*कर्नाटक की राज्यपाल डॉ. सुधा यादव का ससुराल गांव धामलावास में हुआ भव्य स्वागत, कारगिल शहीद पति को दी श्रद्धांजलि*
*हरियाणा दिवस और कर्नाटक राज्योत्सव पर क्षेत्रवासियों व दोनों राज्यों के नागरिकों को दीं हार्दिक शुभकामनाएं*
चंडीगढ़ 1 नवंबर - कर्नाटक की नवनियुक्त राज्यपाल डा. सुधा यादव रविवार को राज्यपाल बनने के बाद पहली बार अपने ससुराल गांव धामलावास (रेवाड़ी) पहुंचीं। गांव आगमन पर क्षेत्रवासियों ने फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया।
इस अवसर पर राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने हरियाणा दिवस और कर्नाटक राज्योत्सव (स्थापना दिवस) की सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी।
उन्होंने कहा कि यह एक सुखद और अद्भुत संयोग है कि आज ही के दिन उनके गृह राज्य हरियाणा और कर्म राज्य कर्नाटक दोनों का स्थापना दिवस है। उन्होंने दोनों प्रांतों की निरंतर प्रगति और नागरिकों की खुशहाली की कामना की।
इस दौरान राज्यपाल ने अपने पति एवं प्रथम कारगिल शहीद डिप्टी कमांडेंट सुखबीर सिंह यादव के समाधि स्थल पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ग्रामीणों के स्नेह और सहयोग को अपनी असली ताकत बताया। जिला प्रशासन की ओर से राज्यपाल के आगमन पर उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया गया।
राज्यपाल ने 26 मई 1999 के उस घटनाक्रम को याद किया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी थी। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, लेकिन क्षेत्र के लोगों ने हमेशा मेरा भरपूर साथ दिया है। एक अध्यापिका से लेकर राज्यपाल के इस सफर में सभी का सहयोग, आशीर्वाद और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी रही है।
डॉ. सुधा यादव ने देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा, मेहनत और जिम्मेदारी के साथ पालन करेंगी।
उन्होंने हरियाणा और विशेषकर क्षेत्रवासियों को कर्नाटक आने का आमंत्रण भी दिया, ताकि लोग वहां की समृद्ध शिक्षा व्यवस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू हो सकें।
इस अवसर पर डीसी अभिषेक मीणा, एसपी हेमेंद्र मीणा, एसडीएम दलबीर सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव, वीर कुमार यादव, निशांत यादव, गणमान्य व्यक्ति एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे |
क्रमांक 2026
*राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित हीरक जयंती समारोह में सम्मिलित हुईं*
*हरियाणा की धरती ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्र निर्माण तक हर क्षेत्र में दिया अतुलनीय योगदान - राष्ट्रपति*
चंडीगढ़, 1 नवंबर - भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु रविवार को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में राज्य के गठन के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर, उन्होंने हीरक जयंती के लोगो को भी लॉन्च किया। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति के विकास में हरियाणा के इस क्षेत्र का उल्लेखनीय योगदान रहा है। गीता का अमर संदेश इसी धरती से समस्त विश्व में फैला था। भारतीयता को गौरव प्रदान करने वाली इस पुण्य भूमि को राष्ट्रपति ने प्रणाम किया। उन्होंने भारत की प्रगति-यात्रा के अनेक आयामों में सार्थक योगदान देने वाले हरियाणावासियों को भी बधाई दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान कृष्ण के निष्काम कर्मयोग का अमर संदेश सारे विश्व में फैलाने वाली इस धरती ने आधुनिक युग में भी मानवीय पराक्रम के अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं। इसकी संतानों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सामाजिक परिवर्तन, लोकतंत्र, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्रों में सार्थक योगदान किया है। राव तुलाराम का अदम्य साहस, दीनबंधु सर छोटूराम की किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता, पंडित नेकीराम शर्मा की राष्ट्रसेवा और दादा लखमीचंद की लोक-सांस्कृतिक साधना हरियाणा की अमूल्य विरासत हैं।
उन्होंने कहा कि बीसवीं सदी में हरियाणा के प्रथम शहीदों में गिने जाने वाले अंबाला के कांशीराम जी सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल के साथ मिलकर गदर पार्टी स्थापित करने वालों में से एक थे। भारत लौटने के लगभग एक वर्ष बाद ब्रिटिश सरकार ने 1915 के इसी नवंबर माह में उनको फाँसी दे दी थी।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शहरों के साथ ही यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों ने भी बढ़-चढ़ कर सहभागिता की थी। कम उम्र की बेटियाँ भी इन आंदोलनों में खुलकर सामने आती थीं।
