Friday, February 20, 2026
BREAKING
Weather: गुजरात में बाढ़ से हाहाकार, अब तक 30 लोगों की मौत; दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश की चेतावनी जारी दैनिक राशिफल 13 अगस्त, 2024 Hindenburg Research Report: विनोद अदाणी की तरह सेबी चीफ माधबी और उनके पति धवल बुच ने विदेशी फंड में पैसा लगाया Hindus in Bangladesh: मर जाएंगे, बांग्लादेश नहीं छोड़ेंगे... ढाका में हजारों हिंदुओं ने किया प्रदर्शन, हमलों के खिलाफ उठाई आवाज, रखी चार मांग Russia v/s Ukraine: पहली बार रूसी क्षेत्र में घुसी यूक्रेनी सेना!, क्रेमलिन में हाहाकार; दोनों पक्षों में हो रहा भीषण युद्ध Bangladesh Government Crisis:बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट, सेना की कार्रवाई में 56 की मौत; पूरे देश में अराजकता का माहौल, शेख हसीना के लिए NSA डोभाल ने बनाया एग्जिट प्लान, बौखलाया पाकिस्तान! तीज त्यौहार हमारी सांस्कृतिक विरासत, इन्हें रखें सहेज कर- मुख्यमंत्री Himachal Weather: श्रीखंड में फटा बादल, यात्रा पर गए 300 लोग फंसे, प्रदेश में 114 सड़कें बंद, मौसम विभाग ने 7 अगस्त को भारी बारिश का जारी किया अलर्ट Shimla Flood: एक ही परिवार के 16 सदस्य लापता,Kedarnath Dham: दो शव मिले, 700 से अधिक यात्री केदारनाथ में फंसे Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी की सब-कैटेगरी में आरक्षण को दी मंज़ूरी

संपादकीय

BJP tsunami in Haryana municipal elections!: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की नीतियों और रणनीतियों के चलते हरियाणा नगर निकाय चुनावों में भाजपा की सुनामी! 10 में से 9 सीटों पर कब्ज़ा

March 12, 2025 07:28 PM

भुपेंद्र शर्मा, मुख्य संपादक , सिटी दर्पण, चंडीगढ़ 

जी हां भाजपा के कद्दावर नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की नीतियों और रणनीतियों के चलते हरियाणा नगर निकाय चुनावों के परिणामों में भाजपा की सुनामी आ गई लगती है। भाजपा ने 10 में से 9 सीटों पर कब्ज़ा हासिल कर जीत का अनूठा परचम लहराया है। इन चुनाव परिणामों से गदगद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जनता का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार प्रदेश के हर नागरिक के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ अब पहले से अधिक तेज गति से विकास कार्य करेगी और हरियाणा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।हरियाणा में हुए इन नगर निकाय चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवारों ने कई बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की। फरीदाबाद में प्रवीन जोशी, हिसार में प्रवीन पोपली, करनाल में रेणुबाला गुप्ता, पानीपत में कोमल सैनी, रोहतक में रामअवतार वाल्मीकि, यमुनानगर में सुमन बहमनी, सोनीपत में राजीव जैन, अंबाला में सैलदा सचदेवा और गुरुग्राम में राजरानी मल्होत्रा ने बीजेपी का परचम लहराया। हरियाणा के नगर निकाय चुनावों की एक विशेषता यह रही कि इनमें महिलाओं ने बड़ी संख्या में जीत दर्ज की। 10 में से 7 नगर निगमों में महिला मेयर चुनी गईं, जो महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। यह सफलता बीजेपी के लिए न केवल राजनीतिक जीत है, बल्कि समाज में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा देती है। गौरतलब है कि यह जीत पार्टी के लिए इस वर्ष की चौथी बड़ी सफलता है, जिससे साफ जाहिर होता है कि जनता का भरोसा बीजेपी पर लगातार बना हुआ है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और छत्तीसगढ़ के स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था। इन राज्यों में पहले से ही बीजेपी की सरकार थी और इन नगर निकाय चुनावों में जीत के बाद अब इसे ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ कहा जा सकता है, जहां केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों में बीजेपी की सत्ता है। आइए जानते हैं भाजपा की इस जीत के प्रमुख कारणों के बारे में।  यह सच है कि भाजपा ने हरियाणा में अपने संगठन को लगातार मजबूत किया है। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की तैनाती और माइक्रो-मैनेजमेंट ने चुनावी रणनीति को कारगर बनाया। यही वजह है कि  हरियाणा के प्रमुख नगर निगमों - फरीदाबाद, हिसार, रोहतक, करनाल, यमुनानगर, गुरुग्राम और मानेसर में 2 मार्च को चुनाव हुए थे, जबकि अंबाला और सोनीपत में मेयर पद का उपचुनाव भी उसी दिन कराया गया था। इसके अतिरिक्त, 21 नगर पालिकाओं के लिए भी इसी दिन मतदान हुआ, जबकि पानीपत नगर पालिका के लिए 9 मार्च को वोट डाले गए थे। मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कई विकास योजनाएं चलाईं, जिनमें सुशासन, पारदर्शिता, और भ्रष्टाचार पर लगाम शामिल है। जनता ने सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया, जिसका फायदा भाजपा को मिला। दूसरी ओर हरियाणा में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल), में आंतरिक कलह और गुटबाजी देखने को मिली। कमजोर संगठन और स्पष्ट नेतृत्व की कमी के कारण विपक्ष प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाएं, जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, और आयुष्मान भारत, सीधे आम जनता तक पहुंची हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाने वाले मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। इन चुनावों में भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के मुद्दों को प्रमुखता दी। यह रणनीति शहरी क्षेत्रों में भाजपा के कोर वोट बैंक को मजबूत करने में मददगार साबित हुई। भाजपा ने स्थानीय लोकप्रिय नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा, जिससे मतदाताओं के बीच विश्वास बढ़ा। इसके अलावा, सोशल मीडिया और ग्राउंड-लेवल प्रचार के जरिए मतदाताओं तक भाजपा की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया। गर हम अन्य राज्यों में भी बीजेपी के जलवे की बात करें तो पायेंगे कि इस साल जनवरी में उत्तराखंड में हुए चुनावों में बीजेपी ने 11 में से 10 नगर निगमों में जीत दर्ज की थी। देहरादून, ऋषिकेश, कोटद्वार, पिथौरागढ़, हल्द्वानी, काशीपुर, अल्मोड़ा, हरिद्वार, रुड़की और रुद्रपुर में बीजेपी उम्मीदवारों को सफलता मिली थी, जबकि कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इसके बाद गुजरात में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी बीजेपी ने अपना दबदबा बनाए रखा। जूनागढ़ महानगरपालिका सहित 68 में से 60 नगर पालिकाओं और सभी तीन तालुका पंचायतों में बीजेपी विजयी रही। वहीं, कांग्रेस केवल देवभूमि द्वारका जिले की सलाया नगर पालिका में जीत दर्ज कर पाई थी। समाजवादी पार्टी ने भी दो नगर पालिकाओं में जीत हासिल की थी। गुजरात के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी ने अपनी जीत का परचम लहराया। वहां के 10 नगर निगम, 49 नगर पालिका परिषद और 114 नगर पंचायतों में चुनाव हुए थे, जिनमें बीजेपी ने महापौर की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, नगर पालिका की 35 सीटों और नगर पंचायत की 114 सीटों पर भी बीजेपी विजयी रही। कांग्रेस को सिर्फ आठ नगर पालिका सीटों पर जीत मिली थी। अगर हम विपक्ष की परफार्मेंस पर गौर करें तो हरियाणा नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पार्टी किसी भी नगर निगम में जीत दर्ज नहीं कर पाई। यहां तक कि कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले रोहतक में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव क्षेत्र में कांग्रेस के सूरजमल किलोई को बीजेपी प्रत्याशी ने 45,000 से अधिक वोटों से हराया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा जो सिरसा से सांसद हैं, वहां भी पार्टी को हार मिली। सिरसा नगर परिषद में भी बीजेपी विजयी रही। यह दर्शाता है कि जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है और बीजेपी पर ही अपना भरोसा जताया है। अंत में कह सकते हैं कि हरियाणा के नगर निकाय चुनावों में भाजपा की शानदार जीत इस बात को दर्शाती है कि पार्टी की रणनीति और शासन की नीतियां जनता के बीच प्रभावी साबित हुई हैं।

Have something to say? Post your comment

और संपादकीय समाचार

   अरुणाचल के करीब चीन की परमाणु तैयारी? एशिया की सुरक्षा पर मंडराने लगे खतरे के बादल

अरुणाचल के करीब चीन की परमाणु तैयारी? एशिया की सुरक्षा पर मंडराने लगे खतरे के बादल

हर हाथ में फोन, हर युवा क्रिएटर — भारत की क्रिएटर इकॉनमी का बड़ा धमाका

हर हाथ में फोन, हर युवा क्रिएटर — भारत की क्रिएटर इकॉनमी का बड़ा धमाका

खाली खाते की भारी कीमत ! पांच साल में बैंकों ने कमाए साढ़े आठ हजार करोड़

खाली खाते की भारी कीमत ! पांच साल में बैंकों ने कमाए साढ़े आठ हजार करोड़

सड़क से आसमान तक: असम में 4.2 किमी की इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का बड़ा संदेश

सड़क से आसमान तक: असम में 4.2 किमी की इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का बड़ा संदेश

‘सेवा तीर्थ’ से नई शुरुआत: किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए पीएम के बड़े संदेश ने जगाई उम्मीदें

‘सेवा तीर्थ’ से नई शुरुआत: किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए पीएम के बड़े संदेश ने जगाई उम्मीदें

3.25 लाख करोड़ का मेगा डिफेंस डील — 114 राफेल और 6 P-8I से बढ़ेगी भारत की मारक ताकत

3.25 लाख करोड़ का मेगा डिफेंस डील — 114 राफेल और 6 P-8I से बढ़ेगी भारत की मारक ताकत

विकसित भारत@2047 की ओर बड़ा कदम: योगी सरकार का अब तक का सबसे विजनरी बजट पेश

विकसित भारत@2047 की ओर बड़ा कदम: योगी सरकार का अब तक का सबसे विजनरी बजट पेश

सड़क नहीं, अब आसमान से होगा सफर: दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी शुरु करने की कवायद जारी, इसके फायदे और नुकसान दोनों ही मौजूद

सड़क नहीं, अब आसमान से होगा सफर: दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी शुरु करने की कवायद जारी, इसके फायदे और नुकसान दोनों ही मौजूद

   इंडिया–यूएस डील: क्या भारत अब वैश्विक राजनीति का गेम चेंजर बनने जा रहा है?

इंडिया–यूएस डील: क्या भारत अब वैश्विक राजनीति का गेम चेंजर बनने जा रहा है?

 इंडिया–यूएस ट्रेड डील: भारत के लिए सुनहरा मौका या अंतर्राष्ट्रीय कानून की नई चुनौती?

इंडिया–यूएस ट्रेड डील: भारत के लिए सुनहरा मौका या अंतर्राष्ट्रीय कानून की नई चुनौती?

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss