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13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने ब्रिक्स सहयोग के प्रति भारत की जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

August 08, 2026 12:48 PM

श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा—भविष्य की पीढ़ियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए शिक्षा प्रणालियों का निरंतर विकास सुनिश्चित करने हेतु नवाचार आवश्यक है

भुवनेश्वर में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को अपनाए जाने के साथ संपन्न
 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज ब्रिक्स सहयोग के प्रति भारत की जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की, जो ओडिशा के भुवनेश्वर में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को अपनाए जाने के साथ संपन्न हुई।

ब्रिक्स के सभी साझेदार देशों के साथ मिलकर कार्य करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए, केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बैठक के दौरान उत्पन्न हुई गति सार्थक परिणामों में परिवर्तित होगी। वर्ष 2026 के लिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम, "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता का निर्माण," का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणालियों को युवाओं को उभरते अवसरों के लिए तैयार करना चाहिए, साथ ही उन्हें मानवीय मूल्यों से भी दृढ़तापूर्वक जोड़े रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा युवाओं को नीतिनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

श्री जोशी ने कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझी समृद्धि की आधारशिला है तथा अंगीकृत घोषणा ब्रिक्स देशों की पाँच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने पारंपरिक एवं देशज ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि नवाचार और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत परंपराएँ पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, उसके गहन अध्ययन तथा उसके महत्व को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक विशिष्ट अवसर प्रदान करती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा केंद्र के रूप में समृद्ध विरासत का उल्लेख किया तथा भारत के शाश्वत सभ्यतागत मूल्यों "अतिथि देवो भव:" और "वसुधैव कुटुम्बकम्" का स्मरण कराया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यद्यपि देशों की परंपराएँ और अनुभव भिन्न हो सकते हैं, किंतु उनकी प्रगति परस्पर जुड़ी हुई है।

ब्रिक्स शिक्षा कार्यसूची (ब्रिक्स एजुकेशन ट्रैक) के अंतर्गत सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया तथा संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को अंगीकृत किए जाने के साथ शिक्षा को ब्रिक्स सहयोग के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में पुनः पुष्टि मिली तथा भारत की अध्यक्षता के अंतर्गत चिन्हित पाँच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर एक साझा कार्य-योजना प्रस्तुत की गई। इसके प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं:

1. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) तथा बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को सुदृढ़ बनाना: गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा तक सार्वभौमिक और समावेशी पहुँच को बढ़ावा देने, विद्यालय के लिए बच्चों की तैयारी को सुदृढ़ करने तथा प्रारंभिक शिक्षा के लिए आयु-उपयुक्त डिजिटल समाधानों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की गई।

2कौशल विकास तथा तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) में सहयोग को सुदृढ़ बनाना: सहयोग को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण सहयोग गठबंधन (ब्रिक्स-टीसीए) की भूमिका को मान्यता दी गई, जिसमें आगामी द्विवार्षिक प्रगति रिपोर्ट तथा सतत कौशल पहलों के संकलन का प्रकाशन भी शामिल है। घोषणा में इच्छुक ब्रिक्स सदस्य देशों की स्वैच्छिक भागीदारी के साथ अंतरराष्ट्रीय कौशल अंतराल अध्ययन (इंटरनेशनल स्किल गैप स्टडी) संचालित करने की भारत की पहल का भी उल्लेख किया गया।

3. अनुसंधान, नवाचार तथा स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना: संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने, शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, नैतिक तथा मानव-केन्द्रित उपयोग को प्रोत्साहित करने, नवाचार-संचालित उद्यमिता को सुदृढ़ बनाने तथा उच्च शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की गई।

4. योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू) को आगे बढ़ाना: योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए कार्य समूह की बैठकें आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की गई, ताकि शैक्षणिक गतिशीलता और सहयोग को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

5. शैक्षणिक नेतृत्व तथा संस्थागत विकास के लिए क्षमता निर्माण को सुदृढ़ बनाना: ब्रिक्स रेक्टर्स फोरम का नियमित आयोजन, संकाय एवं नेतृत्व आदान-प्रदान कार्यक्रम, स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित) पर विशेष बल देने वाली छात्रवृत्ति योजनाओं तथा ब्रिक्स विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग एवं मूल्यांकन प्रणाली की दिशा में प्रारंभिक अन्वेषणात्मक कार्य को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

बैठक में पारंपरिक एवं देशज ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने संबंधी ब्रिक्स के मार्गदर्शक सिद्धांतों (ब्रिक्स गाइडिंग प्रिंसिपल्स ऑन स्ट्रेंथेनिंग एकेडमिक कोलैबोरेशन ऑन ट्रेडिशनल एंड इंडिजिनस नॉलेज सिस्टम्स) पर भारत की पहल का भी स्वागत किया गया। साथ ही यह सुझाव दिया गया कि ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय पारंपरिक एवं देशज ज्ञान प्रणालियों को एक अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय विषयगत समूह (इंटरनेशनल थीमैटिक ग्रुप) के रूप में शामिल करने पर विचार कर सकता है।

शिक्षा मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत 5 अगस्त, 2026 को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (एसओएम) का भी आयोजन किया। बैठक के दौरान हुई चर्चाओं में अधिक सहयोग, नवाचार तथा ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से समावेशी, सुदृढ़ एवं भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों को आगे बढ़ाने के प्रति सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की गई।

भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करता रहेगा, जिसका समापन 12–13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

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