इसी संदर्भ में एक तथ्य का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि रेवाड़ी की एक 12 वर्ष की बेटी की 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में निर्भीक सहभागिता की बात रिकॉर्डों में है। नमक कानून तोड़ने के लिए इस बेटी ने अपने बचपन की पूरी बचत लगाकर नमक खरीदा। प्रतिदिन दो पैसे जोड़कर उसने वर्षों में जितने पैसे जोड़े थे, वह सम्पूर्ण पूँजी उसने इस आंदोलन को अर्पित कर दी। उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि इस प्रेरक प्रकरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करके समाज के सामने लाया जाए।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हरियाणा की इसी धरती पर जन्मी सुचेता कृपलानी ने भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनकर नया इतिहास रचा। नवगठित हरियाणा राज्य की प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में शन्नो देवी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की अग्रणी भूमिका का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी राज्य की बेटी कल्पना चावला ने अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक पहुँचकर अनगिनत बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है।
राष्ट्रपति ने महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार की सजगता और संवेदनशीलता के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि राशन डिपो के आवंटन में महिला आरक्षण, पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व और ट्रांसजेंडरों के लिए Welfare Board का गठन जैसी पहलें बड़े उदाहरण हैं। महिला सशक्तीकरण के अनेक आयामों में हरियाणा ने पिछले लगभग एक दशक में विशेष प्रगति की है। जनवरी 2015 में, हरियाणा के पानीपत से ही ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया था। यह अभियान महिला सशक्तीकरण की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई है। बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है। जन्म के समय बालकों के मुकाबले बेटियों का लिंगानुपात 2014 में 871 था, यह बढ़कर नवंबर 2025 में लगभग 915 हो गया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य और केन्द्र सरकार के समन्वित प्रयासों से यह अनुपात समानता का स्तर प्राप्त कर लेगा और राज्य में महिला स्वास्थ्य और बालिका शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी लगातार हो रहे सुधार की गति बढ़ेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि उपयुक्त प्रोत्साहन मिलने के कारण प्रदेश की बेटियों ने अनेक खेलों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया है। मनु भाकर, स्वीटी बूरा, जैस्मिन लम्बोरिया जैसी कितनी ही बेटियाँ आज हरियाणा का माथा गर्व से ऊँचा कर रही हैं। भारत के खेल इतिहास में हरियाणा के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। कजाकिस्तान में चल रहे World Wrestling Championships 2026 में हरियाणा की बेटी, मनीषा भानवाला ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे यह सम्मान प्राप्त करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान हैं। उन्हें इस स्वर्णिम उपलब्धि के लिए उनको हार्दिक बधाई दी और इस चैंपियनशिप में पदक प्राप्त करने वाली भारत की सभी बेटियों की भी सराहना की। इसी वर्ष हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते गये 7 स्वर्ण पदकों में से 5 बेटियों के नाम रहे। रेवाड़ी की पैरा खिलाड़ी शर्मिला ढांडा ने स्वर्ण पदक जीतकर सिद्ध कर दिया कि संकल्प अडिग हो तो शारीरिक चुनौती सफलता की राह बहुत देर तक रोक नहीं पाती।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती ने हर क्षेत्र में प्रतिभाओं को जन्म दिया है। प्रदेश के अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तियों को पद्म सम्मान प्रदान करने का मुझे अवसर प्राप्त हुआ है। इसमें साहित्य, लोककला, समाज सेवा और शिक्षा के साथ-साथ खेल, पैरा तीरंदाजी और विज्ञान क्षेत्रों से जुड़े लोग हैं। प्रतिभा और शौर्य से यह प्रदेश सदा समृद्ध रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में आहुति देने वाली संतानों की जननी इस वीरभूमि ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए भी सदैव बढ़-चढ़कर योगदान किया है। देश की सेना को लगातार समर्पित और साहसी सैनिक देने की परंपरा यहाँ आज भी जीवंत है।
उन्होंने कहा कि अपनी स्थापना के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में आज हरियाणा तेजी से आगे बढ़ रहा है। केन्द्र सरकार के समन्वय से राज्य के विकास को नयी दिशा मिल रही है। हाल ही में जींद-सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन शुरू की गयी है। हाइड्रोजन से चलने वाली यह देश की पहली ट्रेन है। मुझे ज्ञात हुआ है कि हरियाणा में Railway Infrastructure के आधुनिकीकरण में भी महत्वपूर्ण पहलें हुई हैं। खाद्यान्न के क्षेत्र में भी हरियाणा ने देश में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। प्रदेश की खाद्यान्न उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। देश की खाद्य सुरक्षा में प्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा समावेशी विकास की नयी सीढ़ियाँ चढ़ रहा है। गहरी जड़ों वाली अनेक सामाजिक रूढ़ियाँ टूट रही हैं। सर्वांगीण विकास और समझदारी की ये धाराएँ एकरूप होकर ही बढ़नी चाहिएँ। यह विश्व को गीता का संदेश देने वाली धरती है। भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में ज्ञान और कर्म, शक्ति और करुणा, नेतृत्व और लोककल्याण का आदर्श समन्वय था। उनके व्यक्तित्व और संदेश की प्रेरणा हरियाणा के विकास में सक्रिय हर व्यक्ति और संस्थान को कर्तव्यपालन की शक्ति और समझ दे।
