मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा और उनके प्रभावी पुनर्वास के लिए सरकार ने अनेक विधायी एवं योजनाबद्ध गतिविधियां संचालित की हैं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों सहित विभिन्न आपराधिक गतिविधियों से संबंधित आंकड़ों का संकलन एवं प्रकाशन करता है। ये आंकड़े उसके वार्षिक प्रकाशन “क्राइम इन इंडिया” में प्रकाशित किए जाते हैं, जो एनसीआरबी की आधिकारिक वेबसाइट https://ncrb.gov.in पर उपलब्ध है। फिलहाल यह रिपोर्ट वर्ष 2023 तक उपलब्ध है। एनसीआरबी के अनुसार, वर्ष 2019, 2020, 2021, 2022 तथा 2023 के दौरान ‘अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956’ के तहत दर्ज मामलों की संख्या क्रमशः 1639, 1294, 1678, 1497 और 2166 रही है।
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार “पुलिस” और “प्रशासनिक व्यवस्था” राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना, नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा मानव तस्करी, तस्करी के पीड़ितों के व्यावसायिक यौन शोषण या वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बहकाने अथवा उकसाने से संबंधित अपराधों की जांच और अभियोजन का दायित्व संबंधित राज्य सरकारों पर निहित है। इन अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य सरकारें सक्षम और उत्तरदायी हैं।
भारत सरकार मानव तस्करी सहित महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम एवं उनसे प्रभावी ढंग से निपटने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और तस्करी के खतरे को समाप्त करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस दिशा में केंद्र सरकार ने तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके समुचित पुनर्वास के लिए अनेक विधायी एवं योजनागत उपाय लागू किए हैं।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 143 और 144 मानव तस्करी के खिलाफ भारत के कानूनी ढांचे के महत्वपूर्ण घटक हैं। ये धाराएं भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 370 व 370ए के अंतर्गत पहले से शामिल अपराधों का स्थान लेती हैं और उनका दायरा बढ़ाती हैं। बीएनएस की धारा 143 तस्करी को विभिन्न बल प्रयोग के साधनों का उपयोग करके शोषण के लिए किसी व्यक्ति की भर्ती, परिवहन, आश्रय, स्थानांतरण या प्राप्ति के रूप में परिभाषित करती है। इस धारा में मानव तस्करी के विरुद्ध कड़ी सजाओं का प्रावधान है, जिसमें एक से अधिक व्यक्तियों या बच्चों की तस्करी के लिए अधिक दंड का प्रावधान है। इसके अलावा, बीएनएस, 2023 की धारा 144 तस्करी पीड़ितों के शोषण से संबंधित है, जिसमें यौन शोषण भी शामिल है। इस धारा में तस्करी पीड़ितों के शोषण के लिए अलग-अलग सजाओं का प्रावधान है, जिनमें कारावास और जुर्माने की अवधि भी अलग-अलग है। बीएनएस की धारा 111 के तहत संगठित अपराध का एक नया अपराध जोड़ा गया है, जिसमें व्यक्तियों की तस्करी और वेश्यावृत्ति के लिए मानव तस्करी भी शामिल है। मानव तस्करी के संदर्भ में, विवाह, रोजगार, पदोन्नति के झूठे वादे पर या पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाने से संबंधित बीएनएस की धारा 69, किसी अपराध को अंजाम देने हेतु बच्चे को काम पर रखने, नियोजित करने या संलग्न करने से संबंधित बीएनएस की धारा 95 और वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदने से संबंधित बीएनएस की धारा 99 भी प्रासंगिक हैं। इसके अलावा, महिलाओं के खिलाफ कुछ गंभीर अपराधों जैसे वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदना (धारा 99), संगठित अपराध (धारा 111), भीख मांगने के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण या उसे अपंग करना (धारा 139) के लिए अनिवार्य न्यूनतम दंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 भी मानव तस्करी को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध के रूप में मान्यता देती है। बीएनएसएस की धारा 396 पीड़ित मुआवजा योजना हेतु एक ढांचा स्थापित करती है, जिसके तहत प्रत्येक राज्य सरकार को अपराध के परिणामस्वरूप हानि या चोट झेलने वाले और पुनर्वास की आवश्यकता वाले पीड़ित या उसके आश्रितों को मुआवजा देने के लिए धन उपलब्ध कराने की योजना तैयार करना अनिवार्य है। अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 वेश्यावृत्ति और व्यावसायिक यौन शोषण के लिए मानव तस्करी व संबंधित अपराधों को रोकने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया है।
भारत सरकार ने मानव तस्करी के सीमा पार/अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से निपटने के लिए बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कंबोडिया तथा म्यांमार सहित कई देशों के साथ द्विपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और मानव तस्करी का मुकाबला करने के उद्देश्य से कुछ बहुपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
मानव तस्करी के अपराध की रोकथाम एवं उससे प्रभावी ढंग से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की है। तथापि, भारत सरकार समय-समय पर विभिन्न परामर्शों/सलाह के माध्यम से राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक दिशानिर्देश प्रदान कर उनके प्रयासों को सुदृढ़ बनाने में सहयोग करती है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित की गई कुछ प्रमुख गतिविधियां निम्नलिखित हैं:
