरुद्ध अपराध से संबंधित आंकड़े गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा रखे जाते हैं, जिन्हें https://www.ncrb.gov.in/ पर देखा जा सकता है। हालांकि, डिजिटल व्यसन के कारण होने वाली बाल आत्महत्याओं की वर्षवार और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशवार संख्या से संबंधित विशिष्ट आंकड़े अलग से नहीं रखे जाते हैं।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

Have something to say? Post your comment

और सोशल वेलफेयर समाचार

पोषण पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत आंध्र प्रदेश में पूर्व स्कूुली बच्चोंा ने पोषण जागरूकता पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए एक कार्यक्रम में सहभागिता की

पोषण पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत आंध्र प्रदेश में पूर्व स्कूुली बच्चोंा ने पोषण जागरूकता पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए एक कार्यक्रम में सहभागिता की

गैर-अधिसूचित, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश समुदायों के लिए विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी)

गैर-अधिसूचित, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश समुदायों के लिए विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी)

मिजोरम के खावबंग आईसीडीएस प्रोजेक्ट ने सामुदायिक भागीदारी और पोषण केंद्रित गतिविधियों के साथ पोषण पखवाड़ा 2026 मनाया

मिजोरम के खावबंग आईसीडीएस प्रोजेक्ट ने सामुदायिक भागीदारी और पोषण केंद्रित गतिविधियों के साथ पोषण पखवाड़ा 2026 मनाया

एनबीसीएफडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज किया

एनबीसीएफडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज किया

दिल्ली में चकमा युवा संवाद में एनसीएसटी अध्यक्ष ने जनजातीय युवाओं के सशक्तिकरण को और मज़बूत बनाने का आह्वान किया

दिल्ली में चकमा युवा संवाद में एनसीएसटी अध्यक्ष ने जनजातीय युवाओं के सशक्तिकरण को और मज़बूत बनाने का आह्वान किया

महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में राष्ट्रीय स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया

महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में राष्ट्रीय स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया

पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शनी एवं रंगोली तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शनी एवं रंगोली तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

एनएसएफडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज किया

एनएसएफडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज किया

‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन के ज़रिए आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रहण सुगम

‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन के ज़रिए आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रहण सुगम

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013  के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक डिजिटल शासन पहल - यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक डिजिटल शासन पहल - यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss