उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को बड़ा संदेश गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों और शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। 21 फरवरी 2026 को किए गए इस ऐलान में शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी और शिक्षकों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू करने की बात कही गई।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि अब प्रदेश के शिक्षामित्रों को प्रतिमाह 18 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस निर्णय से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत संविदा कर्मियों का मनोबल भी मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि सरकारी शिक्षकों को अब पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत शिक्षक मान्यता प्राप्त अस्पतालों में बिना अग्रिम भुगतान के उपचार करा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षकों को गंभीर बीमारियों या आपात स्थितियों में आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
राज्य सरकार का तर्क है कि शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए शिक्षकों और शिक्षामित्रों का आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कवच आवश्यक है। हाल के वर्षों में शिक्षा सुधार, डिजिटल कक्षाओं और बुनियादी ढांचे पर जोर देने के साथ-साथ मानव संसाधन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में यह कदम उठाया गया है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, जबकि स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधा से शिक्षकों को सुरक्षा का अहसास मिलेगा। हालांकि कुछ संगठनों का कहना है कि स्थायी नियुक्ति और सेवा शर्तों में सुधार जैसे मुद्दे अभी भी लंबित हैं।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस घोषणा को अहम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में शिक्षा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में स्थिरता और गुणवत्ता दोनों को बल मिल सकता है।
कुल मिलाकर, 21 फरवरी 2026 की यह घोषणा शिक्षामित्रों और शिक्षकों के लिए राहत और उम्मीद का संदेश लेकर आई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन फैसलों को जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाता है।