वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा है कि देश ने 38 देशों के साथ अपनी शर्तों और हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते किए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। उनका कहना था कि राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत निरंतरता और सुधारों की दिशा में उठाए गए कदमों ने भारत को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित किया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीते वर्षों में आर्थिक कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए व्यापार और सहयोग के नए रास्ते खोले गए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि तकनीकी सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन जैसे व्यापक लक्ष्यों को आगे बढ़ाना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के समझौते वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि निवेशकों का भरोसा केवल आर्थिक नीतियों से नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थिरता से बनता है। उनका कहना था कि जब किसी देश में स्पष्ट नीति ढांचा और राजनीतिक स्थायित्व होता है, तो विदेशी निवेशक दीर्घकालिक योजनाओं के साथ आगे बढ़ने के लिए अधिक आश्वस्त महसूस करते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे, डिजिटल नेटवर्क और विनिर्माण क्षेत्र में सुधारों ने वैश्विक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित किया है।
विश्लेषकों का आकलन है कि इस प्रकार की नीतिगत दिशा का असर उद्योग और रोजगार पर सकारात्मक रूप में पड़ सकता है। विशेष रूप से विनिर्माण, तकनीक और सेवा क्षेत्र में निवेश से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, आर्थिक साझेदारियों के विस्तार से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी भी बढ़ सकती है, जो दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कुल मिलाकर, सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों और स्थिर राजनीतिक माहौल के संयोजन ने भारत को वैश्विक निवेश मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने में मदद की है। आने वाले समय में इन साझेदारियों का प्रभाव व्यापार वृद्धि, रोजगार अवसरों और तकनीकी विकास के रूप में देखने को मिल सकता है।