पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए भारत सरकार ने बड़े स्तर पर राहत अभियान तेज कर दिया है। सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘मिशन स्वदेश’ तेजी से आगे बढ़ रहा है और पिछले सात दिनों के भीतर करीब 52,000 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस भारत लाया जा चुका है। यह अभियान उन भारतीयों की मदद के लिए शुरू किया गया है जो क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम के कारण वहां फंस गए थे।
पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं। क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कारण बड़ी संख्या में भारतीय कामगार, छात्र और पेशेवर नागरिक सुरक्षित स्थानों पर लौटना चाहते थे। इसे देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विशेष उड़ानों और समन्वित राहत व्यवस्था की शुरुआत की। इस अभियान के तहत कई देशों से भारतीयों को चरणबद्ध तरीके से निकाला जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, मिशन स्वदेश के तहत भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर व्यापक समन्वय किया गया है। संकटग्रस्त क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद विशेष विमानों और अन्य परिवहन माध्यमों के जरिए उन्हें भारत लाया जा रहा है।
राहत अभियान के दौरान प्राथमिकता उन लोगों को दी जा रही है जो अधिक जोखिम वाले इलाकों में रह रहे हैं। इनमें मजदूर, छात्र, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। कई भारतीय ऐसे भी थे जिनके पास सीमित संसाधन थे और वे अपने दम पर देश लौटने में सक्षम नहीं थे। सरकार ने ऐसे नागरिकों की सहायता के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की हैं।
मिशन स्वदेश के संचालन में विभिन्न सरकारी एजेंसियां और एयरलाइंस मिलकर काम कर रही हैं। एयरपोर्ट पर भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि लौटने वाले यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। चिकित्सा जांच, आव्रजन प्रक्रिया और आगे की यात्रा के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित वापस लाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए विदेश मंत्रालय, दूतावासों और एयरलाइंस के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होता है। सरकार का कहना है कि जब तक जरूरत होगी, तब तक यह अभियान जारी रखा जाएगा।
पश्चिम एशिया में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। इसलिए भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन तथा भारतीय दूतावासों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संकट की स्थिति में हर भारतीय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर राहत अभियान को और तेज किया जा सकता है।