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चंडीगढ़

समूचे देश को जोड़कर सबसे गरीब और दूरदराज के देशवासियों की सेवा कर रही है भारतीय रेल, निवेश में बड़ी छलांग के साथ एक सूत्र में पिरो रही है विविधतापूर्ण देश को

April 13, 2026 06:28 AM

2025-26 में रिकॉर्ड 6000 किलोमीटर लंबे रेलवे विस्तार को मंजूरी मिली; पिछले वर्ष की तुलना में 114 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि

जनजातीय क्षेत्रों में नई लाइनें बिछाने, समयपालन में सुधार के लिए भीड़भाड़ वाले मार्गों को सुव्यवस्थित करने और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान

1.53 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 110 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी; भारत में विश्व स्तरीय उच्च क्षमता वाले रेल नेटवर्क को विकसित करने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 100 परियोजनाएं स्वीकृत

परिचालन दक्षता में सुधार, यात्रा समय में कमी, रोज़गार सृजन, प्रमुख उद्योगों को बढ़ावा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने वाली परियोजनाएँ



परियोजनाओं का दायरा सभी राज्यों को समेटे हुए है और पूरे भारत में यात्री और माल ढुलाई, दोनों सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अधिक जनसँख्या घनत्व वाले राज्यों पर विशेष रूप से केंद्रित

महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश माल ढुलाई गलियारों, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्री आवागमन को सुदृढ़ करेंगे

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत, ये परियोजनाएं बाजारों, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करके लोगों को एक साथ ला रही हैं

1,000 करोड़ रुपये से अधिक की 35 से ज्यादा परियोजनाएं, जिनमें कसारा-मनमाड, खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा के साथ-साथ इटारसी-नागपुर और सिकंदराबाद-वाडी का उन्नयन शामिल

कार्गो में 3000 मीट्रिक टन के केंद्रित मिशन के साथ, इन परियोजनाओं का लक्ष्य नेटवर्क दक्षता बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा, पोर्ट कनेक्टिविटी, कोयले की तेज़ आवाजाही और बेहतर तटीय व्यापार को बढ़ावा देना

देश के अंतिम छोर को जोड़कर और सबसे गरीब तथा वंचित क्षेत्रों की सेवा करते हुए, भारतीय रेल, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एक परिवर्तनकारी विस्तार कर रही है। समावेशी विकास और राष्ट्रीय एकीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 में नई लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग और अन्य कार्यों से जुड़ी 100 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह अभूतपूर्व प्रयास बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से विविध राष्ट्र को एकजुट करने के प्रति भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही एक उच्च-क्षमता वाले और भविष्य के लिए तैयार नेटवर्क की नींव भी रख रहा है।

इन परियोजनाओं में कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जो 6,000 किलोमीटर से अधिक के रेलवे नेटवर्क को कवर करता है। यह रेलवे विस्तार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में, जहाँ 72,869 करोड़ रुपये की लागत वाली 64 परियोजनाओं (2,800 किलोमीटर से अधिक) को मंजूरी दी गई थी, इस बार परियोजना की स्वीकृतियों में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है और वित्तीय प्रतिबद्धता में 110 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

मंजूर की गई 100 परियोजनाओं में नई लाइनें, दोहरीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग के काम, साथ ही बाईपास लाइनें, फ्लाईओवर और कॉर्ड लाइनें शामिल हैं। इनका रणनीतिक उद्देश्य भीड़भाड़ वाले मार्गों को खाली करना, समय की पाबंदी में सुधार करना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है, साथ ही उन क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी का विस्तार करना है जहाँ अभी तक पर्याप्त सुविधाएँ नहीं पहुँची हैं। इन पहलों से पूरे नेटवर्क में परिचालन दक्षता में काफी सुधार होने और यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद है।

ये परियोजनाएँ लगभग सभी प्रमुख राज्यों में फैली हुई हैं, जिससे रेलवे नेटवर्क का संतुलित और समावेशी विस्तार सुनिश्चित होता है। महाराष्ट्र (17 परियोजनाएँ), बिहार (11), झारखंड (10) और मध्य प्रदेश (9) प्रमुख फोकस राज्यों के रूप में उभरे हैं, क्योंकि माल ढुलाई गलियारों, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्रियों की माँग में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में निवेश का पैमाना यात्री और माल ढुलाई, दोनों ही सेवाओं को काफी हद तक बेहतर बनाने वाला है।

महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इन परियोजनाओं से माल ढुलाई गलियारों  को मजबूती मिलेगी, औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों की आवाजाही में सुधार होगा। ये राज्य भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ हैं और यहाँ बेहतर कनेक्टिविटी होने से पूरी अर्थव्यवस्था में व्यापक लाभ होगा।

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, ये परियोजनाएं केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन को सक्षम बनाती हैं। जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार पर मुख्य ध्यान दिया गया है। छत्तीसगढ़ में रावघाट-जगदलपुर लाइन जैसी ऐतिहासिक पहल और झारखंड एवं ओडिशा में कई अन्य गलियारे, बाजारों, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे, जिससे वंचित आबादी को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाया जा सकेगा।

आर्थिक नजरिए से, यह विस्तार बड़े पैमाने पर और परिवर्तनकारी निवेश की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 35 से ज्यादा परियोजनाएं कॉरिडोर-स्तर के अपग्रेड की आधारशिला हैं। प्रमुख परियोजनाओं में लगभग 10,150 करोड़ रुपये की लागत से कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी), 8,740 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा 5वीं और 6वीं लाइन (278 किमी), 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इटारसी-नागपुर चौथी लाइन (297 किमी) और 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सिकंदराबाद (सनतनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन (173 किमी) शामिल हैं। एकसाथ मिलकर, केवल ये परियोजनाएं 28,000 करोड़ रुपये की हैं, जो उच्च-घनत्व वाले ट्रंक रूटों  को मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करती हैं।

ये परियोजनाएं रणनीतिक रूप से 'मिशन 3000 मीट्रिक टन'  पहल के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य माल ढुलाई क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करना है। पोर्टफोलियो में ऊर्जा कॉरिडोर परियोजनाओं का दबदबा है, जो कोयले और खनिजों की तेज़ आवाजाही की सुविधा प्रदान करती हैं और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती हैं। हाई डेंसिटी नेटवर्क परियोजनाएं महत्वपूर्ण मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करती हैं, जबकि 'रेल सागर कॉरिडोर' से पोर्ट कनेक्टिविटी और तटीय व्यापार में सुधार होता है। साथ मिलकर, ये पहलकदमियां समग्र नेटवर्क दक्षता और लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन को बेहतर बनाएंगी।

इतने बड़े निवेश से बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा होने, स्टील और सीमेंट जैसे मुख्य क्षेत्रों में मांग बढ़ने और पूरे देश में लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे ये परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी,   रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, सेवा वितरण में सुधार होगा और भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए एक उत्प्रेरक का काम करेंगी। यह कोई मामूली प्रगति नहीं है, यह परियोजनाएं भारत की अगली आर्थिक छलांग का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

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