यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष इस सर्दी में नए मानवीय संकट की तरफ बढ़ रहा है। हाल के रूसी एयर और ड्रोन हमलों ने यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली और बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया है, जिससे लगभग 12 लाख लोगों की जिंदगी माइनस 10°C के भीषण तापमान, बिजली कटौती और हीटिंग सिस्टम के ठप होने के कारण मुश्किलों में फँस गई है।
रूस ने जनवरी के मध्य और पिछले हफ्ते भी Kyiv समेत कई बड़े शहरों में ऊर्जा उत्पादन और वितरक प्रणालियों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए। ये हमले स्थानीय बिजली ग्रिड, हीटिंग संयंत्रों और पानी की आपूर्ति तक को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे घरेलू ताप और बिजली सेवाओं में व्यापक कटौती हुई है।
जहां पूरा देश जमी हुई सड़कों और घरों में -10 डिग्री सेल्सियस की भयानक ठंड का सामना कर रहा है, वहीं कई इलाकों में हीटिंग सिस्टम तोड़ दिए जाने के बाद तापसीमाएँ और गिरती जा रही हैं। राजधानी Kyiv में ही लगभग 6,000 से अधिक इमारतें बिना गर्मी के रह गईं, और नागरिकों को हीटर, अल्टरनेट बिजली स्रोत और सामुदायिक ताप केन्द्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
हमले की तीव्रता इतनी है कि आपूर्ति प्रणाली का आधा हिस्सा या उससे अधिक प्रभावित हो चुका है, जिससे ऊर्जा बुनियादी ढांचे की मरम्मत और बहाली कठिन हो गई है। बिजली और गर्म पानी की कमी के कारण बुजुर्ग, बच्चे और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, और जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष बढ़ता जा रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और मानवीय सहायता की अपील जारी की है, ताकि ये हमले रोके जा सकें और नागरिकों की सुरक्षा बेहतर हो। उन्होंने बताया कि रूस के हमलों ने बुनियादी सेवाओं को लगातार निशाना बनाया है, जिससे शांतिपूर्ण çözüm की दिशा में प्रयास और कठिन हो गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र और मानवीय संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि ये स्थिति एक मानवीय संकट में बदल रही है, जहाँ लाखों लोग बिना पर्याप्त गर्मी, बिजली और पानी के रहते हुए ठंड और भूख का सामना कर रहे हैं। UN के आंकड़ों में कहा गया है कि करोड़ों लोग अभी भी बुनियादी सहायता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और इस सर्दी में संकट और गहरा गया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध अब मात्र एक सैन्य संघर्ष नहीं रहा — यह एक मौसम, संसाधन और मानवीय संकट बन चुका है। इतनी ठंडी सर्दियों में बुनियादी जीवन सेवाओं के टूटने से लाखों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर गहरा असर पड़ा है, और इसी के साथ दुनिया के सामने मानवीय राहत, संघर्ष रोकने और दुनिया भर के नेतृत्व के लिए मुश्किल चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।