देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि गैस आपूर्ति को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और देश में रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
लोकसभा में सवालों के जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने अपनी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले से ही ऐसी व्यवस्थाएं की हैं जिससे किसी भी तरह की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो। इस वजह से उपभोक्ताओं को घबराने या गैस की कमी की आशंका से चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
मंत्री के अनुसार भारत दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों का असर कभी-कभी कीमतों और आपूर्ति पर दिखाई देता है। लेकिन इसके बावजूद सरकार ने दीर्घकालिक समझौतों और विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीति अपनाई है। इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि देश में एलपीजी वितरण नेटवर्क लगातार मजबूत किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि हर घर तक रसोई गैस की सुविधा पहुंचे और आपूर्ति की प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में भी गैस कनेक्शन और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
सदन में चर्चा के दौरान मंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी कारण सरकार आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान दे रही है। इससे भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति को और अधिक स्थिर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी प्रकार का दबाव बनता है तो भी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि देश में गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।
मंत्री के बयान के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि फिलहाल देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि लोगों को रसोई गैस की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।