केंद्रीय बजट 2026 से देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। बीते कुछ वर्षों में भारत ने स्टार्टअप के मामले में वैश्विक पहचान बनाई है, लेकिन मौजूदा आर्थिक चुनौतियों, बढ़ती ब्याज दरों और फंडिंग में आई सुस्ती के चलते कई नए उद्यम दबाव में हैं। ऐसे में बजट 2026 को स्टार्टअप सेक्टर के लिए निर्णायक माना जा रहा है, जहां सरकार से खास तौर पर सस्ते और आसान कर्ज की मांग जोर पकड़ रही है।
स्टार्टअप संस्थापकों का कहना है कि शुरुआती चरण में पूंजी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। निजी निवेश और वेंचर कैपिटल फंडिंग पहले की तुलना में सतर्क हो गई है, जिससे नए और छोटे स्टार्टअप्स को विस्तार के लिए जरूरी संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों के जरिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे, ताकि नवाचार को गति मिल सके।
उद्योग जगत की ओर से यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना को और मजबूत किया जाए। यदि सरकार कर्ज पर आंशिक गारंटी दे, तो बैंक और एनबीएफसी स्टार्टअप्स को ऋण देने में ज्यादा सहज होंगे। इससे खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में उभर रहे उद्यमियों को लाभ मिल सकता है, जहां पूंजी तक पहुंच अब भी सीमित है।
इसके अलावा टैक्स से जुड़ी राहतों की भी मांग सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार्टअप्स के लिए टैक्स हॉलिडे की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए और एंजेल टैक्स जैसे प्रावधानों को पूरी तरह समाप्त करने की जरूरत है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और नए विचारों में पूंजी लगाने का माहौल मजबूत होगा। साथ ही, रिसर्च और डेवलपमेंट पर खर्च करने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त कर प्रोत्साहन दिए जाने की भी चर्चा है।
डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को लेकर सरकार से विशेष पैकेज की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि यदि बजट 2026 में इन क्षेत्रों के लिए लक्षित योजनाएं लाई जाती हैं, तो भारत वैश्विक नवाचार मानचित्र पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 स्टार्टअप्स के लिए सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत समर्थन का अवसर है। सस्ते कर्ज, सरल नियम और कर राहत जैसे कदम न केवल नए उद्यमों को संजीवनी देंगे, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान कर सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार स्टार्टअप्स की इन अपेक्षाओं पर बजट में कितना खरा उतरती है।