ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को जटिल क्षेत्र भत्ता प्रदान किया जाता है
सहायक नर्स-मिड वाइफ और डॉक्टरों को प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं
जिला और रेफरल अस्पतालों को उन्नत बनाकर मेडिकल कॉलेजों का विस्तार किया जा रहा है
मौजूदा चिकित्सा संस्थानों को मजबूत करके एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि की जा रही है
सामुदायिक प्रशिक्षण प्रदान करने और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार के लिए परिवार दत्तक ग्रहण कार्यक्रम शुरू किया गया है
जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम के तहत कम सेवा वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए जिला अस्पतालों में प्रशिक्षण अनिवार्य है
भारत की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति (बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन) 2022-23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य देखभाल प्रशासनिक आंकड़ों पर आधारित वार्षिक प्रकाशन है। पिछले पांच वर्षों के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, रिक्तियों और स्वीकृत पदों का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट पर निम्नलिखित यूआरएल पर उपलब्ध है:
स्वास्थ्य राज्य का विषय है। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने और रिक्त पदों को भरने और स्वास्थ्य सुविधाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) के रूप में प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। सरकार मानदंडों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कार्यवाही अभिलेख (आरओपी) के रूप में प्रस्तावों को मंजूरी देती है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दीर्घकालिक रूप से भारतीय जनस्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) के अनुसार पर्याप्त संख्या में नियमित पदों का सृजन करके मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी और अल्पावधि से मध्यम अवधि में कमियों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) पदों का उपयोग करना होगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आईपीएचएस के अनुसार माध्यमिक और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान करने के लिए (जिला अस्पताल और उससे नीचे के स्तर) नियमित मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में 13,88,185 पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर और 7,51,768 पंजीकृत आयुष चिकित्सक हैं। एलोपैथिक और आयुष में पंजीकृत चिकित्सकों की 80 प्रतिशत उपलब्धता से देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 होने का अनुमान है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत, देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों को सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु निम्नलिखित प्रोत्साहन दिए जाते हैं:
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को उनके आवासीय क्वार्टरों के लिए जटिल क्षेत्र भत्ता दिया जाए ताकि वे ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीज़ेरियन सेक्शन के लिए विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से स्त्री रोग विशेषज्ञों/आपातकालीन प्रसूति देखभाल (ईएमओसी) में प्रशिक्षित, बाल रोग विशेषज्ञों और एनेस्थेटिस्ट/जीवन रक्षक एनेस्थीसिया कौशल (एलएसएएस) में प्रशिक्षित डॉक्टरों को मानदेय प्रदान किया जाता है।
- डॉक्टरों के लिए विशेष प्रोत्साहन, समय पर प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) सुनिश्चित करने और उसका रिकॉर्ड रखने तथा किशोर प्रजनन और यौन स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए सहायक नर्स मिड-वाइफ (एएनएम) को प्रोत्साहन।
- राज्यों को विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए बातचीत योग्य वेतन की पेशकश करने की भी अनुमति है, जिसमें "यू कोट, वी पे" जैसी रणनीतियों में लचीलापन शामिल है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में वरीयतापूर्ण प्रवेश और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास व्यवस्था में सुधार जैसे गैर-मौद्रिक प्रोत्साहन भी शुरू किए गए हैं।
- विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत डॉक्टरों के बहु-कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाता है। स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए मौजूदा मानव संसाधन का कौशल उन्नयन एक प्रमुख रणनीति है।
देश में डॉक्टरों/चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए उपाय/कदम निम्नलिखित हैं:
- केंद्र प्रायोजित योजना के तहत जिला/रेफरल अस्पतालों को उन्नत बनाकर नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है, जिसके अंतर्गत 157 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है।
- राज्य सरकार/केंद्र सरकार द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना का उद्देश्य एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाना है।
- शिक्षकों की पर्याप्त उलब्धता के लिए संकाय सदस्यों की नियुक्ति हेतु डीएनबी योग्यता को मान्यता दी गई है।
- मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों/डीन/प्रिंसिपल/निदेशक के पदों पर नियुक्ति/विस्तार/पुनर्नियोजन के लिए आयु सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष करना।
- परिवार दतक ग्रहण कार्यक्रम (एफएपी): ग्रामीण आबादी को समान स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एफएपी को शामिल किया गया है। एफएपी के तहत मेडिकल कॉलेज गांवों को गोद लेते हैं और एमबीबीएस छात्र इन गांवों में परिवारों को गोद लेते हैं। इससे गोद लिए गए परिवारों की नियमित रूप से टीकाकरण, विकास निगरानी, मासिक धर्म स्वच्छता, आयरन और फोलिक एसिड (आईएफए) पूरक आहार, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, कीट नियंत्रण और दवा के नियमित सेवन के लिए निगरानी की जाती है। यह परिवारों को चल रहे सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में शिक्षित करने में भी मदद करता है।
- जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम (डीआरपी): राष्ट्रीय नगर निगम द्वारा अधिसूचित डीआरपी के तहत स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों को पाठ्यक्रम के भाग के रूप में जिला अस्पतालों में तीन महीने की अनिवार्य पोस्टिंग सह प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। डीआरपी ग्रामीण और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करके जनता को लाभ पहुंचाता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।