नई कॉर्ड लाइन से मालगाड़ियों के रुकने के समय में लगभग 110 मिनट की कमी आएगी, जिससे टर्नअराउंड समय और रसद दक्षता को बढ़ावा मिलेगा
महाराष्ट्र में रेल क्षमता बढ़ाने और माल ढुलाई की आवाजाही में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने मध्य रेलवे के अंतर्गत 172 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ‘सोमताने-चिखली कॉर्ड लाइन (3.7 किमी)’ के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
यह नई कॉर्ड लाइन कर्जत मार्ग पर चिखली और रोहा मार्ग पर सोमताने के बीच एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क की कमी को पूरा करेगी। इससे ट्रेनों को भीड़भाड़ वाले पनवेल जंक्शन में प्रवेश किये बिना या इंजन बदले बिना कर्जत और रोहा कॉरिडोर के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी।
पनवेल जंक्शन पर भीड़भाड़ कम करना
पनवेल मुंबई क्षेत्र के सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शनों में से एक है, जो रोहा, जेएनपीटी, कर्जत और दिवा सहित चार प्रमुख दिशाओं के आने-जाने वाले यातायात को संभालता है। कर्जत और रोहा मार्गों के बीच सीधी कॉर्ड लाइन न होने के कारण वर्तमान में परिचालन संबंधी बाधाएं और भीड़भाड़ होती है, क्योंकि ट्रेनों को पनवेल जंक्शन से होकर गुजरना पड़ता है। स्वीकृत कॉर्ड लाइन से सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे ट्रेन संचालन को सुव्यवस्थित करने और नेटवर्क की दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी।
जेएनपीटी से जुडे माल परिवहन को बड़ा बढ़ावा
यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण/ट्रस्ट (जेएनपीए/जेएनपीटी) से जुड़े माल यातायात के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो भारत के लगभग 60 प्रतिशत कंटेनर यातायात को संभालता है।
वर्तमान में, कर्जत, जसई और रोहा कॉरिडोर के बीच चलने वाली मालगाड़ियों को पनवेल जंक्शन में प्रवेश करना पडता है और आगे बढने से पहले इंजन बदलना पडता है। सोमताने-चिखली कॉर्ड लाइन के चालू होने के बाद मालगाड़ियां पनवेल जंक्शन को बाईपास कर सकेंगी, जिससे परिचालन में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इस परियोजना से प्रत्येक मालगाड़ी के रूकने के समय में लगभग 110 मिनट की बचत होने की उम्मीद है, जिससे टर्नअराउंड समय और रसद दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
अतिरिक्त यातायात क्षमता और नेटवर्क दक्षता
परियोजना के पूरा होने के बाद इस नई कॉर्ड लाइन के माध्यम से प्रति वर्ष नौ मिलियन टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल यातायात का संचालन संभव होगा। यह परियोजना जेएनपीटी-कर्जत और जेएनपीटी-रोहा खंडों पर पहले से स्वीकृत पनवेल एलिवेटेड कॉर्ड लाइनों की पूरक है, जिससे पश्चिमी भारत को सेवा प्रदान करने वाले माल ढुलाई क्नेक्टिविटी नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कमी पूरी हो जाएगी।
इस स्वीकृति के साथ भारतीय रेलवे क्षमता विस्तार, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और कुशल माल परिवहन अवसंरचना के विकास पर अपना विशेष ध्यान जारी रखे हुए है, ताकि भारत की बढ़ती रसद और आर्थिक आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
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