देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को लेकर एक अहम और चिंताजनक जानकारी सामने आई है। सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि एयर इंडिया और इंडिगो के बड़ी संख्या में विमानों में बार-बार तकनीकी खराबियां दर्ज की गई हैं। सरकार के मुताबिक, कुल 754 विमानों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एयर इंडिया के 191 और इंडिगो के 148 विमानों में विभिन्न तरह की तकनीकी समस्याएं पाई गईं। इस खुलासे के बाद विमान सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि इन विमानों की जांच डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के दिशा-निर्देशों के तहत की गई। जांच के दौरान इंजन, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, हाइड्रोलिक सिस्टम, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और एवियोनिक्स से जुड़ी खामियां सामने आईं। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सामने आईं अधिकतर खामियां उड़ान सुरक्षा के लिहाज से गंभीर नहीं थीं और समय रहते उन्हें दुरुस्त कर लिया गया।
एयर इंडिया के विमानों में तकनीकी समस्याओं की संख्या अधिक होने को लेकर सरकार ने बताया कि एयरलाइन के बेड़े में कई पुराने विमान शामिल हैं, जिनका रखरखाव लगातार चुनौती बना हुआ है। टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया अपने विमानों के आधुनिकीकरण और रखरखाव पर विशेष ध्यान दे रही है। नए विमानों की खरीद और पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना भी इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
वहीं इंडिगो के मामले में सरकार ने कहा कि यह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है और इसके विमानों की संख्या भी अधिक है। इसी वजह से तकनीकी खामियों के मामले अपेक्षाकृत ज्यादा दर्ज हुए। मंत्रालय का कहना है कि इंडिगो ने DGCA के सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया है और हर रिपोर्टेड खराबी को समय पर ठीक किया गया।
सरकार ने संसद को भरोसा दिलाया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और विमानन कंपनियों की नियमित निगरानी की जा रही है। DGCA द्वारा रैंडम ऑडिट, स्पॉट चेक और तकनीकी निरीक्षण लगातार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, किसी भी गंभीर तकनीकी खामी की स्थिति में संबंधित विमान को उड़ान से तुरंत हटा दिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती हवाई यात्रा के दबाव और विमानों के लगातार उपयोग के चलते तकनीकी जांच और रखरखाव की भूमिका और भी अहम हो गई है। संसद में सरकार का यह बयान विमानन सुरक्षा को लेकर पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह संकेत भी देता है कि इस क्षेत्र में सतर्कता और कड़े निगरानी तंत्र की लगातार जरूरत बनी रहेगी।