प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी माहौल के अंतिम चरण में मतदाताओं को संबोधित करते हुए “भविष्य के शहर” की परिकल्पना को केंद्र में रखा और विकास, बुनियादी ढांचे तथा आधुनिक शहरी जीवन की जरूरतों पर जोर दिया। अपने अंतिम वोट अपील में उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत के शहरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करना समय की मांग है, ताकि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिल सकें।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्मार्ट सिटी, डिजिटल कनेक्टिविटी, हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि “सिटी ऑफ फ्यूचर” का मतलब सिर्फ ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास है जिसमें हर वर्ग को समान अवसर मिले। उन्होंने शहरी गरीबों के लिए आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा को मजबूत करने पर भी बल दिया।
इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह के हालिया ‘स्लम’ संबंधी बयान को लेकर उठे विवाद के बीच प्रधानमंत्री का रुख अपेक्षाकृत संतुलित नजर आया। उन्होंने सीधे तौर पर किसी बयान का उल्लेख किए बिना यह संकेत दिया कि सरकार का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों को खत्म करना नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि विकास का लक्ष्य किसी को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मतदाताओं से अपील की कि वे विकास, स्थिरता और मजबूत नेतृत्व के आधार पर मतदान करें। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सरकार ने शहरी विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें आधारभूत ढांचे का विस्तार, मेट्रो नेटवर्क का विकास और डिजिटल सेवाओं का प्रसार शामिल है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अंतिम चरण में प्रधानमंत्री का यह संदेश शहरी मतदाताओं को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। “भविष्य के शहर” का विजन खासतौर पर युवा और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को ध्यान में रखकर पेश किया गया है, जो बेहतर जीवनशैली और रोजगार के अवसरों की उम्मीद रखते हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की यह अपील विकास-केंद्रित एजेंडा और समावेशी शहरीकरण के संदेश के साथ चुनावी समापन की ओर बढ़ती नजर आती है।