(i) सरकार ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) की स्थापना एवं उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी जिलों को आच्छादित किया जा सके। वर्तमान में कुल 827 एएचटीयू कार्यरत हैं, जिनमें से 807 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में, 15 सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में और 5 सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त, एसएसबी ने मानव तस्करी से संबंधित मामलों के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर 1903 भी प्रारंभ किया है।
(ii) गृह मंत्रालय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ‘राज्य स्तरीय सम्मेलनों’ एवं ‘न्यायिक संगोष्ठियों’ के आयोजन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस एवं विधि अधिकारियों को मानव तस्करी से संबंधित नवीनतम कार्यक्रमों व गतिविधियों से अवगत कराना तथा इस मुद्दे को केंद्रित, समन्वित और प्रभावी तरीके से हल करने के लिए उनकी क्षमता को सुदृढ़ करना है।
(iii) गृह मंत्रालय (एमएचए) ने 12 मार्च, 2020 को राष्ट्रीय स्तर पर एक संचार मंच — क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (क्रि-मैक) प्रारंभ किया था। इसका उद्देश्य विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अपराध एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं का चौबीसों घंटे सातों दिन ऑनलाइन आदान-प्रदान सुनिश्चित करना और सूचना के निर्बाध प्रवाह को सुदृढ़ करना है। यह मंच मानव तस्करी सहित जघन्य अपराधों से संबंधित सूचनाओं का देशभर में वास्तविक समय पर प्रसार करने में सहायक है तथा अंतर-राज्यीय समन्वय को सशक्त बनाता है।
(iv) सरकार ने अंतरराज्यीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी के मामलों की जांच करने का दायित्व राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा है।
(v) निर्भया कोष के तहत वित्तीय सहायता से स्थापित महिला सहायता केंद्र (डब्ल्यूएचडी) पुलिस स्टेशनों को महिलाओं के लिए अधिक अनुकूल और सुलभ बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
(vi) यौन अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग सिस्टम (आईटीएसएसओ) एक ऑनलाइन विश्लेषणात्मक उपकरण है, जिसे आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता—बीएनएसएस में समाहित) के प्रावधानों के अनुरूप यौन अपराधों में पुलिस जांच की निगरानी एवं ट्रैकिंग हेतु प्रारंभ किया गया है। यह प्रणाली संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मामलों की जांच की प्रगति की नियमित समीक्षा करने में सक्षम बनाती है। इसके परिणामस्वरूप अनुपालन दर वर्ष 2018 में 44.4% से बढ़कर वर्ष 2023 में 61.5% तक पहुंच गई है।
(vii) यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीएसओ) एक ऐसा डेटाबेस है, जो विशेष रूप से पुलिस के उपयोग के लिए उपलब्ध है। इसे 20.09.2018 को यौन अपराधियों की पहचान, जांच एवं ट्रैकिंग को सुगम बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। यह प्रणाली जांच अधिकारियों को आदतन यौन अपराधियों की निगरानी करने के साथ-साथ यौन अपराधों की रोकथाम हेतु आवश्यक निवारक उपाय प्रारंभ करने में सक्षम बनाती है।
(viii) मानव तस्करी अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीएचटीओ) कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तस्करों के पोर्टफोलियो की खोज करने में सुविधा प्रदान करता है, जिसमें अपराध इतिहास, व्यक्तिगत विवरण, आवागमन, अदालती कार्यवाही, अपील, आगंतुक आदि शामिल होते हैं। तस्करों के डेटा की खोज ऐसे अपराधों की रोकथाम/पता लगाने और जांच के लिए विवरण प्रदान करती है।
(ix) इसके अतिरिक्त, मानव तस्करी पीड़ितों के संरक्षण व पुनर्वास के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत ‘शक्ति सदन’ नामक एकीकृत राहत और पुनर्वास गृह स्थापित किए हैं। शक्ति सदन निराश्रित, संकटग्रस्त एवं हाशिए पर रहने वाली महिलाओं तथा मानव तस्करी आदि की शिकार महिलाओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं और उन्हें आवश्यक सहायता, देखभाल, परामर्श, सहयोग व दैनिक जरूरतों से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसी प्रकार, मिशन वात्सल्य के अंतर्गत संचालित बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) तस्करी से प्रभावित बच्चों की राहत, देखभाल एवं पुनर्वास संबंधी आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखते हैं।
भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम, जिनमें विधायी संशोधन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और पीड़ित-केंद्रित कार्यक्रम शामिल हैं, मानव तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु एक व्यापक एवं समग्र दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं। सरकार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतर-एजेंसी समन्वय को सुदृढ़ करने तथा तस्करी की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), नए आपराधिक कानूनों तथा अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (आईटीपीए) के साथ-साथ गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मानव तस्करी से संबंधित अपराधों की रोकथाम, जांच व अभियोजन हेतु एक सुदृढ़ एवं समन्वित ढांचा स्थापित किया गया है।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी है।
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