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सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ मानव तस्करी के अपराध सहित सभी अपराधों को रोकने एवं उनसे निपटने को सर्वाधिक महत्व दे रही है

February 07, 2026 10:00 AM

मानव तस्करी से लड़ने, तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा एवं पुनर्वास हेतु कई विधायी और योजनाबद्ध उपाय किए गए हैं

 

पुलिस” और “लोक व्यवस्था” भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं। विधि एवं व्यवस्था बनाए रखने, मानव तस्करी और तस्करी के पीड़ितों के यौन शोषण से जुड़े अपराधों की जांच एवं अभियोजन सहित नागरिकों की जान एवं माल की सुरक्षाकी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है और वे इससे निपटने में सक्षम हैं।

भारत सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ मानव तस्करी के अपराध सहित सभी अपराधों, को रोकने और उनसे निपटने को सर्वाधिक महत्व देती है और तस्करी की बुराई को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केन्द्र सरकार ने तस्करी से लड़ने, तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास के लिए कई विधायी और योजनाबद्ध कदम उठाए हैं।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 143 और 144 मानव तस्करी के खिलाफ भारत के कानूनी ढांचे के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ये धाराएं भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 370 और 370ए के तहत पहले से शामिल अपराधों की जगह लेती हैं और उनका विस्तार करती हैं। बीएनएस की धारा 143 तस्करी को जबरदस्ती के विभिन्न तरीकों का उपयोग करके किसी व्यक्ति को शोषण के लिए भर्ती करने, ले जाने, पनाह देने, हस्तांतरित या प्राप्त करने  के रूप में परिभाषित करती है। यह धारा तस्करी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करती है, जिसमें कई व्यक्तियों या बच्चों की तस्करी के लिए अधिक बड़ी सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, बीएनएस, 2023 की धारा 144 तस्करी किए गए व्यक्तियों के शोषण से संबंधित है, जिसमें यौन शोषण भी शामिल है। यह धारा तस्करी किए गए बच्चों और वयस्कों के शोषण के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान करती है, जिसमें कैद और जुर्माने की अलग-अलग शर्तें हैं। बीएनएस में धारा 111 के तहत संगठित अपराध का एक नया अपराध जोड़ा गया है, जिसमें व्यक्तियों की तस्करी और वेश्यावृत्ति के लिए मानव तस्करी का अपराध भी शामिल है। बीएनएस की धारा 95 जो किसी बच्चे को अपराध करने के लिए काम पर रखने, नौकरी देने या शामिल करने से संबंधित है, बीएनएस की धारा 99 जो वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदने से संबंधित है, वे भी मानव तस्करी के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। इसके अलावा, महिलाओं के खिलाफ कुछ गंभीर अपराधों जैसे वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदना (धारा 99), संगठित अपराध (धारा 111), भीख मंगवाने के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण या उसे अपंग बनाना (धारा 139) के संबंध में, अनिवार्य न्यूनतम सजाएं निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 भी तस्करी को एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध मानती है। बीएनएसएस की धारा 396, पीड़ित मुआवजा योजना के लिए एक ढांचा बनाती है, जिसके तहत हर राज्य सरकार को अपराध के शिकार पीड़ित या उसके आश्रितों को मुआवजा देने हेतु फंड देने की योजना बनाना अनिवार्य है, जिन्हें अपराध के कारण नुकसान या चोट लगी है और जिन्हें पुनर्वास की ज़रूरत है। अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 को वेश्यावृत्ति और व्यावसायिक यौन शोषण और संबंधित अपराधों के लिए व्यक्तियों की तस्करी को रोकने के लिए बनाया गया है।

केन्द्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालययों/विभागों द्वारा देश भर में महिलाओं, जिसमें महिला सेक्स वर्कर भी शामिल हैं, के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण हेतु कई योजनाएं/पहलें लागू की गई हैं बशर्ते वे इन योजनाओं/पहल के तहत बताई गई पात्रता शर्तों को पूरा करती हों। इस संबंध में कुछ प्रमुख योजनाएं/कार्यक्रम इस प्रकार हैं:-

