वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस 2026 के मंच पर भारत की आर्थिक संभावनाओं पर वैश्विक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने गहन चर्चा की, जिसमें यह सवाल उभरा कि क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। विशेषज्ञों ने भारत की वर्तमान आर्थिक प्रगति, सुधारों और वैश्विक निवेश के रुझानों के आधार पर इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए।
विशेष सत्र में प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत की बुनियादी आर्थिक स्थिति आज मजबूत है, जिसमें स्थिर वृद्धि दर और कम मुद्रास्फीति शामिल हैं। उन्होंने हालांकि यह भी साफ़ किया कि अभी भारत के लिए असली चुनौती प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना, बेहतर श्रम कौशल विकसित करना और प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटना है। गोपीनाथ के अनुसार यदि ये बाधाएँ दूर हों, तो भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।
इसी मंच पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी आशावादी लहजे में कहा कि भारत आने वाले कुछ वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनना तय है। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले दशक में भौतिक, डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश किया है, जिससे वृद्धि की संभावनाएँ और मजबूत हुई हैं। मंत्री के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था आगामी वर्ष 6–8% की दर से बढ़ सकती है और निर्यात क्षेत्रों में विस्तार से देश को आर्थिक दौड़ में अग्रणी बनाएगी।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड (युवा जनसंख्या) और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि देश की आर्थिक क्षमता को और बढ़ा रही है। बड़ी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का मानना है कि भारत में बाजार का आकार, युवा श्रम बल तथा तकनीकी उन्नति इसे वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर ऊँचा दर्जा दिला सकती है।
हालाँकि, सरकार और उद्योग जगत ने यह भी स्वीकार किया कि भारत को कुछ ढांचागत सुधारों पर और काम करना होगा — जैसे भूमि अधिग्रहण में सरलता, श्रम कौशल में सुधार, उत्पादन क्षमता का विस्तार, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी और मजबूत हो सके।
दावोस पैनल ने यह स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि भारत के सामने अवसर वास्तविक और व्यापक हैं, लेकिन उसे कड़े फैसलों, तेज क्रियान्वयन और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। यदि ये तत्व समय रहते पूरी तरह लागू हो जाएँ, तो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ-साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य भी हासिल हो सकता है।