क्रमांक 2026
*राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना वर्ष समारोह एवं स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी समारोह में की शिरकत*
**मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा राष्ट्र का भविष्य युवा पीढ़ी के संस्कारों और सामर्थ्य से बनता है**
**मुख्यमंत्री ने गुरुकुल की गौरवशाली परंपरा और वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में योगदान की सराहना की**
**विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन, संघर्ष और बलिदान को किया जीवंत**
चंडीगढ़, 1 नवंबर - राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को संरक्षित रखने के साथ-साथ भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी के महान व्यक्तित्व, त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को नमन किया तथा भारतीय संस्कृति एवं वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित 114वें स्थापना वर्ष समारोह एवं स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बलिदान शताब्दी समारोह’ में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी कहा कि गुरुकुल के इस पवित्र प्रांगण में इतिहास की प्रेरणा, वर्तमान का गौरव और भविष्य का संकल्प तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन हर हरियाणावासी के लिए विशेष है, क्योंकि प्रदेश अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर हीरक जयंती मना रहा है। इसी शुभ अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान शताब्दी वर्ष तथा गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 114वां स्थापना समारोह मनाया जा रहा है। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए गुरुकुल परिवार को स्थापना दिवस और प्रदेशवासियों को हरियाणा दिवस एवं हीरक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि ज्ञान और संस्कार के इस तीर्थ में राष्ट्रपति की उपस्थिति शिक्षा के महत्व को और अधिक रेखांकित करती है।
*स्वामी श्रद्धानंद जी ने शिक्षा को राष्ट्र जागरण का बनाया आधार*
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने गुलाम भारत में स्वाभिमान जगाया, सामाजिक सुधार की चेतना पैदा की और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। महर्षि दयानंद सरस्वती जी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने ज्ञान, चरित्र और सेवा के आधार पर सशक्त समाज के निर्माण का मार्ग दिखाया। स्वामी जी जानते थे कि राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के संस्कारों और सामर्थ्य से बनता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने ऐसी शिक्षा का संकल्प लिया, जो विद्यार्थी को ज्ञानवान, अनुशासित, साहसी, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाए।
उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने के इस अवसर पर उनके आदर्श हमें अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग करते हैं। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम शिक्षा का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1912 में स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा स्थापित यह गुरुकुल उनकी दूरदृष्टि की जीवंत धरोहर है। यहां भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इस संस्था की यात्रा में योगदान देने वाले आचार्यों, प्रबंधकों, सहयोगियों और पूर्व विद्यार्थियों का अभिनंदन किया। साथ ही, आचार्य देवव्रत जी के गुरुकुल के प्रति समर्पण और संस्कारयुक्त शिक्षा के प्रसार के प्रयासों की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने आचार्य देवव्रत जी द्वारा की जा रही प्राकृतिक खेती की भी सराहना की,उन्होंने कहा उनके द्वारा 180 एकड़ में प्राकृतिक खेती की जाती है जहां पर कोई भी कीटनाशक दवाई का इस्तेमाल नहीं होता।
*विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से किया स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन और बलिदान का चित्रण*
समारोह में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और शारीरिक शिक्षा पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने मलखंभ, सूर्य नमस्कार और व्यायाम के माध्यम से अपनी प्रतिभा, अनुशासन एवं शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन, संघर्ष, सामाजिक सुधार के कार्यों, राष्ट्रभक्ति और बलिदान पर आधारित विशेष प्रस्तुति भी दी गई। इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने महान संत एवं राष्ट्रभक्त के प्रेरणादायक जीवन और उनके आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया।
