प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों को तनाव, असफलता और सफलता को लेकर एक अलग ही नजरिया दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ टॉपर बनने की दौड़ में खुद को न झोंकना चाहिए, बल्कि काबिल बनने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कामयाबी अपने आप पीछे-पीछे आती है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि समय के साथ टॉपर्स के नाम भुला दिए जाते हैं, लेकिन जो लोग जीवन में कुछ नया और सार्थक करते हैं, वही याद रखे जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा जीवन का एक अहम हिस्सा जरूर है, लेकिन पूरी जिंदगी नहीं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे खुद की तुलना दूसरों से न करें, क्योंकि हर व्यक्ति की क्षमताएं अलग होती हैं। पीएम मोदी ने कहा, “आप जिस क्षेत्र में रुचि रखते हैं, उसी में खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें। अगर आप योग्य बनेंगे, तो सफलता को आपके पीछे आना ही पड़ेगा।”
📚 टॉपर बनने का दबाव नुकसानदेह
पीएम मोदी ने टॉपर संस्कृति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर टॉपर्स को जरूरत से ज्यादा महिमामंडित किया जाता है, जबकि असली सफलता उन लोगों को मिलती है जो अपनी क्षमताओं को पहचानकर लगातार मेहनत करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्षों बाद बहुत कम लोग यह याद रखते हैं कि किसने कौन-सी परीक्षा में टॉप किया था, लेकिन नवाचार, नेतृत्व और योगदान देने वालों को समाज कभी नहीं भूलता।
🧠 तनाव और असफलता से कैसे निपटें
प्रधानमंत्री ने परीक्षा के तनाव पर बात करते हुए कहा कि डर और दबाव से सीखने की क्षमता कमजोर होती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे परीक्षा को उत्सव की तरह लें और असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखें। पीएम मोदी के अनुसार, असफलता यह बताती है कि अभी सुधार की गुंजाइश है और यही आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है।
👨👩👧👦 माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका
पीएम मोदी ने माता-पिता और शिक्षकों से भी अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को डॉक्टर या इंजीनियर बनना जरूरी नहीं, बल्कि उसे वही करने दिया जाना चाहिए, जिसमें वह खुश और सक्षम महसूस करे। सकारात्मक माहौल बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
🌱 जीवन कौशल पर जोर
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता सिर्फ अंकों से तय नहीं होती, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन और मानसिक संतुलन जैसे गुण ज्यादा अहम हैं। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि काबिल बनने पर फोकस करें, क्योंकि जब योग्यता होगी, तो सफलता खुद आपके दरवाजे पर दस्तक देगी।