अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला को लेकर एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने हाल ही में खुद को वेनेज़ुएला का “कार्यवाहक राष्ट्रपति” बताकर दावा किया कि वर्तमान सरकार के खिलाफ वे अधिकार रखते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वेनेज़ुएला से प्रतिदिन लगभग पाँच करोड़ बैरल तेल अमेरिका भेजा जा रहा है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और कई देशों तथा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
ट्रंप के इस बयान को लेकर विश्लेषक बताते हैं कि यह अमेरिकी राजनीति में एक तरह की रणनीतिक स्थिति दिखाती है। उन्होंने वेनेज़ुएला के तेल संसाधनों पर अपने दृष्टिकोण को सामने रखा और इसे अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ा। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला से आने वाले तेल की मात्रा अमेरिकी बाजार के लिए अहम है और इससे अमेरिका की ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत हो रही है। हालांकि, इस दावे की सटीकता पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं और कहा कि इस प्रकार के आंकड़ों को स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट करना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेजी से सामने आई। लैटिन अमेरिका और संयुक्त राज्य अमेरिका में कई राजनयिक और मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने ट्रंप के बयान पर संदेह व्यक्त किया है। वेनेज़ुएला की मौजूदा सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक शोभा हीन कदम बताया। साथ ही कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच पहले से ही जटिल संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ट्रंप का यह बयान 2024 के अमेरिकी चुनावों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। वे लगातार विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा को अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाते रहे हैं। उनका यह दावा और विवादित बयान उनके समर्थकों को सक्रिय रखने और मीडिया में ध्यान आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, ट्रंप द्वारा खुद को वेनेज़ुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति बताना और तेल निर्यात के आंकड़े का दावा करना एक विवादास्पद और बहुआयामी राजनीतिक बयान साबित हुआ है। इसने न केवल अमेरिका और वेनेज़ुएला के संबंधों पर असर डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा को भी जन्म दिया है। इसके प्रभाव और आगे की प्रतिक्रियाओं पर सभी नजरें टिकी हुई हैं।