Sunday, February 15, 2026
BREAKING
Weather: गुजरात में बाढ़ से हाहाकार, अब तक 30 लोगों की मौत; दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश की चेतावनी जारी दैनिक राशिफल 13 अगस्त, 2024 Hindenburg Research Report: विनोद अदाणी की तरह सेबी चीफ माधबी और उनके पति धवल बुच ने विदेशी फंड में पैसा लगाया Hindus in Bangladesh: मर जाएंगे, बांग्लादेश नहीं छोड़ेंगे... ढाका में हजारों हिंदुओं ने किया प्रदर्शन, हमलों के खिलाफ उठाई आवाज, रखी चार मांग Russia v/s Ukraine: पहली बार रूसी क्षेत्र में घुसी यूक्रेनी सेना!, क्रेमलिन में हाहाकार; दोनों पक्षों में हो रहा भीषण युद्ध Bangladesh Government Crisis:बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट, सेना की कार्रवाई में 56 की मौत; पूरे देश में अराजकता का माहौल, शेख हसीना के लिए NSA डोभाल ने बनाया एग्जिट प्लान, बौखलाया पाकिस्तान! तीज त्यौहार हमारी सांस्कृतिक विरासत, इन्हें रखें सहेज कर- मुख्यमंत्री Himachal Weather: श्रीखंड में फटा बादल, यात्रा पर गए 300 लोग फंसे, प्रदेश में 114 सड़कें बंद, मौसम विभाग ने 7 अगस्त को भारी बारिश का जारी किया अलर्ट Shimla Flood: एक ही परिवार के 16 सदस्य लापता,Kedarnath Dham: दो शव मिले, 700 से अधिक यात्री केदारनाथ में फंसे Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी की सब-कैटेगरी में आरक्षण को दी मंज़ूरी

संपादकीय

सड़क से आसमान तक: असम में 4.2 किमी की इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का बड़ा संदेश

February 14, 2026 06:29 PM

पूर्वोत्तर भारत में सामरिक और नागरिक अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों के बीच असम में राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से पर लगभग 4.2 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का निर्माण एक दूरदर्शी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। यह परियोजना केवल इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि सुरक्षा तैयारी, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सड़कों को इस प्रकार बहुउद्देश्यीय बनाना उस बदलते नीति दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें परिवहन ढांचे को रक्षा जरूरतों और नागरिक सुरक्षा के साथ एकीकृत किया जा रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यह पहल विशेष महत्व रखती है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरे इस क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और संसाधनों की तेजी से तैनाती अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। ऐसे में राजमार्ग पर विकसित लैंडिंग स्ट्रिप संकट या आपात स्थिति में सैन्य विमानों के संचालन के लिए वैकल्पिक मंच प्रदान करती है। इससे न केवल प्रतिक्रिया समय घटेगा, बल्कि संवेदनशील परिस्थितियों में हवाई समर्थन सुनिश्चित करना भी आसान होगा। इस परियोजना के माध्यम से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ढांचागत निवेश अब केवल सीमित सैन्य परिसरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नागरिक संरचनाओं के साथ समन्वित रूप से विकसित किए जा रहे हैं। इस परियोजना को साकार करने में विभिन्न एजेंसियों का तालमेल महत्वपूर्ण रहा है। तकनीकी मानकों और परिचालन सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भारतीय वायु सेना की विशेषज्ञता निर्णायक रही, जबकि सड़क निर्माण और संरचनात्मक गुणवत्ता सुनिश्चित करने में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने प्रमुख भूमिका निभाई। यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण दर्शाता है कि सार्वजनिक अवसंरचना के विकास में संस्थागत समन्वय किस प्रकार प्रभावी परिणाम दे सकता है। सामान्य परिस्थितियों में यह मार्ग यातायात के लिए उपयोगी रहेगा, जबकि आपात स्थिति में हवाई परिचालन के लिए सक्रिय किया जा सकेगा। भारत में राजमार्गों को वैकल्पिक हवाई पट्टियों के रूप में विकसित करने का विचार नया नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे व्यवस्थित रूप से अपनाया जा रहा है। इससे पहले राजस्थान और उत्तर प्रदेश में राजमार्गों पर निर्मित लैंडिंग स्ट्रिप्स ने यह साबित किया है कि सड़क अवसंरचना का ऐसा उपयोग न केवल व्यावहारिक है बल्कि रणनीतिक रूप से लाभकारी भी है। इन प्रयोगों से प्राप्त अनुभवों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस तरह की परियोजनाओं के विस्तार को प्रोत्साहित किया है। संपादकीय दृष्टिकोण से देखें तो इस पहल का महत्व सैन्य जरूरतों से कहीं आगे तक फैला हुआ है। पूर्वोत्तर क्षेत्र अक्सर बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होता रहा है। ऐसी परिस्थितियों में जब हवाई अड्डे क्षतिग्रस्त हो जाएं या पहुंच से बाहर हों, तब राजमार्ग पर मौजूद लैंडिंग स्ट्रिप राहत और बचाव कार्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी। आपदा प्रबंधन के लिहाज से यह ढांचा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करेगा और मानव जीवन की रक्षा में सहायक सिद्ध हो सकता है। हालांकि, इस प्रकार की परियोजनाओं के साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। राजमार्ग पर विमानों के संचालन के दौरान यातायात प्रबंधन, सुरक्षा मानकों का पालन और स्थानीय आबादी को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, नियमित रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि संरचना हमेशा उपयोग के लिए तैयार रहे। पर्यावरणीय प्रभावों, विशेषकर ध्वनि प्रदूषण और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन और संतुलन बनाना भी नीति-निर्माताओं की जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसके सकारात्मक प्रभावों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो ऐसी परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास को भी गति दे सकती हैं। रणनीतिक महत्व के ढांचागत निवेश से परिवहन नेटवर्क मजबूत होता है, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ती हैं और रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं। पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक समावेशन की मांग करता रहा है। इस दृष्टि से यह पहल केवल सुरक्षा ढांचे का विस्तार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और विकास के नए अवसरों की संभावना भी प्रस्तुत करती है। नीतिगत स्तर पर यह आवश्यक है कि इस परियोजना को केवल प्रतीकात्मक उपलब्धि के रूप में न देखा जाए। इसके संचालन, रखरखाव और प्रशिक्षण से जुड़े पहलुओं के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करना अनिवार्य है। नियमित अभ्यास और संस्थागत समन्वय से ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि संकट के समय यह ढांचा प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। भविष्य में अन्य क्षेत्रों में इस मॉडल को लागू करते समय इससे प्राप्त अनुभवों को साझा करना और सुधारात्मक कदम उठाना भी उतना ही जरूरी होगा। समग्र रूप से देखा जाए तो असम में राष्ट्रीय राजमार्ग पर इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का निर्माण उस व्यापक सोच का प्रतीक है जिसमें विकास, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को एकीकृत रूप में देखा जा रहा है। यह पहल बताती है कि आधुनिक अवसंरचना अब केवल सुविधा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय क्षमता और तैयारी को भी सुदृढ़ करती है। यदि इसे पारदर्शिता, दूरदर्शिता और सतत निगरानी के साथ आगे बढ़ाया गया, तो यह मॉडल देश के अन्य हिस्सों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है और सड़क व हवाई नेटवर्क के समन्वय से राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है। यदि आप चाहें तो मैं इसी लेख के लिए एस ई ओ शीर्षक और कीवर्ड्स भी तैयार कर सकता हूँ।

Have something to say? Post your comment

और संपादकीय समाचार

‘सेवा तीर्थ’ से नई शुरुआत: किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए पीएम के बड़े संदेश ने जगाई उम्मीदें

‘सेवा तीर्थ’ से नई शुरुआत: किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए पीएम के बड़े संदेश ने जगाई उम्मीदें

3.25 लाख करोड़ का मेगा डिफेंस डील — 114 राफेल और 6 P-8I से बढ़ेगी भारत की मारक ताकत

3.25 लाख करोड़ का मेगा डिफेंस डील — 114 राफेल और 6 P-8I से बढ़ेगी भारत की मारक ताकत

विकसित भारत@2047 की ओर बड़ा कदम: योगी सरकार का अब तक का सबसे विजनरी बजट पेश

विकसित भारत@2047 की ओर बड़ा कदम: योगी सरकार का अब तक का सबसे विजनरी बजट पेश

सड़क नहीं, अब आसमान से होगा सफर: दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी शुरु करने की कवायद जारी, इसके फायदे और नुकसान दोनों ही मौजूद

सड़क नहीं, अब आसमान से होगा सफर: दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी शुरु करने की कवायद जारी, इसके फायदे और नुकसान दोनों ही मौजूद

   इंडिया–यूएस डील: क्या भारत अब वैश्विक राजनीति का गेम चेंजर बनने जा रहा है?

इंडिया–यूएस डील: क्या भारत अब वैश्विक राजनीति का गेम चेंजर बनने जा रहा है?

 इंडिया–यूएस ट्रेड डील: भारत के लिए सुनहरा मौका या अंतर्राष्ट्रीय कानून की नई चुनौती?

इंडिया–यूएस ट्रेड डील: भारत के लिए सुनहरा मौका या अंतर्राष्ट्रीय कानून की नई चुनौती?

खेती से टेक्नोलॉजी तक: अमेरिका से ट्रेड डील ने भारत पहुंचा बड़ा फायदा

खेती से टेक्नोलॉजी तक: अमेरिका से ट्रेड डील ने भारत पहुंचा बड़ा फायदा

   एक फिल्म, कई सवाल: ‘घूसखोर पंडत’ पर FIR और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर बहस तेज

एक फिल्म, कई सवाल: ‘घूसखोर पंडत’ पर FIR और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर बहस तेज

Youthful enthusiasm vs. political inertia: A clash between the new generation of the BJP and the aging Congress leadership: युवा जोश बनाम सियासी जड़ता: भाजपा की नई पीढ़ी और कांग्रेस के बुजुर्ग नेतृत्व की टक्कर

Youthful enthusiasm vs. political inertia: A clash between the new generation of the BJP and the aging Congress leadership: युवा जोश बनाम सियासी जड़ता: भाजपा की नई पीढ़ी और कांग्रेस के बुजुर्ग नेतृत्व की टक्कर

The world is watching Delhi's toxic air: Foreign advisories and the Beijing model have raised concerns.: दिल्ली की जहरीली हवा पर दुनिया की नजर: विदेशी एडवाइजरी और बीजिंग मॉडल ने बढ़ाई चिंता

The world is watching Delhi's toxic air: Foreign advisories and the Beijing model have raised concerns.: दिल्ली की जहरीली हवा पर दुनिया की नजर: विदेशी एडवाइजरी और बीजिंग मॉडल ने बढ़ाई चिंता

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss