दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकास, बुनियादी ढांचे और उत्तराखंड की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जबकि बड़ी संख्या में लोग तकनीक के माध्यम से भी जुड़े।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देवभूमि उत्तराखंड को नमन करते हुए की और स्थानीय जनता के स्नेह व उत्साह के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने देरी से पहुंचने पर खेद जताते हुए बताया कि रास्ते में हुए लंबे रोड शो के कारण समय अधिक लगा, जहां लोगों का अभूतपूर्व समर्थन देखने को मिला।
उन्होंने देशवासियों को बैसाखी, बोहाग बिहू और पुथांडु जैसे नववर्ष पर्वों की शुभकामनाएं दीं और आगामी चारधाम यात्रा का उल्लेख करते हुए इसे देश की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण समय बताया। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को श्रद्धापूर्वक याद किया।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि विकास की नई दिशा तय करने वाला कदम है। इससे उत्तराखंड के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों को भी लाभ मिलेगा। यात्रा समय कम होगा, परिवहन सस्ता और तेज होगा तथा पर्यटन को नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दशक में देश में इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां पहले सालाना खर्च सीमित था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है। उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में सड़क, रेल और रोपवे परियोजनाओं पर काम जारी है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बेहतर हो रहा है।
उन्होंने आर्थिक गलियारों को देश की प्रगति की “भाग्य रेखाएं” बताते हुए कहा कि ये परियोजनाएं रोजगार सृजन, व्यापार विस्तार और औद्योगिक विकास को गति देती हैं। इस एक्सप्रेसवे से किसानों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि उनकी उपज तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंच सकेगी।
पर्यटन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच आसान होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। होटल, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने विंटर टूरिज्म और धार्मिक यात्राओं में बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इस परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उन्होंने पर्यटकों से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
अंत में, उन्होंने महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक न्याय और सैनिकों के सम्मान जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में हर वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है और देश इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।