भारत सरकार नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम(नमस्ते) योजना के माध्यम से जोखिम भरे स्वच्छता कार्यों को समाप्त करने तथा स्वच्छता कर्मियों की गरिमा, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को निरंतर मजबूती प्रदान कर रही है। इस पहल का उद्देश्य सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई का पूर्ण मशीनीकरण सुनिश्चित करना है। साथ ही, यह स्वच्छता कर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा आजीविका सहायता को भी सुदृढ़ बनाने पर बल देती है।
यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने लोकसभा में श्री अप्पलानायडू कलिसेट्टी और डॉ. बायरेड्डी शबरी द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रदान की।
मंत्री श्री अठावले ने बताया कि मैला ढोने वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए वर्ष 2013 और वर्ष 2018 में सर्वेक्षण किए गए थे। वर्ष 2018 के सर्वेक्षण के दौरान, 14 राज्यों में कुल 44,217 मैला ढोने वाले व्यक्तियों की पहचान की गई थी। इसके बाद, मैला ढोने वाले व्यक्तियों के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत देश के सभी जिलों में एक नया राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण कराया गया, जिसमें कोई भी मैला ढोने वाला व्यक्ति नहीं पाया गया। यह मैला ढोने की प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सरकार के निरंतर एवं सतत प्रयासों को दर्शाता है।

मंत्री श्री अठावले ने आगे बताया कि वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई नमस्ते योजना का उद्देश्य मशीनीकरण तथा बेहतर व्यावसायिक सुरक्षा के माध्यम से स्वच्छता कार्य को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण बनाना है। इस योजना के अंतर्गत, राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों(एसएसडब्ल्यू) का सत्यापन किया जा चुका है। साथ ही, कार्यस्थल की सुरक्षा बढ़ाने के लिए 87,037 व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण(पीपीई) किट स्वच्छता कर्मियों को उपलब्ध कराई गई हैं।
उत्तर में आगे बताया गया कि नमस्ते योजना के अंतर्गत स्थापित आपातकालीन स्वच्छता इकाइयां आवश्यक सुरक्षा उपकरणों से सुसज्जित हैं। इनमें टॉर्च सहित सुरक्षा हेलमेट, सुरक्षा ट्राइपॉड, एक्सियल फैन ब्लोअर, एंटी-स्टैटिक कंड्यूट, पूर्ण शरीर सुरक्षा वाडर सूट तथा मल्टी गैस डिटेक्टर जैसे उपकरण शामिल हैं। इन उपकरणों की सहायता से स्वच्छता कर्मी सीवर एवं सेप्टिक टैंक से संबंधित कार्य अधिक सुरक्षित ढंग से कर सकते हैं। देशभर में ईआरएसयू को 753 सुरक्षा उपकरण सेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता के संबंध में मंत्री ने बताया कि नमस्ते योजना एक केन्द्रीय योजना है, इसलिए इसमें राज्यवार निधियों के आवंटन का प्रावधान नहीं है। वर्ष 2023 में योजना प्रारंभ होने के बाद से, वर्ष 2023-24 के दौरान ₹30.06 करोड़ जारी किए गए, वर्ष 2024-25 के दौरान ₹47.625 करोड़ जारी किए गए, वर्ष 2025-26 के दौरान ₹97.6791 करोड़ जारी किए गए, तथा वर्ष 2026-27 के दौरान (अब तक) ₹28.30 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। इसी अवधि के दौरान संबंधित व्यय क्रमशः ₹30.06 करोड़, ₹35.64 करोड़, लगभग ₹97.6791 करोड़ तथा लगभग ₹12.45 करोड़ रहा है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय स्वच्छता कर्मियों को गरिमा, सुरक्षा तथा आधुनिक मशीनीकृत उपकरणों के साथ अपना कार्य करने हेतु आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। नमस्ते योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से सरकार स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण को बढ़ावा देने, स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा को मजबूत करने, उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण(पीपीई) उपलब्ध कराने, आधुनिक आपातकालीन अवसंरचना विकसित करने तथा देशभर में जोखिम भरे मैनुअल स्वच्छता कार्यों की प्रथा का पूर्ण उन्मूलन करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।