योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला: 15 लाख शिक्षकों को निजी अस्पतालों में भी मिलेगा कैशलेस इलाज
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने गुरूवार को शिक्षा क्षेत्र से जुड़े करीब 15 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रितों के लिए बड़ा स्वास्थ्य राहत पैकेज मंजूर किया है। इस फैसले से उन्हें सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी, जिससे लाखों परिवारों के सामने संभावित मेडिकल खर्च का बोझ कम होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत कार्यरत कर्मचारियों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल की घोषणा योगी ने पिछले साल शिक्षक दिवस (5 सितम्बर 2025) पर की थी और अब कैबिनेट की मंज़ूरी के साथ इसे जल्द ही लागू किया जाएगा।
कैशलेस इलाज की विशेषताएँ
नई योजना के अंतर्गत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कर्मियों और उनके आश्रितों को इन-पेशन (IPD) इलाज के दौरान खर्च में राहत मिलेगी। यह सुविधा सरकारी और अम्पैनल्ड निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी, जहां इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगी।
इस योजना का अनुमानित कुल व्यय लगभग ₹448 करोड़ है, जिसमें शिक्षकों और कर्मचारियों का स्वास्थ्य कवर शामिल है। शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 30 को मंजूरी मिली। योजना की शुरुआत के बाद शेष कर्मचारियों को भी धीरे-धीरे लाभान्वित किया जाएगा।
लाभार्थियों और प्रक्रिया
योगी सरकार के इस फैसले से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के साथ जुड़े लगभग 15 लाख कर्मियों को फायदा होगा। इसमें स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्हें स्वीकृत वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद योजना का लाभ मिलेगा। इस प्रक्रिया में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा कमिटियाँ गठित की जाएँगी।
योजना के अंतर्गत शिक्षक और कर्मचारी एक निश्चित रकम तक कैशलेस इलाज करवा सकेंगे, जिससे मेडिकल आपात स्थितियों में उन्हें बोझ न उठाना पड़े। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो कर्मचारी पहले से किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना (जैसे आयुष्मान भारत या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान) के अंतर्गत कवर हैं, उन्हें इस योजना का अलग लाभ नहीं मिलेगा।
शिक्षक समुदाय की प्रतिक्रिया
शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कैशलेस इलाज की सुविधा शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के लिए एक लंबे समय से उठती मांग थी। महंगे इलाजों के खर्च को देखते हुए यह निर्णय आर्थिक सुरक्षा और रोजगार-बंधन को सुदृढ़ करेगा और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएँ अधिक सहज रूप से उपलब्ध कराएगा।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ ही स्वास्थ्य सुरक्षा कवरेज को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज मिलने से लाखों परिवारों को राहत मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाएँ अब अधिक सुलभ होंगी।