भुपिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के युवाओं से नशे के खिलाफ संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि नशा कुछ समय के लिए भले ही एक अस्थायी "उत्साह" या सुकून का एहसास दे, लेकिन इसका असर इंसान के पूरे करियर और निजी जीवन पर बेहद नकारात्मक पड़ता है। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि नशे की यह क्षणिक अनुभूति व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी को अंधकार में धकेल सकती है, इसलिए युवाओं को इससे दूर रहना ही समझदारी है।
प्रधानमंत्री मोदी यह बात 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत के मौके पर बोल रहे थे। इस अभियान को उन्होंने वर्चुअल माध्यम से देशभर के बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं की उपस्थिति में लॉन्च किया, जिन्होंने खुद को जेन-ज़ी यानी वर्तमान युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि बताया। गौरतलब है कि यह लॉन्च ऐसे समय पर हुआ है जब हाल ही में दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखे गए थे।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं का शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना बेहद आवश्यक है, और इसके लिए हर तरह के मादक पदार्थों के सेवन से दूरी बनाना अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि जब देश ने विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है, तो युवाओं का हानिकारक नशे की लत से बचना उतना ही ज़रूरी हो जाता है, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहें।
प्रधानमंत्री ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख रखने वाले कुछ देश अपनी आतंकवादी रणनीति के हिस्से के रूप में जानबूझकर देश में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि युवा ही किसी भी राष्ट्र का भविष्य होते हैं। उन्होंने कहा कि नशे के जरिए देश के युवाओं को कमजोर करने की यह एक सोची-समझी साजिश है, और इसे समझते हुए ही सतर्क रहने की आवश्यकता है।
नशे की लत से जूझ चुके लोगों के प्रति समाज में व्याप्त कलंक और भेदभाव की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग नशे की गिरफ्त से बाहर निकल पाते हैं, वे वास्तव में योद्धा होते हैं और समाज को उनका सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार समाज का दायित्व है कि ऐसे लोगों को अपनाए, उन्हें सम्मान दे और उन्हें एक नया अवसर प्रदान करे ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।
प्रधानमंत्री ने परिवारों से भी एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि कई बार परिवार सामाजिक प्रतिष्ठा खोने के डर से अपने बच्चों की नशे की लत को छुपाते हैं, जबकि ऐसा करने के बजाय परिवार को चाहिए कि वे खुलकर बातचीत करें और समय रहते विशेषज्ञों से मदद लें। छुपाने की प्रवृत्ति समस्या को और गंभीर बना देती है, जबकि खुला संवाद ही समाधान की दिशा में पहला कदम है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि समाज के सहयोग, योग और ध्यान की सहायता से नशे की लत से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि एक सामूहिक सामाजिक संकल्प बताया, जो व्यक्ति, परिवार, समाज और सबसे बढ़कर पूरे राष्ट्र के लिए है। उन्होंने कहा कि अभियान का नाम ही इसके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सरकार की ओर से इस लड़ाई में पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देशभर में नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में अब गिरफ्तारियों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है और हजारों करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं। उनके अनुसार यह आंकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार नशे के खिलाफ कितनी गंभीरता और सख्ती से कार्य कर रही है।
इस अभियान की शुरुआत के साथ ही एक 100 सप्ताह तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी 'जन भागीदारी' अभियान का भी आगाज़ हुआ है, जिसके तहत हर रविवार को देशभर में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों में खेल प्रतियोगिताएं, वॉकाथॉन, ध्यान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक, संवाद मंच और कला प्रतियोगिताएं शामिल होंगी, ताकि जन-जन तक नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाया जा सके और एक नशा मुक्त समाज के निर्माण में जन-भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
उल्लेखनीय है कि नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत मूल रूप से वर्ष 2020 में की गई थी, जो प्रधानमंत्री मोदी के नशा मुक्त भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप था। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक तीन वर्षीय राष्ट्रव्यापी नशा-विरोधी अभियान की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य वर्ष 2029 तक देश को पूरी तरह नशा मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने नशे की समस्या से निपटने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल एक नीति की घोषणा भर नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं से एक भावनात्मक और नैतिक आह्वान भी है — कि वे नशे के अस्थायी आकर्षण के जाल में न फंसें और अपने उज्ज्वल भविष्य तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को प्राथमिकता दें।