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चंडीगढ़

रेल मंत्रालय ने “बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाएँ” एवं “गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों और कार्गो-संबंधित सुविधाओं के माध्यम से रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स” के साथ सुधार एक्सप्रेस को आगे बढ़ाया

February 15, 2026 01:32 PM

एक ऐतिहासिक कदम के तहत सामान्य कोचों पर विशेष ध्यान देते हुए, रेल मंत्रालय ने ट्रेनों की निरन्तर सफाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा

बेहतर चादर-कंबल और कोचों की गुणवत्तापूर्ण सफाई के लिए सेवा प्रदाता की पहचान की जाएगी; उत्कृष्ट सफाई सुनिश्चित करने हेतु एआई-सक्षम निगरानी की व्यवस्था की जाएगी

क्षेत्रीय अनुभव और उन्नत परिचालन दक्षता के आधार पर समस्त भारतीय रेल में कार्यान्वयन की योजना बनाई गई है

एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत वर्तमान 124 मल्टी-मॉडल टर्मिनलों को कार्गो-प्लस-प्रोसेसिंग हब में परिवर्तित किया जाएगा

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु 500 से अधिक गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों की योजना बनाई गई है

प्रविष्टि तिथि: 14 FEB 2026 6:52PM by PIB Delhi
 

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने आज घोषणा की कि वर्ष 2026 के दौरान “52 सप्ताह में 52 सुधार” करने के भारतीय रेल के संकल्प के अनुरूप, भारतीय रेल द्वारा दो नए सुधारों को स्वीकृति दी गई है और उनका कार्यान्वयन तत्काल प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुधार एकबारगी घटना नहीं, बल्कि एक सतत् प्रक्रिया है।

श्री वैष्णव ने कहा कि इसका प्रभाव आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, क्योंकि भारतीय रेल विश्व में दूसरी सबसे बड़ी माल परिवहन सेवा बन चुकी है, तथा पूरे तंत्र में नई पीढ़ी की ट्रेनों और कार्य करने के नए तरीकों का उद्भव हो रहा है।

 

बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाओं के लिए सुधार

पहले सुधार की व्याख्या करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 से भारतीय रेल ट्रेनों, विशेषकर लंबी दूरी की ट्रेनों की समुचित एंड-टु-एंड सफाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत सफाई मुख्यतः आरक्षित कोचों तक सीमित थी, और रेलवे के इतिहास में पहली बार सामान्य कोचों की सफाई को पूर्ण रूप से प्रणाली में एकीकृत किया गया है।

रेलवे में जो ट्रेनें चलती हैं, विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों, उनकी प्रॉपर एंड-टू-एंड क्लीनिंग सुनिश्चित की जाएगी। इस रिफॉर्म के तहत जनरल कोचों की सफाई की जाएगी एवं ट्रेन के ओरिजिन से लेकर डेस्टिनेशन तक कंटीन्यूअस सफाई सुनिश्चित की जाएगी: रेल मंत्री श्री… pic.twitter.com/hTeh6h0pqj

उन्होंने बताया कि पूर्व की “क्लीन ट्रेन स्टेशन” अवधारणा, जिसके अंतर्गत सीमित स्टेशनों पर गहन सफाई की जाती थी, को अब ट्रेन के प्रस्थान स्थल से लेकर गंतव्य स्‍थल तक निरन्‍तर सफाई मॉडल से प्रतिस्थापित किया जा रहा है। शौचालय, कूड़ेदान, केबिन के आंतरिक भाग, जल उपलब्धता तथा यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाली लाइट बंद होने जैसी छोटी विद्युत या यांत्रिक त्रुटियों का निरंतर समाधान किया जाएगा, जिससे यात्रियों को उल्लेखनीय रूप से बेहतर यात्रा वातावरण प्राप्त हो।

श्री वैष्णव ने कहा कि यह सुधार यात्रियों के यात्रा वातावरण को पूर्णतः बेहतर बनाने की सोच के साथ तैयार किया गया है। जोनल रेलवे के परामर्श से प्रत्येक जोन में लगभग चार से पाँच ट्रेनों—मुख्यतः लंबी दूरी और अधिक यात्री आवागमन वाली—को अगले छह महीनों में क्रियान्वयन के लिए चिन्हित किया गया है। प्रथम चरण में विभिन्न जोनों में कुल 80 ट्रेनों की पहचान की जा चुकी है, और तीन वर्षों की अवधि में यह सुधार भारतीय रेल की सभी ट्रेनों में लागू किया जाएगा। ट्रेनों का चयन प्रबंधकीय स्तर पर क्षेत्रीय इनपुट और परिचालन मानकों के आधार पर किया गया है।

