रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। रूस ने यूक्रेन पर इस वर्ष का अब तक का सबसे बड़ा और घातक हमला करते हुए एक साथ करीब 400 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागीं। इस भीषण हमले ने यूक्रेन के कई प्रमुख शहरों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे व्यापक तबाही हुई और बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे हाल के महीनों में सबसे संगठित और तीव्र हमला बताया है।
यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई प्रोजेक्टाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। राजधानी कीव सहित खारकीव, ओडेसा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। ऊर्जा अवसंरचना, सैन्य ठिकानों और संचार नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
यूक्रेनी प्रशासन के अनुसार, हमले में रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। अपार्टमेंट इमारतों, अस्पतालों और सार्वजनिक सुविधाओं पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपात सेवाएं मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी रहीं, जबकि कई शहरों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए। घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सा संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।
रूस की ओर से इस हमले को “सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित कार्रवाई” बताया गया है। मॉस्को का दावा है कि यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं और रसद आपूर्ति को कमजोर करना इस अभियान का उद्देश्य था। हालांकि, हमले की व्यापकता और नागरिक क्षेत्रों पर पड़े असर ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ड्रोन और मिसाइलों का इतना बड़ा संयोजन यह संकेत देता है कि रूस लंबी अवधि के दबाव की रणनीति अपना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यूरोपीय देशों और अमेरिका ने हमले की निंदा करते हुए यूक्रेन के प्रति समर्थन दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक बुलाने की मांग भी तेज हो गई है। कई देशों ने मानवीय सहायता बढ़ाने और यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला युद्ध के बढ़ते तकनीकीकरण को भी दर्शाता है, जहां ड्रोन युद्ध एक अहम भूमिका निभा रहा है। कम लागत और बड़े पैमाने पर तैनाती की क्षमता के कारण ड्रोन अब युद्ध की रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बन चुके हैं। साथ ही, मिसाइल हमलों के साथ इनका संयोजन रक्षा प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
कुल मिलाकर, इस ताजा हमले ने यह साफ कर दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के शांत होने के संकेत फिलहाल दूर हैं। बढ़ती हिंसा न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसके गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं।