अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी इमीग्रेशन कार्रवाई और विदेश नीति रुख ने दुनियाभर में विवाद को हवा दे दी है। ट्रंप के इमीग्रेशन और सुरक्षा-आधारित कदमों ने न केवल अमेरिका के भीतर सामाजिक तनाव को बढ़ाया है, बल्कि क्यूबा, कनाडा और ब्रिटेन जैसे दोस्तों और सहयोगियों के साथ रिश्तों को भी कसौटी पर खड़ा कर दिया है।
हाल के हफ्तों में ट्रंप प्रशासन ने इमीग्रेशन नीतियों को कठोर दिशा देते हुए अप्रवासियों के खिलाफ व्यापक क्रैकडाउन लागू किया है, जिसमें सीमा शुल्क और इमीग्रेशन एजेंट्स (ICE) की कार्रवाई को तेज किया गया है। इस कार्रवाई के खिलाफ अमेरिका के कई हिस्सों में जनता ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए हैं, जिसमें हजारों लोगों ने न्यूयॉर्क जैसे शहरों में “डिमानिश ICE” और “नो ICE, नो KKK” जैसे नारे लगाए। यह विरोध प्रदर्शन इमीग्रेशन नीतियों के खिलाफ बढ़ते सामाजिक असंतोष का रूप ले चुका है।
ट्रंप की नीतियों ने क्यूबा समेत कई देशों के साथ व्यापार और सुरक्षा संबंधों को भी प्रभावित किया है। उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके यह घोषणा की है कि क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है, जिसे वह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हैं। ट्रंप का कहना है कि क्यूबा “अमेरिका के लिए गंभीर खतरा” बन चुका है और ऐसे देशों से जुड़ी आपूर्ति पर शुल्क लगाने का कदम उठाया जाएगा।
कनाडा के साथ रिश्ते भी तनावपूर्ण हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा ने व्यापारिक विवाद का समाधान नहीं किया और अमेरिकी नियमों के अनुरूप कदम नहीं उठाए, तो कनाडाई विमानों पर अमेरिका में 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यह कदम कनाडा की विमानन नीतियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के रूप में उठाया जाएगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि ऐसे कदमों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को भी कड़ी प्रतिक्रिया देने पर मजबूर किया है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की है।