भारत के भू-वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा जारी नए ‘भूकंप जोखिम मानचित्र’ ने उत्तरी भारत के लिए गंभीर चेतावनी दी है। ताज़ा आकलन के अनुसार दिल्ली-NCR, देहरादून-ऋषिकेश, हिमाचल, उत्तराखंड और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में भूकंपीय खतरा पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय प्लेट की तेज़ टकराहट, फॉल्ट लाइनों की सक्रियता और हिमालय की भू-संरचना इस क्षेत्र को बड़े भूकंप के लिए बेहद संवेदनशील बना रही है।
नए मानचित्र में स्पष्ट दिखाया गया है कि पूरा हिमालयी आर्क—जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक—उच्चतम भूकंपीय जोन में शामिल है। उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, अल्मोड़ा और पौड़ी जैसे शहर उच्च जोखिम श्रेणी में पहुँच चुके हैं। वहीं दिल्ली-NCR भी अब उन क्षेत्रों में आ गया है जहाँ 7.0 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप संभावित माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में NCR के अंदर और आसपास दर्ज बढ़ती भूकंपीय हलचल ने इस आशंका को और मजबूती दी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय दुनिया की सबसे युवा पर्वतमालाओं में से एक है और लगातार भूकंपीय तनाव झेल रहा है। टेक्टोनिक प्लेटों की गति न केवल फ्रैक्चर जोन को सक्रिय कर रही है, बल्कि ऊर्जा का संचय भी बढ़ा रही है, जो किसी भी समय गंभीर भूकंप का कारण बन सकती है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र में ‘साइलेंट ज़ोन’ मौजूद हैं—जहाँ लंबे समय से बड़ा भूकंप नहीं आया, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है। यह स्थिति भविष्य में विनाशकारी झटकों की संभावना को बढ़ाती है।
दिल्ली-NCR जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों के लिए यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ बड़े पैमाने पर अनियोजित निर्माण हुए हैं और कई इमारतें भूकंप-रोधी मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। विशेषज्ञों ने सरकारों को भवन कोड्स के कड़ाई से पालन, पुराने निर्माणों की जाँच, और आपदा प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से मजबूत करने की सलाह दी है।
नए मानचित्र के आने के बाद उत्तराखंड और हिमाचल में भी प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की समीक्षा शुरू की है। पर्यटन और धार्मिक यात्रा मार्गों की सुरक्षा, पहाड़ी शहरों की संरचनात्मक क्षमता, और बचाव प्रणाली की तैयारी पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक चेतावनियों को समय पर समझना, आपदा प्रबंधन को मजबूत करना और जनजागरूकता बढ़ाना ही आने वाले जोखिमों को कम कर सकता है। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता भूकंपीय तनाव साफ संकेत दे रहा है कि सावधानी और तैयारी ही एकमात्र विकल्प हैं।