पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और दूसरे चरण को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंचती दिख रही हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में 3.6 करोड़ से अधिक मतदाता इस चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। इस बड़े मतदाता आधार को साधने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
दूसरे चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक 2200 से ज्यादा उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं, जो इस चरण की चुनावी प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना रहा है। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला बहुकोणीय होने के आसार हैं, जिससे परिणामों में अप्रत्याशित बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
चुनाव आयोग की ओर से नामांकन प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज हैं और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दी है। प्रचार अभियान में भी तेजी आई है, जहां नेता जनसभाओं, रोड शो और घर-घर संपर्क के जरिए मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। रोजगार, विकास, कानून-व्यवस्था और स्थानीय समस्याएं इस बार चुनावी बहस के मुख्य मुद्दे बने हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े मतदाता आधार और भारी संख्या में उम्मीदवारों के कारण यह चरण काफी अहम साबित हो सकता है। यह न सिर्फ पार्टियों की लोकप्रियता का परीक्षण करेगा, बल्कि आने वाले चरणों के लिए भी दिशा तय करेगा। फिलहाल, सभी की नजरें मतदान प्रतिशत और उम्मीदवारों की रणनीति पर टिकी हैं, जो इस चुनाव के नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।