उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा जांच एजेंसियों के हाथ लगे डिजिटल सबूतों के बाद हुआ है, जिसमें एक मोबाइल फोन के पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर ने पूरे मामले को उजागर कर दिया। पुलिस के मुताबिक यह रैकेट जिमों की आड़ में चलाया जा रहा था और इसमें कई अमीर परिवारों की महिलाओं को टारगेट किया गया था।
जांच अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती शिकायत के आधारित प्राथमिक सबूतों के अभाव में मामला सीमित था, लेकिन जब आरोपी के मोबाइल से पासवर्ड-सुरक्षित फोल्डर खोला गया, तो उसमें 50 से अधिक महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले। इन डिजिटल फाइलों में घूमने-फिरने, यात्राओं और निकाह जैसी गतिविधियों के फोटो भी थे। कई तस्वीरों में महिलाएं बुर्का पहने हुई भी दिखाई दीं, जो यह संकेत देते हैं कि महिलाओं को विभिन्न परिवेशों में ले जाया गया था।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फोल्डर में मिले डिजिटल सबूतों की जांच के बाद पूरी गिरोह की संरचना सामने आई। इसके तहत आरोपियों ने महिलाओं को मुफ्त जिम ट्रेनिंग, पार्टियों और आउटिंग्स के बहाने अपने नेटवर्क में शामिल किया। बाद में उन्हें व्यक्तिगत संपर्कों में फंसाकर निकाह-जैसे सामाजिक रिश्तों का उल्लिखित दस्तावेज भी बनाया गया। पुलिस का दावा है कि जब आरोपी इस डिजिटल सबूत को पुलिस को देने में असमर्थ रहा, तो मामला और गंभीर रूप ले लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने कई जिमों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया था, जिनके नाम KGN 1, KGN 2.0, KGN 3, Iron Fire और Fitness Club शामिल हैं। आरोपियों का आरोप है कि महिलाओं को पहले दोस्ती की पेशकश करके उनके साथ निकाह या करीबी रिश्तों में डालने का प्रयास किया गया और बाद में उन्हें ब्लैकमेल के जरिये धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया। आरोपी इन फोटोज़ और वीडियोज़ को महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल करने की धमकी देते थे, जिससे कई पीड़ितों ने भय के कारण दबाव में आकर कथित तौर पर अपना धर्म बदल लिया।
पुलिस ने अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक सरकारी रेलवे पुलिस का कांस्टेबल भी शामिल है। मुख्य आरोपियों में से दो अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ लुक-आउट नोटिस और इनाम भी घोषित किया गया है। आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह का आर्थिक नेटवर्क और संरचना कितना विस्तृत है और क्या इसके पीछे और भी ऐसे मामले हैं जिन्हें अब तक उजागर नहीं किया गया।
मिर्जापुर धर्मांतरण केस अब सामाजिक मीडिया और स्थानीय समुदायों में व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है, क्योंकि यह सिर्फ एक अपराध मामला नहीं, बल्कि डिजिटल युग में महिलाओं पर दबाव, सामाजिक-धार्मिक पहचान और ब्लैकमेलिंग जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी उजागर करता है।