उत्तर भारत के मौसम में एक बार फिर बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह उतार-चढ़ाव फरवरी के दूसरे पखवाड़े में सामान्य मौसमी चक्र का हिस्सा है, लेकिन इसके कारण लोगों को दिन-रात के तापमान में स्पष्ट अंतर महसूस हो सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, ताज़ा प्रणाली के सक्रिय होने से हिमालयी क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की से मध्यम वर्षा के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात होने की संभावना है। इस बदलाव का असर निचले इलाकों पर भी पड़ेगा, जहां बादलों की आवाजाही से ठंडी हवाएं चल सकती हैं। वहीं दूसरी ओर साफ आसमान और धूप निकलने के कारण मैदानी शहरों में दिन का पारा ऊपर चढ़ता दिख रहा है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि तापमान में यह बढ़ोतरी अस्थायी हो सकती है और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ स्थानों पर हल्की बारिश राहत ला सकती है। किसानों के लिए यह स्थिति मिश्रित प्रभाव वाली मानी जा रही है—जहां एक ओर हल्की वर्षा रबी फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है, वहीं अचानक मौसम परिवर्तन से फसलों की देखभाल को लेकर सतर्कता बरतना आवश्यक है।
India Meteorological Department ने भी संकेत दिए हैं कि अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम सक्रिय रह सकता है। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखें और यात्रा या बाहरी गतिविधियों की योजना बनाते समय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और सुबह-शाम के तापमान अंतर से बचाव करना जरूरी है। कुल मिलाकर फरवरी के मध्य में मौसम का यह बदलता मिजाज आने वाले हफ्तों में और उतार-चढ़ाव के संकेत दे रहा है, जिससे लोगों को सावधानी और अपडेट रहने की जरूरत है।