भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पिछले करीब 18 वर्षों से जारी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत आखिरकार सफलता के साथ पूरी हो गई है और इसका औपचारिक ऐलान आज 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में किया जाएगा, जिसे मीडिया और नीति विशेषज्ञ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के पीछे केंद्र ने पूरा रोडमैप और रणनीति तैयार कर ली है, जिसे वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक किया है।
किसने क्या बताया:
वित्त मंत्रालय और वाणिज्य विभाग की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘मदर ऑफ ऑल डील’ नामक यह मुफ़्त व्यापार समझौता वस्त्र, सेवा, निवेश सहित कुल 24 अध्यायों में विस्तृत होगा, और दोनों पक्षों के बीच टैक्स घटाने, व्यापार शुल्क में ढील और निवेश प्रवाह को आसान बनाने पर काम करेगा।
यह डील भारत के लिए इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और भारतीय निर्यात का लगभग 17% हिस्सा इसी बाजार को जाता है। साथ ही यूरोपीय संघ दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत अर्थव्यवस्था है, जिसकी आर्थिक ताकत 20 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा है।
कब लागू होगा:
आधिकारिक घोषणा आज हो जाएगी, लेकिन यह समझौता तुरंत लागू नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार इसे लागू करने से पहले लगभग 5-6 महीने की कानूनी समीक्षा प्रक्रिया और अनुमोदन की आवश्यकता है। इसके बाद यह संभव है कि यह डील 2027 के मध्य या 2028 की शुरुआत तक प्रभाव में आए।
मुख्य प्रावधान और फायदे:
– भारत यूरोप से आयातित कई सामानों पर लगने वाले कस्टम टैरिफ को तेजी से घटाएगा, जिसमें लक्ज़री कारों पर भी भारी प्रभाव पड़ेगा; टैरिफ को मौजूदा 110% से घटाकर 40% तक लाने का प्रस्ताव है, और बाद में इसे 10% तक लाया जा सकता है। इससे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, वोक्सवैगन जैसी ब्रांडों की कीमतें भारत में कम हो सकती हैं।
– वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मा और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे मुख्य निर्यात वर्गों को EU बाजार में और अधिक अवसर मिल सकते हैं।
– ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी नई गति मिलने की संभावना है और एफटीए से निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक संदर्भ:
इस समझौते को EU के प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेन ने दुनिया के लिए स्थिरता और समृद्धि का मार्ग बताया है और कहा है कि अगर भारत सफल होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील न सिर्फ व्यापार को बढ़ाएगी बल्कि भारत को वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक महत्त्व देने में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।