मध्य पूर्व में 2026 की शुरुआत से ही संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तीव्र रूप से बढ़ रहा है, और अब स्थिति युद्ध की कगार पर पहुंचती नजर आ रही है। अमेरिकी वॉरशिप्स और लड़ाकू विमानों की इलाके में तैनाती के बाद से कूटनीतिक गलियारे की हलचल तेज हो गई है, जिससे विश्लेषक युद्ध की आशंका जताने लगे हैं।
अमेरिका ने USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व की ओर भेज दिया है, जिसमें सुपर कैरियर के साथ मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, पनडुब्बियां और दर्जनों लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह स्ट्राइक समूह अब ईरान के नज़दीक स्थित है और इसे क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के लिए एक प्रमुख संकेत माना जा रहा है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की तैनाती पारंपरिक कूटनीति से परे एक स्पष्ट संदेश भेजती है कि अमेरिका “संभावित सैन्य कार्रवाई” के विकल्प को बिल्कुल बाहर नहीं रख रहा। जहां एक तरफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि सैन्य बल का उपयोग टाला जा सकता है, वहीं उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी सैन्य हमले का सामना कड़ी प्रतिक्रिया से होगा।
इसी बीच इजरायल भी हाई अलर्ट पर है। तेलेविव और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया गया है क्योंकि यदि अमेरिका ईरान पर सीधा हमला करता है तो तेहरान अपने प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से पलटवार कर सकता है, जिसमें मिसाइल हमले और अन्य सैन्य ज़रूरतें शामिल हैं। इजरायली रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संभावित इराक-सीरिया सीमा के आसपास मिसाइलें और ड्रोन सक्रिय हो सकते हैं।
ईरानी शासन ने साफ़ शब्दों में कह दिया है कि कोई भी हमला उनके देश पर “पूर्ण युद्ध” के समकक्ष होगा, और वे हर स्तर पर कट्टर प्रतिक्रिया देंगे। तेहरान के वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर किसी भी तरह की उसकी संप्रभुता का उल्लंघन होता है तो जवाब बहुत गंभीर होगा।
कूटनीतिक मोर्चे पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं, लेकिन वे फिलहाल असमंजस के बीच अटके हुए हैं। ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को भी बातचीत के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है, मगर साथ ही यह भी कहा है कि वे किसी तरह के सैन्य दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, यह सब संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी और दबाव को और बढ़ा रहा है, जिससे ईरान पर किसी भी संभावित हमला का मार्ग खुल सकता है। हालांकि अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है कि कब और कैसे कार्रवाई होगी, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे को लेकर भारत जैसे कई देशों ने भी अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की तैयारी तेज़ कर दी है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और बातचीत के ज़रिये समाधान निकालने की अपील की है, परन्तु सैन्य तैयारियों के कारण मध्य पूर्व का माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है।