अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संकट को लेकर एक नई कूटनीतिक पहल की है। उन्होंने प्रस्तावित ‘गाजा पीस बोर्ड’ के गठन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को भी आमंत्रण भेजा है। इस कदम को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
गाजा पट्टी में लंबे समय से जारी हिंसा, मानवीय संकट और अस्थिरता ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप की यह पहल सामने आई है, जिसमें वे अमेरिका के साथ-साथ रूस और यूरोप को एक साझा मंच पर लाकर समाधान तलाशने की बात कर रहे हैं। ट्रंप समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य सैन्य टकराव के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक रास्ते से शांति बहाल करना है।
सूत्रों के मुताबिक, गाजा पीस बोर्ड का प्रस्ताव एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में रखा गया है, जहां प्रमुख वैश्विक शक्तियां, क्षेत्रीय हितधारक और मानवीय संगठनों के प्रतिनिधि मिलकर स्थायी समाधान पर चर्चा कर सकें। इसमें युद्धविराम, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
रूस और यूरोपीय संघ को न्योता भेजना अपने आप में अहम माना जा रहा है। रूस लंबे समय से पश्चिम एशिया में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है, जबकि यूरोपीय संघ गाजा में मानवीय सहायता और कूटनीतिक प्रयासों का बड़ा भागीदार है। ऐसे में इन दोनों को साथ लाने की कोशिश से इस पहल को वैश्विक समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गाजा जैसे जटिल मुद्दे पर केवल बोर्ड या समिति बनाना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती यह होगी कि क्या सभी पक्ष इस मंच को स्वीकार करते हैं और क्या जमीन पर हालात सुधारने के लिए ठोस फैसले लिए जा सकेंगे। खासकर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में शामिल पक्षों की सहमति इस पहल की सफलता के लिए निर्णायक होगी।
यूरोपीय संघ की ओर से फिलहाल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि ब्रसेल्स इस प्रस्ताव को गंभीरता से परख रहा है। वहीं रूस की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हैं, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद मास्को और पश्चिमी देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में गाजा पीस बोर्ड एक ऐसा मंच बन सकता है, जहां वैश्विक मतभेदों के बावजूद साझा मानवीय मुद्दों पर सहयोग संभव हो।
कुल मिलाकर, ट्रंप की यह पहल गाजा संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया मोड़ ला सकती है। अगर यह प्रस्ताव केवल राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कार्ययोजना में बदलता है, तो इससे क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी रह सकती है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आमंत्रित देश कितनी गंभीरता से इसमें भाग लेते हैं और क्या वे संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाते हैं।