भारत में आयोजित एआई समिट को वैश्विक प्रौद्योगिकी कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। 21 फरवरी 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार सम्मेलन के दौरान लगभग 250 अरब डॉलर के संभावित निवेश का रास्ता खुला है, जबकि 70 से अधिक देशों ने साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने की सहमति जताई है। इस घटनाक्रम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।
सम्मेलन के दौरान नीति, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि यह निवेश डिजिटल बुनियादी ढांचे, डेटा सेंटर, एआई अनुसंधान और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को गति देगा। इससे न केवल तकनीकी विकास बल्कि रोजगार सृजन और नवाचार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल भारत को एआई विकास के प्रमुख वैश्विक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में अहम कदम हो सकती है।
इस मंच पर विभिन्न देशों और कंपनियों ने जिम्मेदार और सुरक्षित एआई उपयोग को लेकर साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। प्रस्तावित घोषणापत्र में पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा, नैतिक मानकों और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया गया है। तकनीकी कूटनीति के लिहाज से यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई विकासशील देशों ने भी इसमें भागीदारी दिखाते हुए साझा ढांचे के समर्थन का संकेत दिया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीति निर्माताओं ने इस बात पर बल दिया कि एआई केवल आर्थिक वृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और शासन व्यवस्था में सुधार का उपकरण भी बन सकता है। इस संदर्भ में भारत ने समावेशी और मानव-केंद्रित तकनीकी विकास की दिशा में नेतृत्व की इच्छा जताई। विश्लेषकों का मानना है कि इस पहल से भारत की छवि एक जिम्मेदार तकनीकी भागीदार के रूप में मजबूत होगी।
इस समिट को व्यापक रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह डिजिटल सहयोग के नए आयाम खोल सकता है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने से वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में संतुलन और साझा मानकों की दिशा में प्रगति संभव है। यह पहल विशेष रूप से ऐसे समय में सामने आई है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर नियमन और नैतिकता की बहस तेज हो रही है।
कुल मिलाकर, निवेश प्रतिबद्धताओं और बहुपक्षीय सहमति के संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भारत एआई क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नीति और नवाचार का प्रमुख भागीदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भविष्य में इन समझौतों के क्रियान्वयन और निवेश के वास्तविक प्रवाह पर निगाहें टिकी रहेंगी, जो इस पहल की वास्तविक सफलता तय करेंगे।