तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी की इस सूची में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी का नाम सबसे अधिक सुर्खियों में है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेनका गुरुस्वामी देश की जानी-मानी विधि विशेषज्ञ हैं और कई अहम संवैधानिक मामलों में अपनी पैरवी के लिए पहचानी जाती हैं। विशेष रूप से LGBTQ अधिकारों से जुड़े ऐतिहासिक मामलों में उनकी भूमिका चर्चा का विषय रही है। यदि वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित होती हैं, तो उन्हें देश की संसद में खुले तौर पर LGBTQ समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले सांसद के रूप में देखा जाएगा। इसे सामाजिक विविधता और समावेशन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी हमेशा से विविध पृष्ठभूमि और पेशेवर अनुभव वाले लोगों को संसद में भेजने के पक्ष में रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वह प्रगतिशील और उदार छवि को मजबूत करना चाहती है। पश्चिम बंगाल की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाली टीएमसी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपस्थिति प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि विपक्षी दलों ने इस घोषणा पर सवाल भी उठाए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि यह कदम आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। वहीं समर्थकों का मानना है कि विधि और मानवाधिकार के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले चेहरों का संसद में जाना लोकतांत्रिक विमर्श को समृद्ध करेगा।
राज्यसभा चुनाव में जीत की संभावना को देखते हुए टीएमसी के उम्मीदवारों की राह अपेक्षाकृत आसान मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी का बहुमत है। अब नजरें चुनावी प्रक्रिया पर टिकी हैं और यह देखा जाएगा कि यह चयन राष्ट्रीय राजनीति में किस तरह का संदेश देता है। मेनका गुरुस्वामी का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों मंचों पर नई बहस शुरू हो गई है।