  1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान, वित्तीय वर्ष 2022-23 से महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण हेतु केन्द्र-प्रायोजित मिशन शक्ति अम्ब्रेला योजना लागू कर रहा है। मिशन शक्ति के तहत, शक्ति सदन नाम का एक घटक है जो बेसहारा महिलाओं और कठिन परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं को आश्रय, भोजन, व्यावसायिक प्रशिक्षण सहित आवश्यक सहायता प्रदान करता है।
  2. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना भी लागू करता है। यह एक सार्वभौमिक योजना है, जिसके तहत छह वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण एवं शुरुआती बचपन की देखभाल और शिक्षा के लिए मुफ्त सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
  3. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के तहत, पहले बच्चे के लिए 5000/- रुपये और दूसरे बच्चे के लिए, अगर वह लड़की है, तो 6000/- रुपये का नकद लाभ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण मोड में दिया जाता है।
  1. बीमा कवरेज और पेंशन के जरिए सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) लागू की गई है।
  2. महिलाओं, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं के कठिन परिश्रम को कम करने और उनके जीवनयापन को आसान बनाने हेतु, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11.6 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं, उज्ज्वला योजना के जरिए 10.3 करोड़ घरों को खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन दिया गया है और जल जीवन मिशन के जरिए लगभग 15 करोड़ घरों को सुरक्षित और पीने योग्य नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है।
  3. प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (पीएमएवाई-यू) का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में सभी बेघर परिवारों और कच्चे एवं जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से लैस पक्का घर देकर ‘सभी के लिए आवास’ प्रदान करना है और शहरी इलाकों में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों सहित आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की आवास संबंधी जरूरतों को पूरा करना है।
  4. आयुष्मान भारत के तहत, सरकार 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को 1200 से अधिक चिकित्सा पैकेज के जरिए मुफ्त इलाज प्रदान कर रही है। इनमें से 141 से अधिक चिकित्सा पैकेज खास तौर पर महिलाओं की चिकित्सीय जरूरतों को पूरा करने हेतु डिजाइन किए गए हैं। इस योजना के तहत सात तरह की जांच (टीबी, हाइपरटेंशन, डायबिटीज़, मुंह का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और मोतियाबिंद) की सुविधा दी जाती है, जिससे महिला सेक्स वर्कर्स सहित करोड़ों महिलाओं को लाभ हुआ है। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में 150,000 से अधिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र (एबी-एचडब्ल्यूसी) हैं, जिन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी कहा जाता है और जो स्वास्थ्य सेवा को समुदाय के करीब लाते हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएमजेएवाई) दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसमें गरीब और वंचित महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  5. देश भर में 16,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र  (पीएमबीजेके) काम कर रहे हैं। किफायती दवाएं और चिकित्सा उपकरण देने के अलावा, पीएमबीजेके महिलाओं के लिए लगभग 40 खास चीजें सहित ‘सुविधा सैनिटरी नैपकिन’ नाम के सैनिटरी नैपकिन को भी बहुत ही किफायती कीमत पर, 1 रुपये प्रति पैड की दर से बेचने की सुविधा देते हैं।
  6. केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) वाले परिवारों और प्राथमिकता वाले परिवारों (पीएचएच) के लाभार्थियों को उनके हक के अनुसार लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को अनाज दिया था। सरकार ने 2024 से अगले पांच वर्षों तक मुफ्त अनाज देना जारी रखने का फैसला किया है।
  7. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत महिलाओं को कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण दी जाती है।
  8. प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएम-जेडीवाई), जो दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन संबंधी पहलों में से एक है, के तहत महिलाएं सबसे बड़ी लाभार्थी हैं और इसके तहत विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, ऋण और बीमा सेवाओं के तहत सीधे लाभ भी मिलते हैं।
  9. मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) जैसी योजनाएं रोजगार/स्वरोजगार और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन योजनाओं के तहत अधिकतर लाभार्थी महिलाएं हैं।

यह जानकारी केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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