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चंडीगढ़

जल संसाधन विभाग, नदी विकास और गंगा संरक्षण के सचिव ने रुड़की स्थित राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान में आयोजित शासी निकाय की 86वीं बैठक की अध्यक्षता की

February 15, 2026 01:25 PM

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के शासी निकाय (जीबी) की 86वीं बैठक एनआईएच रुड़की में संस्थान की प्रगति और रणनीतिक दिशा की समीक्षा के लिए आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्ल्यूआर, आरडी एवं जीआर) के सचिव श्री वी. एल. कंथा राव ने की। इस विचार-विमर्श में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और सतत जल संसाधन प्रबंधन सहित महत्वपूर्ण जल चुनौतियों से निपटने वाले एक प्रमुख अनुसंधान संगठन के रूप में एनआईएच की बढ़ती भूमिका पर बल दिया गया।

अनुसंधान और प्रभाव का विस्तार

2024-25 के दौरान, एनआईएच ने सफलतापूर्वक 111 अनुसंधान एवं विकास अध्ययन और 28 अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रायोजित परियोजनाओं का प्रबंधन किया। राष्ट्रीय महत्व के अध्ययनों पर सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप, संस्थान ने लूणी नदी बेसिन में व्यापक आकलन और पश्चिमी हिमालयी ग्लेशियरों, जिनमें गंगोत्री, त्रिलोकी और खाटलिंग प्रणालियां शामिल हैं उनकी व्यापक निगरानी शुरू की है। स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) द्वारा प्रायोजित एक प्रमुख परियोजना भी चंबल, सोन, दामोदर और टोंस नदियों के पर्यावरणीय प्रवाह का आकलन करने के लिए चल रही है।

संस्थान भूजल पुनर्भरण के आकलन और प्रबंधन के लिए वेब-आधारित निर्णय-सहायता उपकरण एनआईएच -विजडम के विकास के माध्यम से डिजिटल जल प्रबंधन को आगे बढ़ा रहा है। एनआईएच ने क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए 76 प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया। इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं से विभिन्न क्षेत्रों के 1,845 से अधिक कर्मियों को लाभ हुआ। संस्थान ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय भूजल सम्मेलन (आईजीडब्‍ल्‍यूसी-2025) और राष्ट्रीय अनुकूलन योजना (एनएपी) पर एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला भी आयोजित की।

क्षेत्रीय और उभरती चुनौतियों का समाधान

शासी निकाय ने विशेष अध्ययनों पर हुई प्रगति की समीक्षा की, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ऐतिहासिक ‘‘जापानी कुओं’’ की तकनीक पर शोध करना और द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कुशल वर्षा जल संचयन विकसित करना।
  • जल गुणवत्ता: विभिन्न स्थानों पर भूजल में नाइट्रेट की उच्च सांद्रता के कारणों की जांच करना।
  • आर्द्रभूमि संरक्षण: रेवालसर, बद्रीश और वुलर झीलों सहित महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन।

संस्थान ने अपने बढ़ते हुए अनुसंधान कार्यक्रमों और प्रयोगशाला अवसंरचना के समर्थन हेतु वर्ष 2026-27 के लिए 6,800.00 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। शासी निकाय ने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुरूप आम आदमी के लिए विज्ञान-आधारित समाधान प्रदान करने और राष्ट्रीय जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान के रूप में विकसित होने की एनआईएच की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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