फरवरी के अंतिम सप्ताह में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो गया है, जिसके असर से देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग ने दक्षिण और पूर्वी भारत के साथ-साथ मध्य क्षेत्र के कुछ राज्यों के लिए भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्री क्षेत्र में विकसित यह प्रणाली धीरे-धीरे मजबूत हो रही है और इसके प्रभाव से बादल बनने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके चलते तमिलनाडु, केरल और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। तटीय जिलों में तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका को देखते हुए मछुआरों को फिलहाल समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी इस प्रणाली का असर दिखाई देने लगा है। बादलों की आवाजाही और तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक यह बदलाव जारी रह सकता है और कई राज्यों में गरज-चमक के साथ वर्षा दर्ज होने की संभावना है।
मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर तैयारियां बढ़ा दी हैं। जलभराव वाले इलाकों की निगरानी, आपदा प्रबंधन टीमों की तैनाती और नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
कृषि क्षेत्र पर भी इस मौसम प्रणाली का असर पड़ सकता है। जहां एक ओर वर्षा कुछ फसलों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, वहीं अधिक बारिश या तेज हवाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञ किसानों को मौसम अपडेट पर नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय यह निम्न दबाव क्षेत्र आने वाले दिनों में मौसम की दिशा तय करेगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें ताकि किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सके।