मंत्री महोदय ने विस्तार से बताया कि स्पष्ट रूप से परिभाषित सेवा स्तर समझौतों के अंतर्गत, सफाई की आवृत्ति निर्धारित करते हुए एक पूर्णतः प्रौद्योगिकी-सक्षम पेशेवर टीम की नियुक्ति की जाएगी। अत्‍यधिक भीड़-भाड़ के समय में अधिक बार तथा कम भीड़भाड़ के समय में तुलनात्मक रूप से कम आवृत्ति से सफाई की व्यवस्था होगी। शौचालयों की निरंतर सफाई, कचरा निष्पादन, केबिनेट की सफाई,  चादर-कंबल इत्‍यादि प्रबंधन तथा संबंधित सेवाएँ सुनिश्चित की जाएंगी।

उन्होंने आगे कहा कि चादर-कंबल इत्‍यादि वितरण, इनका संग्रहण और सफाई से संबंधित कार्य, जो पहले अलग-अलग एजेंसियों के बीच विभाजित थे, अब एकीकृत करके एक ही एजेंसी को सौंपे जाएंगे। निर्धारित स्टेशनों पर आरक्षित कोचों में तैनात कर्मचारी सामान्य कोचों में भी जाकर आरक्षित कोचों के समान सफाई मानक सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने इसे रेलवे के इतिहास में एक बहुत बड़ा परिवर्तन बताते हुए कहा कि पहली बार सामान्य कोचों की स्वच्छता पर इतना व्यापक और ठोस ध्यान दिया जा रहा है।

इस सुधार के अंतर्गत वॉर रूम नियंत्रण केंद्रों की स्थापना भी शामिल है, जहाँ सफाई गतिविधियों की एआई द्वारा उत्पन्न तसवीरों की निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा। एआई-आधारित मूल्यांकन के माध्यम से यह सत्यापित किया जाएगा कि सफाई उचित रूप से की गई है या नहीं, और यदि नहीं, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों द्वारा दीर्घ परिचालन अनुभव के आधार पर विस्तृत अध्ययन के पश्चात मार्ग-विशिष्ट टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों में बहु-कौशल कर्मी शामिल होंगे, जो सफाई के अतिरिक्त छोटे-मोटे यांत्रिक एवं विद्युत मरम्मत कार्यों का निपटान करने में भी सक्षम होंगे, जिससे एकीकृत ऑन-बोर्ड सेवा प्रदान की जा सके।

 

माल ढुलाई लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु बेहतर सुविधाओं के साथ अधिक गति शक्ति कार्गो टर्मिनल

दूसरे सुधार का रुख़ करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह वर्ष 2022 में शुरू की गई गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) नीति पर आधारित है, जिसने कार्गो टर्मिनल अनुमोदन प्रक्रिया को उल्लेखनीय रूप से सरल बनाया। जो कार्य पहले छह वर्ष में पूर्ण होते थे, वे लगभग तीन माह में पूरे होने लगे और इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, सिग्नलिंग योजना और विद्युत योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया। इसके परिणामस्वरूप 124 मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनलों का विकास हुआ, जिनकी अनुमानित यातायात क्षमता लगभग 200 मिलियन टन और वार्षिक राजस्व क्षमता लगभग ₹20,000 करोड़ आंकी गई है।

श्री वैष्णव ने कहा कि तीन वर्षों के अनुभव के आधार पर चार माह तक हितधारकों से परामर्श के पश्चात एक व्यापक रूप से उन्नत सुधार को स्वीकृति दी गई है। इस सुधार के साथ, वर्तमान 124 गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों की संख्या अगले पाँच वर्षों में 500 से अधिक होने की अपेक्षा है। उन्होंने इसे वर्ष 2022 के सुधार से भी अधिक व्यापक और मूलभूत सुधार बताया।

 सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान कार्गो टर्मिनलों के भीतर प्रसंस्करण की सुविधा का एकीकरण है, जिससे उन्हें “कार्गो प्लस प्रोसेसिंग” हब में परिवर्तित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीमेंट क्लिंकर को जीसीटी तक लाकर उसी टर्मिनल परिसर में सीमेंट में परिवर्तित किया जा सकता है, तत्पश्चात उसकी पैकेजिंग या रेडी-मिक्स कंक्रीट वाहनों के माध्यम से प्रेषण किया जा सकता है। इसी प्रकार, खाद्यान्न प्रसंस्करण, स्टफिंग एवं डी-स्टफिंग तथा अन्य मूल्य संवर्धन गतिविधियाँ अब टर्मिनल परिसर के भीतर ही संचालित की जा सकेंगी। इससे सामग्री को टर्मिनल तक लाने से पूर्व अन्यत्र प्रसंस्करण की आवश्यकता समाप्त होगी, कृत्रिम अवरोध दूर होंगे और अतिरिक्त माल यातायात रेलवे की ओर आकर्षित होगा।

उन्होंने कहा कि अनेक कम उपयोग किए गए माल शेडों को जीसीटी और कार्गो सुविधाओं के रूप में विकसित किया जाएगा। पूर्व नीतियों के अंतर्गत विकसित पुरानी साइडिंग्स को सरल जीसीटी ढांचे में स्थानांतरित किया जा सकेगा। टर्मिनलों और मुख्य लाइनों के बीच छोटे संपर्क खंडों पर, जहाँ उच्च उपकरण लागत के कारण निजी संचालकों को पटरियों और विद्युत प्रणालियों के रखरखाव में कठिनाई होती थी, वहाँ अब रेलवे वैकल्पिक रूप से भुगतान के आधार पर रखरखाव का कार्य करेगा, जिससे सुरक्षा में सुधार होगा और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।

इस सुधार के अंतर्गत वाई-कनेक्शन और रेल-ओवर-रेल संरचनाओं सहित, विस्तृत कॉमन यूज़र सुविधाओं की अनुमति प्रदान की गई है। मल्टी-जीसीटी कनेक्टिविटी को औपचारिक रूप दिया गया है, जिससे यदि किसी मौजूदा खंड पर नया टर्मिनल विकसित किया जाता है तो कनेक्टिविटी से इनकार न किया जा सके, जिससे पूर्व में उत्पन्न होने वाले विवाद और न्यायिक वाद-विवाद की स्थिति से बचा जा सके। विवाद निवारण हेतु एक रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है, जिसके अंतर्गत टर्मिनल डेवलपर्स और रेलवे अधिकारियों के बीच मासिक अथवा माइलस्टोन-आधारित संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों के परिणामस्वरूप संयुक्त टिप्पणियाँ तथा “नो डिस्प्यूट सर्टिफिकेट” जारी किए जाएंगे, जिससे मध्यस्थता या अदालती मामलों की आवश्यकता घट जाएगी।

मानक लेआउट को नीति में समाहित किया गया है, और जो आवेदक मानक डिज़ाइन अपनाएंगे उन्हें स्वचालित स्वीकृति प्रदान की जाएगी, ठीक उसी प्रकार जैसे दूरसंचार सुधार मॉडल में मानकीकरण से स्वीकृति समयसीमा में उल्लेखनीय कमी आई थी। जीसीटी और कार्गो-संबंधित सुविधाओं के लिए अनुबंध अवधि को 35 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष कर दिया गया है, जिससे दीर्घकालिक निवेश और पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

मंत्री महोदय ने अनुमान व्यक्त किया कि उन्नत माल परिवहन के माध्यम से यह सुधार तीन वर्ष की अवधि में लगभग ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने नवंबर–दिसंबर में प्रारंभ किए गए सीमेंट परिवहन सुधार का उदाहरण देते हुए कहा कि थोक सीमेंट की मात्रा दोगुनी से अधिक हो गई है; जनवरी में यह आंकड़ा लगभग 95,000 टन तक पहुँच गया, जबकि पिछले वर्ष यह लगभग 40,000 टन पर था। उन्होंने उल्लेख किया कि रेलवे-आधारित थोक सीमेंट परिवहन से लागत में उल्लेखनीय कमी आई है—जम्मू और कश्मीर में लगभग 30% तक तथा मिजोरम में लगभग 50%  तक — साथ ही वैज्ञानिक परिवहन विधियों के माध्यम से प्रदूषण में भी कमी आई है।

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