क्रमांक 2026
सुमित चावला
*गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने स्वामी श्रद्धानंद जी के योगदान को किया नमन*
*आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र को स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों और आदर्शों की जीवंत धरोहर बताया*
*प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा, स्वामी श्रद्धानंद जी का त्याग और समर्पण भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत*
चंडीगढ़, 1 नवंबर - गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं शिक्षाविद् स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों, आदर्शों और संकल्पों की जीवंत धरोहर है। स्वामी श्रद्धानंद जी ने इसी भूमि से शुद्धि आंदोलन को गति दी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी यहां से महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया। आचार्य देवव्रत रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में आयोजित 114वें स्थापना वर्ष समारोह एवं स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बलिदान शताब्दी समारोह’ को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से बलवान, मानसिक रूप से सक्षम, संस्कारवान और चरित्रवान बनाना है। गुरुकुल के विद्यार्थी ही असली मायने में ‘जेन जी’ हैं, क्योंकि वे शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और जीवन मूल्यों को भी आत्मसात करते हैं। उन्होंने बताया कि गुरुकुल के 125 विद्यार्थियों ने एनडीए के माध्यम से सेना में अधिकारी बनने की उपलब्धि हासिल की है, जो संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों और उनके द्वारा शुरू किए गए शिक्षा एवं समाज सुधार के कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। गुरुकुल में करीब 1500 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और यहां के विद्यार्थियों ने आईआईटी सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले हासिल किए हैं। गुरुकुल की अनुशासित दिनचर्या, शारीरिक सुदृढ़ता और संस्कार विद्यार्थियों को शिक्षित, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। स्वामी श्रद्धानंद जी के आदर्शों की झलक गुरुकुल के विद्यार्थियों में देखी जा सकती है।
*गुरुकुल में अनुशासन, संस्कार और शिक्षा के माध्यम से तैयार हो रहे राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक*
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन को सत्यनिष्ठा, निर्भीकता, सेवा, त्याग और आत्मबलिदान का अद्वितीय उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी महर्षि दयानंद सरस्वती की महान परंपरा के तेजस्वी प्रतिनिधि थे। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मसंयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का माध्यम माना।
प्रो. घोष ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करने और वैदिक शिक्षा का प्रसार करने के उद्देश्य से अपनी संपत्ति तक गुरुकुल की स्थापना एवं शिक्षा के महान कार्य के लिए समर्पित कर दी। उनके लिए व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से बढ़कर समाज का कल्याण और राष्ट्र का भविष्य था। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्यनिष्ठ, अनुशासित, आत्मनिर्भर और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाने पर बल दिया।
*स्वामी श्रद्धानंद जी का त्याग और समर्पण भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत*
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि बलिदान का अर्थ केवल मृत्यु का वरण करना नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ, भय और सुविधाओं से ऊपर उठकर लोकमंगल के लिए जीवन समर्पित करना है। स्वामी श्रद्धानंद जी का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार समाज, शिक्षा और राष्ट्र के कल्याण में योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके आदर्श सदैव समाज और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
इस अवसर पर आचार्य देवव्रत ने स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान शताब्दी समारोह के लोगो का भी अनावरण किया। उन्होंने बताया कि शताब्दी समारोह के तहत स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन, विचारों, सामाजिक सुधार के कार्यों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से पूरे वर्ष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
क्रमांक 2026
सुमित चावला
*हरियाणा की पहचान केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि कर्म, कर्तव्यनिष्ठा और सांस्कृतिक मूल्यों की समृद्ध परंपरा से भी है - राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष*
