महाराष्ट्र की सियासत के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। 15 जनवरी 2026 को राज्य में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) समेत 29 नगर निगमों के लिए मतदान हो रहा है। इन चुनावों को केवल स्थानीय निकाय की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नजरें देश की सबसे अमीर नगरपालिका BMC पर टिकी हैं, जहां सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।
इस चुनावी मुकाबले को ठाकरे ब्रदर्स बनाम महायुति के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे की सियासी विरासत और मराठी अस्मिता का दावा है, तो दूसरी ओर बीजेपी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की महायुति पूरी ताकत से मैदान में है। बीएमसी पर लंबे समय तक ठाकरे परिवार का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने समीकरण बदल दिए हैं।
BMC के पास हजारों करोड़ रुपये का बजट, मुंबई जैसे महानगर का प्रशासनिक नियंत्रण और विकास परियोजनाओं की सीधी कमान होती है। यही वजह है कि इसे मुंबई की सत्ता का असली केंद्र माना जाता है। आज होने वाला मतदान तय करेगा कि आने वाले वर्षों में शहर की विकास दिशा किसके हाथों में होगी। कुल वार्डों में सैकड़ों उम्मीदवार मैदान में हैं और सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की हलचल देखने को मिल रही है।
29 नगर निगमों में हो रहे चुनावों का असर केवल शहरी राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। जानकारों का मानना है कि इन नतीजों से राज्य की सियासी हवा का रुख साफ होगा। महायुति जहां अपने शासन और विकास मॉडल के नाम पर वोट मांग रही है, वहीं ठाकरे गुट भावनात्मक अपील, स्थानीय मुद्दों और मराठी पहचान को केंद्र में रखकर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहा है।
चुनाव को देखते हुए मुंबई और अन्य शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। मतदाताओं में भी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि यह चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने का नहीं, बल्कि यह तय करने का भी है कि मुंबई का अगला ‘किंग’ कौन होगा।
अब सबकी निगाहें मतदान प्रतिशत और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो महाराष्ट्र की राजनीति की अगली तस्वीर साफ करेंगे।