नशा मुक्त भारत अभियान के तहत राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियानों के माध्यम से 29.68 करोड़ से अधिक नागरिकों से संपर्क पूरा हुआ
सरकार राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना के तहत देश भर में 765 नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों को सहायता प्रदान करती है
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, मादक पदार्थों की मांग में कमी, पुनर्वास और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सेवाओं की बेहतर डिलीवरी के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन को लगातार मजबूत कर रहा है। मंत्रालय ने निधि जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, नशामुक्ति के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और देश भर में पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए उपाय शुरू किए हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने सांसद श्रीमती प्रतिमा मंडल द्वारा पूछे गए कई प्रश्नों के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
केन्द्रीय मंत्री ने सदन को सूचित किया कि विभाग ने विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत प्रस्तावों के समय पर आगे बढ़ाने और राशि का जारी होना सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त निगरानी तंत्र स्थापित किया है। राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) और अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई) जैसी योजनाओं को कार्यान्वित करने वाले भागीदार गैर सरकारी संगठनों को अनुदान जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी लागू की गई है। इससे दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता कम होगी और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा।
मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे मे बताते हुए, श्री वर्मा ने कहा कि मंत्रालय मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना के तहत एक व्यापक और साक्ष्य-आधारित रणनीति लागू कर रहा है। यह रणनीति नई दिल्ली स्थित एम्स के राष्ट्रीय मादक पदार्थ निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी) द्वारा देश में मादक पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर किए गए पहले राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर आधारित है।
सर्वेक्षण के अनुमान के अनुसार, वयस्कों (18 से 75 वर्ष) में शराब का सबसे अधिक सेवन किया जाता है। लगभग 15.10 करोड़ लोग शराब पीते हैं। इसके बाद, इस श्रेणी में 2.90 करोड़ गांजा पीते हैं, 1.90 करोड़ अफीम का सेवन, 1.10 करोड़ नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले और 60 लाख दमकश (चिलम) वाले लोग हैं। बच्चों और किशोरों (10 से 17 वर्ष) में, सर्वेक्षण के अनुमान के अनुसार लगभग 40 लाख अफीम, 30 लाख शराब, 30 लाख चिलम और 20 लाख लोग गांजा पीकर नशा करते हैं। इससे निरंतर जागरूकता, रोकथाम और उपचार सम्बंलोकधी पहलों की आवश्यकता का पता चलता है।
केन्द्रीय मंत्री यह भी बताया कि राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना के तहत, मंत्रालय राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी अस्पतालों को निवारक शिक्षा, जागरूकता पैदा करने, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। वर्तमान में, मंत्रालय देश भर में 344 एकीकृत पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए), 45 सामुदायिक सहयोग आधारित सहकर्मी नेतृत्व केंद्र (सीपीएलआई), 76 पहुंच और ड्रॉप-इन केंद्र (जहां जरूरतमंद लोग बिना किसी पूर्व अपॉइंटमेंट के सीधे जाकर परामर्श, भोजन, स्वास्थ्य जांच और सहायता प्राप्त कर सकते हैं), 145 जिला नशामुक्ति केंद्र (डीडीएसी) और 155 नशा उपचार केंद्र (एटीएफ) को सहायता प्रदान कर रहा है।
15 अगस्त 2020 को शुरू नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) अगस्त 2023 में सभी जिलों में लागू किया गया था, मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक के रूप में उभरा है।
राष्ट्रव्यापी जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से इस अभियान ने आज तक, 29.68 करोड़ से अधिक नागरिकों तक अपनी पहुंच बनाई है, इनमें 11.43 करोड़ से अधिक युवा और 8.05 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए 1.17 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र भी इस अभियान में शामिल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, देश भर के 21.73 लाख शिक्षण संस्थानों में पहुंच गतिविधियों के साथ-साथ 28.29 लाख से अधिक व्यक्तियों का उपचार और पुनर्वास किया गया है।
उपचार सेवाओं तक पहुंच में सुधार लाने के लिए, मंत्रालय ने एनएमबीए 2.0 मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। इससे नागरिक निकटतम नशामुक्ति केंद्र का पता लगा सकते हैं। 2024-25 के दौरान, जीएपी जिलों में 55 नए जिला नशामुक्ति केंद्रों (डीडीएसी) को मंजूरी दी गई, जबकि 2025-26 के दौरान 21 अतिरिक्त डीडीएसी स्थापित किए गए। इससे देश के नशामुक्ति ढांचे का और विस्तार हुआ।
श्री बी.एल. वर्मा ने सदन को यह भी सूचित किया कि दिसंबर 2024 में मेसर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और 2025 में नीति आयोग द्वारा किए गए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकनों से पता चला है कि मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना ने संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और देश भर में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
सरकार नशामुक्त और सामाजिक रूप से समावेशी भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के लिए पुनर्वास अवसंरचना का विस्तार कर रही है, निवारक उपायों को बेहतर बना रही है। इसके साथ ही कार्यान्वयन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और केंद्र प्रायोजित योजनाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है। सतत सामुदायिक भागीदारी, बेहतर शासन और प्रौद्योगिकी-आधारित सेवा वितरण के माध्यम से, मंत्रालय कमजोर समुदायों की सुरक्षा और सभी के लिए सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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