*विकसित हरियाणा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है -राज्यपाल*
चंडीगढ़, 1 नवंबर – हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने हरियाणा के गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छह दशकों की यह यात्रा केवल एक नए राज्य के निर्माण और विकास की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, श्रम, आत्मसम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और सामूहिक संकल्प की ऐसी गाथा है, जिसने प्रदेश को राष्ट्रीय पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। हरियाणा की असली ताकत यहां की मिट्टी से जुड़े वे जीवन मूल्य हैं, जो किसान के परिश्रम, सैनिक के साहस और खिलाड़ी के अनुशासन में दिखाई देते हैं।
राज्यपाल रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे।
उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं तथा समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की।
*कुरुक्षेत्र की धरती का संदेश आज भी प्रासंगिक*
प्रो. असीम कुमार घोष ने हरियाणा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। गीता में निहित निष्काम कर्म, कर्तव्य और धर्म का संदेश आज भी मानव जीवन को दिशा देने की क्षमता रखता है। हरियाणा के सामाजिक चरित्र में भी इसी कर्मप्रधान दर्शन की झलक दिखाई देती है। यहां का किसान बिना थके खेतों में परिश्रम करता है, सैनिक निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा करता है और खिलाड़ी अपने अनुशासन एवं समर्पण से देश का गौरव बढ़ाता है। ये सभी हरियाणा की उस जीवंत परंपरा के प्रतीक हैं, जिसमें कर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने कृषि प्रधान राज्य के रूप में भारत की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज यह राज्य कृषि, उद्योग, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और खेल के क्षेत्र में अग्रणी है। गुरुग्राम की गगनचुंबी इमारतों से लेकर गांवों के अखाड़ों तक, हरियाणा ने यह साबित किया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं।
राज्यपाल ने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो हरियाणा को भी निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए। वर्ष 1966 की प्रति व्यक्ति आय की तुलना में वर्ष 2025-26 में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय लगभग 3,95,618 रुपये होने का अनुमान है, जो राज्य की शानदार समावेशी प्रगति को दर्शाता है।
*विश्वविद्यालयों को ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण का भी केंद्र बनना होगा*
राज्यपाल ने युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि युवा हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे पूरी लगन के साथ अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयास करें, नवाचार को अपनाएं और ईमानदारी से समाज की सेवा करें। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की विशेष जिम्मेदारी है। उन्हें न केवल कुशल पेशेवर तैयार करने चाहिए, बल्कि हमारी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण भी करना चाहिए।
*विकसित हरियाणा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है*
प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि विकसित हरियाणा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जिस प्रकार मानव शरीर के प्रत्येक अंग का स्वस्थ और सशक्त होना पूरे शरीर के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार देश के प्रत्येक राज्य का विकसित होना संपूर्ण भारत की प्रगति के लिए जरूरी है। हरियाणा सहित देश के सभी राज्यों का समग्र विकास ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक, भौतिक, सैन्य अथवा सामाजिक रूप से शक्तिशाली राष्ट्र बनना नहीं है। विकसित भारत वह होगा, जहां विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ऐसा भारत, जो समाज के सबसे पिछड़े और वंचित व्यक्ति की आशाओं, आकांक्षाओं, कठिनाइयों और पीड़ाओं को समझे तथा उसे सम्मानजनक जीवन जीने के समान अवसर उपलब्ध करवाए। उन्होंने बेटियों को सशक्त बनाने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा अपनी भाषा, विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया।
राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अधिक जीवंत और सबको साथ लेकर चलने वाला हरियाणा बनाने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दें।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, सांसद श्री नवीन जिंदल, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के निदेशक डॉ आदित्य दहिया, उपायुक्त श्री विश्राम कुमार मीणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
क्रमांक – 2026
*हरियाणा ने 60 वर्षों में प्रगति का लंबा सफर तय किया, अब देश का पहला विकसित राज्य बनाने का संकल्प - मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*
*राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कुरुक्षेत्र में हरियाणा दिवस पर आयोजित हीरक जयंती समारोह में की शिरकत*
*हरियाणा की बेटियां खेत से खेल के मैदान, सेना से स्टार्टअप तक बढ़ा रही हैं प्रदेश का गौरव - मुख्यमंत्री*
*हरियाणा की पहचान मेहनती किसान, बहादुर जवान, धाकड़ खिलाड़ी और सशक्त नारी से है*
*देश की GDP में हरियाणा का योगदान लगभग 3.6 प्रतिशत, प्रति व्यक्ति आय बड़े राज्यों में सर्वाधिक*
चंडीगढ़, 1 नवंबर — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा ने अपने गठन के 60 वर्षों में प्रगति का लंबा सफर तय किया है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने हरियाणा को देश का पहला विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है, इसी ध्येय के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का गीता की पावन धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना प्रदेशवासियों के लिए गर्व और गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति की जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ओडिशा के मयूरभंज जिले के छोटे से गांव उपरबेड़ा से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और संविधान की गरिमा का प्रतीक है। उनकी यह प्रेरणादायी यात्रा देश की प्रत्येक बेटी, गरीब परिवार और आदिवासी समाज के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा है।
*गीता की धरती कुरुक्षेत्र से मिलता है कर्तव्य और लोक कल्याण का संदेश*
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। इसी पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के माध्यम से कर्तव्य, साहस और लोक कल्याण का दिव्य संदेश दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति की वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर कुरुक्षेत्र यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उस समय राष्ट्रपति ने गीता को मानवता के लिए आध्यात्मिक प्रकाश और जीवन को दिशा देने वाला महान ग्रंथ बताया था। आज उनकी पुनः उपस्थिति इस पावन भूमि के लिए विशेष गौरव का अवसर है।
*किसानों, जवानों, खिलाड़ियों और मातृशक्ति के परिश्रम से बनी हरियाणा की पहचान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा का गठन हुआ था। उस समय प्रदेश को पिछड़े क्षेत्र के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज हरियाणा देश के अग्रणी और तेजी से विकास करने वाले राज्यों में शामिल है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों, मजदूरों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, खिलाड़ियों और माताओं-बहनों के अथक परिश्रम का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की पहचान मेहनती किसान, बहादुर जवान, धाकड़ खिलाड़ी और सशक्त नारी से है। प्रदेश की बेटियां आज खेतों से लेकर खेल के मैदानों तक, सेना से लेकर स्टार्टअप तक प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने देश के अन्न भंडार भरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वहीं, पशुपालकों ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर 'देशां में देश हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा' की कहावत को सार्थक किया है। प्रदेश के जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए हमेशा अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि खेलों के क्षेत्र में भी हरियाणा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 11 पदक और एशियाई खेलों में 32 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा लहराता है, उसमें हरियाणा की मिट्टी की मेहनत और प्रतिभा की महक होती है।
*क्षेत्रफल में छोटा, लेकिन आर्थिक योगदान और औद्योगिक सामर्थ्य में बड़ा है हरियाणा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का छोटा राज्य है, लेकिन आर्थिक सामर्थ्य और उपलब्धियों के मामले में इसकी पहचान बहुत बड़ी है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में हरियाणा की हिस्सेदारी मात्र 1.34 प्रतिशत है, जबकि देश की GDP में प्रदेश का योगदान लगभग 3.6 प्रतिशत है। बड़े राज्यों में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक है।
उन्होंने कहा कि देश में बनने वाली प्रत्येक तीन में से दो पैसेंजर कारों का उत्पादन हरियाणा में होता है। देश का हर दूसरा ट्रैक्टर और प्रत्येक 10 में से छह मोटरसाइकिलें भी हरियाणा में बनती हैं। इसी प्रकार, भारत के बासमती चावल के निर्यात में हरियाणा का योगदान 60 प्रतिशत से अधिक है। यह उपलब्धियां दर्शाती हैं कि औद्योगिक उत्पादन से लेकर कृषि निर्यात तक हरियाणा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है।
