देश के अधिकांश हिस्सों में अगले दो दिनों तक मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है, लेकिन इसी बीच हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बादल छाने के साथ बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। इसका असर मैदानी इलाकों में भले सीमित रहे, लेकिन पहाड़ी राज्यों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों—दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान—में फिलहाल बारिश की कोई ठोस संभावना नहीं है। दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखी जा सकती है, जबकि रातें अभी भी ठंडी बनी रहेंगी। सुबह और देर रात हल्का कोहरा कुछ स्थानों पर परेशान कर सकता है, जिससे दृश्यता कम होने की आशंका है।
हिमालयी इलाकों में मौसम के अचानक करवट लेने से यातायात व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। बर्फबारी और खराब मौसम के चलते कई पर्वतीय मार्ग अस्थायी रूप से बंद किए जा सकते हैं। इसका सीधा प्रभाव हवाई और रेल सेवाओं पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषकर उत्तर भारत को जोड़ने वाली उड़ानों में देरी या रद्द होने की स्थिति बन सकती है। रेल यातायात में भी ट्रेनों की रफ्तार कम होने और समय-सारिणी प्रभावित होने की आशंका है।
पर्यटन स्थलों पर जाने वाले यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम अपडेट पर नजर रखने को कहा है। बर्फीले रास्तों और फिसलन के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
कृषि के लिहाज से देखें तो शुष्क मौसम फसलों के लिए फिलहाल अनुकूल माना जा रहा है, हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक बर्फबारी से बागवानी को नुकसान पहुंच सकता है। सेब और अन्य फल उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के असर के कमजोर पड़ते ही एक बार फिर मौसम शुष्क हो जाएगा, लेकिन तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति भी सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों को ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।