प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल दौरे के दौरान राज्य को कई विकास परियोजनाओं की सौगात देते हुए राजनीतिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। विभिन्न अवसंरचना, परिवहन और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए उन्होंने कहा कि तेज़ प्रगति के लिए नीतियों में स्पष्टता और शासन में स्थिरता जरूरी है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने केरल की प्राकृतिक क्षमता, पर्यटन संभावनाओं और शिक्षित युवाशक्ति की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि राज्य को अपनी पूर्ण आर्थिक ताकत हासिल करने के लिए नई सोच अपनानी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ने विकास की गति को प्रभावित किया है।
पीएम मोदी ने वाम दलों और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों से सत्ता में रहने वाली पार्टियों ने केरल की संभावनाओं का पूरा उपयोग नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास की बजाय राजनीतिक टकराव को प्राथमिकता दी गई, जिससे उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पाई।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं—जैसे बुनियादी ढांचा विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी, बंदरगाह विकास और रेलवे आधुनिकीकरण—केरल को देश की विकास धारा से और मज़बूती से जोड़ेंगी। उन्होंने युवाओं के लिए स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अवसर बढ़ाने की बात दोहराई।
उन्होंने राज्य में हाल के वर्षों में हुए कुछ सामाजिक और राजनीतिक विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि शांति, निवेश और सुशासन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, विकास तभी संभव है जब नीतिगत निर्णयों में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही हो।
सभा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और यह बदलाव विकास, रोजगार और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के रूप में दिखना चाहिए। उन्होंने केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत बनाने की आवश्यकता भी दोहराई।
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब केरल में राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है और आगामी चुनावों को देखते हुए बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। प्रधानमंत्री का यह दौरा विकास संदेश के साथ-साथ स्पष्ट राजनीतिक संकेत भी देता दिखाई दिया, जिसमें उन्होंने राज्य की जनता से “नई दिशा” पर विचार करने का आग्रह किया।