*नवाचार और जनकल्याणकारी पहलों में हरियाणा ने स्थापित किए नए कीर्तिमान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवाचार और जनकल्याणकारी पहलों के क्रियान्वयन में भी हरियाणा ने देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहां सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जा रही है। गांवों को लाल डोरा मुक्त करने और पढ़ी-लिखी पंचायतों के गठन की पहल भी सबसे पहले हरियाणा ने की। इसके अलावा, देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन जींद-सोनीपत के बीच हरियाणा में हुआ है। वहीं, रोहतक और कुरुक्षेत्र में देश के पहले एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का निर्माण कर प्रदेश ने आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास में भी नई मिसाल कायम की है।
*विकसित भारत-2047 के संकल्प को पूरा करने में हरियाणा निभाएगा अग्रणी भूमिका*
मुख्यमंत्री ने आधुनिक हरियाणा के निर्माण में योगदान देने वाले सभी महान व्यक्तित्वों और प्रदेशवासियों के परिश्रम को नमन करते हुए कहा कि पिछले 60 वर्षों में हरियाणा ने विकास की लंबी यात्रा तय की है। अब समय है कि इस प्रगति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को पूरा करने में हरियाणा अपनी अग्रणी भूमिका निभाएगा और देश का पहला विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की विकास यात्रा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। प्रदेश तरक्की के साथ इंसानियत, विकास के साथ भाईचारा और आधुनिकता के साथ अपने संस्कारों एवं परंपराओं को भी सहेजकर रखेगा। यही हरियाणा की वास्तविक पहचान है और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे बड़ी विरासत है।
*छह दशकों में हरियाणा ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और संकल्प के बल पर देश में बनाई विशिष्ट पहचान - अनुराग रस्तोगी*
हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को अस्तित्व में आया हरियाणा आज अपने गठन के 60 वर्ष पूर्ण कर हीरक जयंती मना रहा है। यह अवसर प्रदेश की छह दशकों की विकास यात्रा, परिश्रम, संकल्प और सामूहिक उपलब्धियों को स्मरण करने का है। उन्होंने राष्ट्रपति महोदया का हरियाणा सरकार एवं प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि इस गौरवशाली उत्सव में उनका सानिध्य सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि गठन के समय हरियाणा के पास सीमित संसाधन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन प्रदेश ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से कृषि, उद्योग, शिक्षा, खेल और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज हरियाणा देश के खाद्यान्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों, जवानों, श्रमिकों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों, उद्यमियों और प्रत्येक हरियाणवी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, सांसद श्री नवीन जिंदल, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के निदेशक डॉ आदित्य दहिया, उपायुक्त श्री विश्राम कुमार मीणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
क्रमांक – 2026
*हरियाणा अपने पूरे सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल नेटवर्क को डिजिटल मैप पर लाएगा, एक क्लिक पर मिलेंगी अस्पतालों की जानकारी*
चंडीगढ़, 1 नवंबर- हरियाणा सरकार अपने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के नेटवर्क को एक सिंगल डिजिटल मैप पर लाने की तैयारी कर रही है। इससे नागरिक एक क्लिक के माध्यम से अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, साथ ही नीति निर्माताओं को पूरे राज्य में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे और सेवाओं की कमियों का स्पष्ट चित्र मिल सकेगा।
जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) मैपिंग के जरिए विकसित इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य, आयुष और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभागों के स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ी जानकारी को एक एकीकृत मंच पर लाना है, ताकि बिखरे हुए विभागीय रिकॉर्ड्स की जगह एक अधिक सुलभ और समन्वित सूचना प्रणाली स्थापित की जा सके।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने रविवार को यहां एक बैठक में इस कार्य की प्रगति की समीक्षा की, जहां हरियाणा भर की स्वास्थ्य सुविधाओं के जीआईएस मैपिंग डेटा को प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने बताया कि इस मैपिंग प्रक्रिया से डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से किसी भी स्वास्थ्य सुविधा की भौगोलिक स्थिति, बुनियादी संस्थागत जानकारी और तस्वीरें प्राप्त करना संभव हो जाएगा, जिससे राज्य के स्वास्थ्य नेटवर्क से जुड़ी जरूरी जानकारियां एक ही जगह पर मिल सकेंगी।
उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग के डेटा को एक ही मंच पर समेकित करने और जहाँ भी संभव हो, जानकारी जनता तक उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता और सुगमता में सुधार करना है, साथ ही सरकारी विभागों को स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बारे में अधिक सूचित और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों के लिए, एक सार्वजनिक रूप से सुलभ प्रणाली सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का पता लगाने और अपने क्षेत्रों में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बुनियादी जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बना सकती है। वहीं प्रशासकों के लिए, इसी प्लेटफॉर्म से स्वास्थ्य नेटवर्क का एक व्यापक भौगोलिक विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी जहां बुनियादी ढांचे में सुधार, अतिरिक्त निवेश या कड़ी निगरानी की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यह पहल ऐसे राज्य के लिए विशेष महत्व रखती है जहां स्वास्थ्य संस्थान शहरी केंद्रों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में फैले हुए हैं, और समन्वित बुनियादी ढांचे की योजना के लिए विश्वसनीय तथा स्थान-विशेष (लोकेशन-स्पेसिफिक) जानकारी की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर, सरकार का लक्ष्य विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले विभागों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना है। बैठक का एक प्रमुख केंद्र बिंदु हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (HARSAC) जो कि रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक अनुप्रयोगों के लिए राज्य की नोडल एजेंसी है—की भूमिका था।
एचएआरएसएसी के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग को आश्वासन दिया कि एजेंसी जीआईएस डेटाबेस के प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगी और हरियाणा सरकार के अन्य विभागों के साथ प्रासंगिक जानकारी साझा करने में सुविधा प्रदान करेगी। मैपिंग किए गए डेटा के इस अंतर-विभागीय आदान-प्रदान का उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास, मौजूदा सुविधाओं के सुधार और प्रशासनिक निगरानी के संबंध में साक्ष्य-आधारित निर्णयों का समर्थन करना है।
यह प्रणाली अधिकारियों को स्वास्थ्य संस्थानों के भौगोलिक वितरण का आकलन करने और कम सेवा वाले क्षेत्रों में सुधार की योजना बनाते समय उपलब्ध जानकारी का उपयोग करने में मदद कर सकती है। इससे विभागों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति और बुनियादी ढांचे के प्रोफाइल का मूल्यांकन करने के लिए अलग-अलग डेटाबेस पर निर्भर रहने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
स्वास्थ्य, आयुष और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभागों की इस भागीदारी से विभिन्न प्रशासनिक प्रा,धिकारों के तहत काम करने वाले संस्थानों को शामिल करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण मिलने की उम्मीद है।
क्रमांक-2026
*राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र में देशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि के लिए की विधिवत पूजा-अर्चना*
*राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया स्वागत*
चंडीगढ़, 1 नवंबर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शक्तिपीठ मां भद्रकाली के दरबार में आकर उन्हें असीम शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई है। यह स्थान हमारी सनातन संस्कृति और आस्था का महान केंद्र है।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र में देशवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कुरुक्षेत्र पहुंचने पर हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शक्तिपीठ के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने मंदिर परिसर में पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
राष्ट्रपति ने सबसे पहले मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन देवी कूप पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। उन्होंने परंपरा के अनुसार पूजा की और मंदिर की परिक्रमा भी की। इसके उपरांत राष्ट्रपति गर्भगृह में पहुंचीं, जहां उन्होंने मां भद्रकाली की विधिवत पूजा, आरती और मंत्रोच्चारण के साथ प्रार्थना की। उन्होंने माता को पंचामृत, पंचमेवा, नारियल और चुनरी का प्रसाद अर्पित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के द्वारा वैदिक मंत्रों के बीच मंदिर के पुजारियों ने देश की मंगलकामना के लिए विशेष पूजा संपन्न कराई। पूजा के दौरान पूरा मंदिर परिसर जय माता दी के जयघोष से गूंज उठा।
पूजा-अर्चना के उपरांत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने शक्ति का प्रतीक त्रिशूल, माता की प्रतिमा और चुनरी भेंट स्वरूप प्रदान की। उन्होंने माता का आशीर्वाद और प्रसाद भी राष्ट्रपति को दिया और शक्तिपीठ की महिमा और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती के दाएं घुटने का निपात हुआ था। यहां माता आशीर्वाद रूप में विराजमान हैं और इस स्थान के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महाभारत काल में पांडवों ने युद्ध से पूर्व यहां विजय की कामना के लिए पूजा की थी।