दिल्ली-एनसीआर इन दिनों भीषण ठंड और गंभीर वायु प्रदूषण की दोहरी मार झेल रहा है। जनवरी के मध्य में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी में न्यूनतम तापमान गिरकर करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कई इलाकों में शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है। ठंड के साथ-साथ घना कोहरा और प्रदूषित हवा ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के कई हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 600 के पार दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ से भी ऊपर की श्रेणी में आता है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है। सुबह और देर रात घना स्मॉग छाए रहने से दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर वाहनों की रफ्तार थमी हुई नजर आई, जबकि उड़ानों पर भी कोहरे का असर पड़ा।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी हवाओं की रफ्तार बेहद कम होने और वातावरण में नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास ही फंसे हुए हैं। यही वजह है कि हवा साफ होने की कोई तात्कालिक संभावना नजर नहीं आ रही। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में गिरावट और हवा की सुस्ती प्रदूषण को और घना बना देती है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
अस्पतालों में सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, खांसी और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सुबह की सैर और खुले में व्यायाम से बचने, मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की सिफारिश की जा रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने ग्रैप (GRAP) के कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल वाहनों पर सख्ती और स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने जैसे कदम उठाए गए हैं। बावजूद इसके, जब तक मौसम में बदलाव नहीं आता या तेज हवाएं नहीं चलतीं, तब तक दिल्ली-एनसीआर को जहरीली हवा से राहत मिलना मुश्किल माना जा रहा है।