विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता संवर्धन नियम, 2026’ के खिलाफ सवर्ण समाज में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और इसी प्रেক্ষापटल पर करणी सेना ने राजधानी लखनऊ में कल (27 जनवरी) बड़े पैमाने पर आंदोलन करने का ऐलान किया है। संगठन ने सवर्ण समुदाय से इस विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर शामिल होने की भी स्पष्ट अपील की है।
करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने कहा है कि यह नया UGC कानून सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है और इससे शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर असमानता और भेदभाव फैल सकता है। उन्होंने इसे समाज में असंतोष फैलाने वाला कदम बताया है और कहा कि परिवर्तन चौक से शाम 4 बजे आंदोलन शुरू होगा।
करणी सेना की अपील में कहा गया है कि जनरल कैटेगरी (सवर्ण) से जुड़े लोग बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल हों, जिससे सरकार के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी जा सके। आंदोलन शांतिपूर्ण रहने का दावा किया गया है, लेकिन इसके व्यापक स्तर पर असर की संभावना को प्रशासन भी गंभीरता से ले रहा है।
इस विरोध की पृष्ठभूमि में यह समझना जरूरी है कि UGC के नए नियम का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना और समान अवसर केंद्र (Equity Cells) को अनिवार्य करना है। इस नियम के तहत SC, ST, OBC सहित सभी वर्गों के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ भेदभाव की शिकायत का अधिकार सुदृढ़ किया गया है।
हालांकि, कुछ सवर्ण समूहों ने इन नियमों पर तीव्र आक्रोश और असंतोष जताया है, यह दावा करते हुए कि ये प्रावधान योग्यता आधारित चयन और अवसरों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ विरोधियों का कहना है कि इस नियमावली से सामान्य वर्ग के लोगों को अन्यायपूर्ण तरीके से फंसाया जा सकता है या उनका पक्ष असुरक्षित रह सकता है।
उत्तर प्रदेश में विरोध केवल करणी सेना तक सीमित नहीं रहा है। कई शहरों में सवर्ण संगठनों और छात्रों ने प्रदर्शन और धरने भी किये हैं, और यहाँ तक कि कुछ प्रशासनिक पदाधिकारियों ने भी नए UGC कानून के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर गहमागहमी बनी हुई है, जहाँ कुछ संगठनों द्वारा सरकार से कानून वापस लेने या संशोधित करने की मांग उठाई जा रही है। विरोध प्रदर्शन अब केवल शैक्षणिक नहीं रहकर सामाजिक-राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।