अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया टैरिफ संबंधी रुख ने एक बार फिर अटलांटिक के दोनों ओर आर्थिक और कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने यूरोपीय देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 फीसदी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा/संकेत देकर वैश्विक व्यापार जगत को चौंका दिया है। इसके जवाब में यूरोपीय संघ (EU) ने चेतावनी दी है कि ऐसा कदम यूरोप ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।
ट्रंप का तर्क है कि यह टैरिफ अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि वर्षों से यूरोपीय देशों ने व्यापार में अमेरिका के साथ असंतुलन बनाए रखा है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ। “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ट्रंप पहले भी स्टील, एल्युमिनियम और अन्य उत्पादों पर सख्त शुल्क लगा चुके हैं, जिनका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा था। अब 10 फीसदी के व्यापक टैरिफ का संकेत व्यापार युद्ध की आशंकाओं को फिर से हवा दे रहा है।
दूसरी ओर, EU का रुख सख्त और चेतावनी भरा है। यूरोपीय आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के टैरिफ से निर्यात प्रभावित होगा, उद्योगों की लागत बढ़ेगी और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। EU ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ने एकतरफा कदम उठाया, तो जवाबी शुल्क और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। इससे दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोगी रिश्तों में खटास आने का खतरा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 10 फीसदी टैरिफ का असर ऑटोमोबाइल, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और लग्जरी गुड्स जैसे क्षेत्रों पर सबसे अधिक पड़ सकता है। यूरोप से अमेरिका को होने वाला निर्यात महंगा होने से मांग घट सकती है, जबकि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर कीमतों का बोझ बढ़ेगा। साथ ही, वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से बाजारों में अस्थिरता देखी जा सकती है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। अमेरिका और EU न केवल व्यापारिक साझेदार हैं, बल्कि सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी सहयोग करते रहे हैं। टैरिफ विवाद बढ़ने से नाटो सहयोग, यूक्रेन संकट जैसे विषयों पर तालमेल कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का टैरिफ दांव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। EU की चेतावनी इस बात का संकेत है कि यदि संवाद के बजाय टकराव का रास्ता चुना गया, तो इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष बातचीत और समझौते की ओर बढ़ते हैं या फिर वैश्विक व्यापार एक नए तनावपूर्ण दौर में प्रवेश करता है।