बजट सत्र 2026 के आरंभ से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद परिसर में देश को संबोधित करते हुए भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में नई गति मिलने का जोरदार संदेश दिया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को सरकार की नीति का अहम लक्ष्य बताते हुए कहा कि यह बजट सत्र उसी लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संसद के बजट सत्र से पहले पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिभाषण 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जिसने देश के संकल्प का मार्गदर्शन तय किया है। उन्होंने कहा कि यह सत्र विकसित भारत 2047 की दिशा को और मजबूती देने वाला होगा।
प्रधानमंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि देश अब 21वीं सदी का एक-चौथाई हिस्सा पार कर चुका है और अगले 25 वर्ष भारत के विकास की दिशा तय करेंगे। उन्होंने यह वक्तव्य देते हुए कहा कि विकसित भारत की यात्रा सिर्फ एक नीतिगत बयान नहीं है, बल्कि देश के युवाओं की आकांक्षा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का जोर
मोदी ने कहा कि सरकार “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर तेज़ी से आगे बढ़ रही है और इस यात्रा को और गति देना सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बजट सत्र के दौरान संसद में देश को आगे बढ़ाने वाले कई निर्णयों और नीति प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने भविष्योन्मुखी नीतियों पर भी बल देते हुए कहा कि सरकार लंबे समय से अटके मुद्दों को समाधान की दिशा में ले जाने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ कागज़ पर सुधार करना नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी तक सरकार की नीतियों का असर पहुँचाना है।
मोदी ने कहा कि जहाँ देश की नजर बजट पर टिकी है, वहीं सरकार का मूल मंत्र सुधार, प्रदर्शन और बदलाव (Reform, Perform & Transform) है। इसका लक्ष्य आर्थिक और सामाजिक ढांचे को ऐसा बनाना है जो देश को विकसित भारत की ओर अग्रसर करे।
वैश्विक स्तर पर भारत की छवि
प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड समझौता का जिक्र करते हुए कहा कि इस समझौते से भारतीय उत्पादों और सेवाओं को वैश्विक बाजारों में अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय भारत की आर्थिक और लोकतांत्रिक क्षमताओं का स्वागत कर रहा है, जो भारत को विश्व मंच पर एक आकर्षण का केंद्र बनाता है।
मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय निर्माता इस समझौते का लाभ उठाकर विश्व स्तर पर अपनी उपस्थिति को विस्तार देंगे और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देंगे, जिससे देश का वैश्विक प्रभाव और बढ़ेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की भूमिका
प्रधानमंत्री ने बजट सत्र से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीतारमण लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश कर रही हैं, जो भारतीय संसदीय इतिहास में एक गौरवशाली उपलब्धि है। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक निर्णयों में स्थिरता और अनुभव दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
संसद सत्र में उम्मीदें और अपेक्षाएँ
बजट सत्र के दौरान आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया गया, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य की दिशा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। बजट के मुख्य घटकों और प्रस्तावों पर ध्यान केंद्रित रहते हुए संसद में वित्तीय और सामाजिक योजनाओं पर व्यापक बहस होने की उम्मीद जतायी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना और भिन्न विचार स्वाभाविक हैं, लेकिन देश की प्रगति और विकास को प्राथमिकता देकर समाधान ढूँढना ही इस सत्र का मूल उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने सांसदों से निर्माणशील योगदान देने का आह्वान किया ताकि सरकार की योजनाएँ *आख़िरी ज़मीन तक पहुँच सकें।
विकसित भारत 2047: नया मील का पत्थर
प्रधानमंत्री की यह चर्चा विकसित भारत 2047 के संकल्प पर केंद्रित थी — एक ऐसा लक्ष्य जो आजादी के 100 वर्ष के अवसर पर देश को एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का संकल्प है। प्रधानमंत्री ने इसे सरकार की नीति और जनता की आकांक्षा का साझा लक्ष्य बताया।
उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्ष भारत के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव होंगे और इन वर्षों में नवाचार, गुणवत्ता, निवेश और समावेशन को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस यात्रा को समग्र विकास योजना के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार के आर्थिक विधानों और योजनाओं पर विविध सवाल उठाए, जबकि समर्थकों ने विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में की जा रही पहलों की सराहना की है। यह स्पष्ट है कि बजट सत्र राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन सिर्फ बजट सत्र से पहले का भाषण नहीं था, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर सरकार की नीति, दिशा और आशा का संदेश था। उन्होंने यह संदेश दिया कि यह सत्र देश की विकास यात्रा में एक नई उर्जा और गति ले कर आएगा, और 2047 की दिशा में कदमों को मजबूत करेगा।