पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को हुए एक भीषण आत्मघाती धमाके ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस हमले में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि 160 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब पाकिस्तान पहले ही आतंकी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमाका एक अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाके में किया गया, जहां सुबह के समय आम लोगों की आवाजाही काफी ज्यादा थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को विस्फोटकों से उड़ाया, जिससे चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और आसपास की इमारतों के शीशे तक टूट गए।
राहत और बचाव कार्य जारी
हमले के तुरंत बाद पुलिस, रेंजर्स और बचाव दल मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेर लिया गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने आपातकाल घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, कई घायलों को सिर, पेट और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। शवों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
धमाके के बाद इस्लामाबाद समेत आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। प्रमुख सरकारी इमारतों, दूतावासों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने हमले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि हमलावर के नेटवर्क और साजिश के पीछे के लोगों का पता लगाया जा सके।
आतंकी संगठन पर शक
हालांकि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन का हाथ हो सकता है। हाल के महीनों में पाकिस्तान में आत्मघाती हमलों और टार्गेट किलिंग की घटनाओं में इजाफा हुआ है, जिससे सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हमले की खबर सामने आते ही पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं ने इसकी कड़ी निंदा की। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। वहीं, कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस आतंकी हमले की निंदा करते हुए पाकिस्तान के साथ एकजुटता दिखाई है।
बढ़ती आतंकी हिंसा पर सवाल
इस्लामाबाद जैसे हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में हुए इस आत्मघाती हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला न सिर्फ आम नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश है, बल्कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को खुली चुनौती भी है।
फिलहाल पूरे देश में शोक और गुस्से का माहौल है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर राजधानी के दिल में इतना बड़ा हमला कैसे अंजाम दिया गया और इसके पीछे कौन-सी ताकतें सक्रिय हैं।