दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में 30 जनवरी 2026 से मौसम फिर करवट लेने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 31 जनवरी और 1 फरवरी को दिल्ली में दो दिन लगातार बारिश के मजबूत संकेत हैं, जिससे राजधानी सहित आसपास के इलाकों में मौसम काफी परिवर्तनशील रहेगा।
IMD के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) 30 जनवरी की रात से उत्तर-पश्चिम भारत तक सक्रिय रहेगा, और इसके प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश तथा हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का मौसम बनेगा।
विशेष रूप से दिल्ली में 31 जनवरी (शनिवार) और 1 फरवरी (रविवार) को बादल छाए रहने के साथ बारिश और गरज-चमक की संभावनाएं जताई गई हैं। अगले दो दिनों में दिल्ली-NCR के आसमान में बादलों की बढ़ती गतिविधि के साथ तेज़ हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) और हल्की से मध्यम वर्षा का अनुमान मौसम विशेषज्ञों ने लगाया है, जिससे तापमान में गिरावट के साथ आंशिक रूप से मौसम ठंडा और नम रहेगा।
पंजाब और हरियाणा में मौसम की बदली तस्वीर
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मौसम विभाग ने घने कोहरे का अलर्ट भी जारी किया है, खासकर पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में सुबह-शाम के समय कम दृश्यता और कोहरे की स्थिति बने रहने की चेतावनी दी है। यह कोहरा वायु मार्ग संबंधी परिचालन और सड़क यातायात को प्रभावित कर सकता है, इसलिए यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में शीतलहर और घने कोहरे का असर जारी है, जिससे न्यूनतम तापमान काफी नीचे बने हुए हैं। IMD की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान लगभग 5–7°C के आसपास है, जबकि हरियाणा में कुछ क्षेत्रों में यह 4°C तक गिरा हुआ देखा गया है। कम हवा के कारण प्रदूषण भी सतही पर जमा हो रहा है और वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित है।
राजस्थान में मौसम की हलचल
राजस्थान के मैदानी इलाकों में भी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते बादलों की गतिविधि बढ़ने की संभावना है। यह बदलाव स्थानीय तापमान को प्रभावित कर सकता है और कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें भी देखने को मिल सकती हैं। IMD ने कहा है कि उत्तर-पश्चिम भारत के विस्तृत क्षेत्र में यह मौसम प्रणाली कम-से-कम 2 फरवरी तक सक्रिय रहने के आसार हैं।
पहाड़ियों में बर्फबारी और यातायात प्रभावित
पश्चिमी विक्षोभ का असर उच्च पर्वतीय इलाकों तक भी पहुंच रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ ऊँचे इलाके में इस प्रणाली के कारण बर्फबारी जारी रह सकती है, जिससे सड़कों पर यातायात प्रभावित हो सकता है और यात्रा योजनाओं में बदलाव आ सकता है।
जनजीवन और सुरक्षा पर संभावित असर
बारिश और बर्फबारी से बनने वाले खराब मौसम से सड़क यात्रा प्रभावित हो सकती है, खासकर सुबह-शाम के समय कोहरे और कम तापमान के संयोजन के कारण दृश्यता कम रहेगी। वहीं, बारिश के दौरान जल जमाव के कारण लोकल सड़कों और NCR के भीतरी इलाकों में ट्रैफिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। नागरिकों को यह सलाह दी जा रही है कि वे मौसम अपडेट नियमित रूप से देखें और आवश्यकता पड़ने पर यात्रा समय में बदलाव करें।
जलवायु के व्यापक संकेत
इस मौसम परिवर्तन का एक बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता है, जो ठंडी वायु को दक्षिण-पूर्वी दिशा में लाती है और मैदानी इलाकों में बादलों तथा वर्षा-तत्वों को प्रोत्साहित करती है। इस प्रणाली के चलते बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का मिलाजुला अनुभव बनने की संभावना है, जिस पर मौसम विशेषज्ञों की निगाह बनी हुई है।
शीतलहर और तापमान का प्रभाव
उत्तर भारत में शीतलहर और ठंड के कारण न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। IMD के आंकड़ों के अनुसार पंजाब-हरियाणा में ठंड की स्थिति अधिक तीव्र बनी हुई है, और इसी ठंड के साथ घने कोहरे का मिलाजुला प्रभाव मौसम के अस्थिर स्वरूप को और बढ़ा रहा है।
मुख्य निष्कर्ष और सुझाव:
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31 जनवरी और 1 फरवरी को दिल्ली-NCR में बारिश की संभावना मजबूत है।
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पंजाब-हरियाणा-राजस्थान समेत उत्तरी राज्यों में बादल, कोहरा और ठंडे मौसम का असर जारी रहेगा।
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पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के साथ मौसम अस्थिर रहने के कारण यात्रियों को सतर्कता बरतने की सलाह है।
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नागरिकों को मौसम अपडेट नियमित रूप से जांचने के साथ यात्रा और बाहरी गतिविधियों की योजना मौसम के मुताबिक बनानी चाहिए।