देशभर में बैंकिंग कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने अर्थव्यवस्था की गति को बाधित कर दिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सरकारी बैंक कर्मियों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल की, जिससे बैंक शाखाओं में कार्य ठप रहे और कई महत्वपूर्ण वित्तीय गतिविधियाँ प्रभावित हुईं।
हड़ताल के कारण लगभग 8 लाख बैंक कर्मचारियों ने कामकाज से दूरी बनाई और इससे चेक क्लियरेंस सहित कई बैंकिंग सेवाएँ प्रभावित रहीं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुमानों के अनुसार करीब ₹4 लाख करोड़ के चेक और अन्य लेन-देनों का निपटान रुक गया, जिससे व्यापारिक और औद्योगिक भुगतान में अवरोध उत्पन्न हुआ।
ग्राहकों को बैंक ब्रांचों में जमा और निकासी से लेकर चेक क्लियरेंस तक हर तरह की सेवा में दिक्कत का सामना करना पड़ा। कई व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों को बैंकों में निपटान ना होने की वजह से भुगतान में देरी झेलनी पड़ी, जिससे नकदी प्रवाह प्रभावित हुआ और आर्थिक गतिविधियों में रुकावट आई।
इस व्यापक हड़ताल ने व्यापारिक लेन-देन, बिल डिस्काउंटिंग और ट्रेजरी ऑपरेशन जैसी बुनियादी बैंकिंग प्रक्रियाओं को भी ठप कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल कारोबारी व्यवस्था में बाधा आई है, बल्कि छोटे और मध्यम कारोबारियों के वित्तीय साशन पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
वित्तीय बाजार के अलग हिस्सों में भी प्रभाव देखा गया है — लखनऊ जैसे शहरों में स्थानीय स्तर पर ₹2,500 करोड़ के चेक क्लियरेंस प्रभावित हुए, जबकि मध्यप्रदेश जैसे प्रदेशों में बैंक सेवाओं की बंदी से ₹3,000 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित होने की खबरें आईं।
दूसरी ओर, शेयर बाजार और कुछ कॉर्पोरेट क्षेत्रों में मिश्रित परिणाम देखने को मिले हैं। मैरिको लिमिटेड ने अपनी दिसंबर तिमाही में ₹460 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 13.3 % अधिक है। कंपनी की सालाना आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक हड़ताल ने वित्तीय बाजार और लेन-देन को अल्पकालिक रूप से प्रभावित किया है, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी जल्दी बैंकिंग सेवाएँ सामान्य रूप से बहाल होती हैं और कर्मचारियों तथा प्रबंधन के बीच विवाद का समाधान होता है।